नई दिल्ली: झारखंड उच्च न्यायालय के पूर्व कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश और दिल्ली के लोकायुक्त हरीश चंद्र मिश्रा का आज सुबह नई दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में निधन हो गया। उनके निधन की खबर मिलते ही झारखंड के न्यायिक क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। दिवंगत न्यायमूर्ति का झारखंड के साथ बेहद गहरा और ऐतिहासिक संबंध रहा है।
हरीश चंद्र मिश्रा का झारखंड से गहरा नाता
राज्य गठन के बाद वर्ष 2000 में वे झारखंड सुपीरियर ज्यूडिशियल सर्विस में शामिल हुए। इसके बाद उन्होंने देवघर में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, रांची में सीबीआई के विशेष न्यायाधीश (चारा घोटाला मामलों की सुनवाई) तथा देवघर व चाईबासा में जिला एवं सत्र न्यायाधीश के रूप में अपनी सेवाएं दीं। वे झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (जालसा) के सदस्य सचिव और झारखंड हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल भी रहे।
चारा घोटाला मामलों में विशेष न्यायाधीश के रूप में भूमिका
रांची में सीबीआई के विशेष न्यायाधीश के तौर पर उन्होंने बहुचर्चित चारा घोटाला से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुकदमों की सुनवाई की। इस दौरान उनकी निष्पक्षता और कानूनी समझ की व्यापक सराहना हुई। सहयोगियों के अनुसार, वे बेहद अनुशासित और संवेदनशील न्यायाधीश थे जो हर मामले को गहराई से समझते थे।
झारखंड हाईकोर्ट में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश का कार्यकाल
अप्रैल 2011 में उन्हें झारखंड उच्च न्यायालय में न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया। अगस्त 2019 से नवंबर 2019 तक उन्होंने झारखंड हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश का अहम पद संभाला। इस संक्षिप्त अवधि में भी उन्होंने प्रशासनिक कुशलता का परिचय देते हुए कई लंबित मामलों के निपटारे में तेजी लाई।
दिल्ली लोकायुक्त के रूप में अंतिम जिम्मेदारी
झारखंड हाईकोर्ट की सेवा के बाद वे दिल्ली के लोकायुक्त नियुक्त किए गए। इस पद पर रहते हुए उन्होंने भ्रष्टाचार विरोधी कई अहम जांचों का नेतृत्व किया और शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत बनाने का प्रयास किया। उनकी सादगी और कर्तव्यनिष्ठा दिल्ली के प्रशासनिक गलियारों में भी याद की जाती है।
न्यायिक जगत ने दी श्रद्धांजलि
उनके निधन पर झारखंड हाईकोर्ट के वर्तमान न्यायाधीशों, अधिवक्ताओं और पूर्व सहयोगियों ने गहरा शोक व्यक्त किया है। झारखंड हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने एक शोक सभा आयोजित कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने कहा कि हरीश चंद्र मिश्रा ने न्यायपालिका की गरिमा को बनाए रखने में जीवन पर्यंत योगदान दिया।
उनके पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा और अंतिम संस्कार नई दिल्ली में ही किए जाने की संभावना है। न्यायिक बिरादरी ने उनके परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की है।
झारखंड उच्च न्यायालय के इतिहास में उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा। अधिक जानकारी के लिए झारखंड उच्च न्यायालय का विकिपीडिया पृष्ठ देखें।



