चौपारण: मरहेड़ी में 108 मुस्लिम वोटरों का नाम कटवाने की साजिश का आरोप सामने आने के बाद इलाके में सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। हजारीबाग जिले के चौपारण प्रखंड अंतर्गत ताजपुर पंचायत के मरहेड़ी गांव में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान यह गंभीर मामला प्रकाश में आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि सुनियोजित तरीके से फॉर्म-7 का दुरुपयोग कर एक खास समुदाय के मतदाताओं को सूची से हटाने का प्रयास किया गया।
मरहेड़ी में 108 मुस्लिम वोटरों का नाम कटवाने की साजिश: पूरा घटनाक्रम
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मरहेड़ी गांव के ग्रामीण लडन खान ने पंकज वर्णवाल, रवि कुमार और रिशु वर्णवाल पर गंभीर आरोप लगाए हैं। लडन खान के मुताबिक, इन तीनों युवकों ने मिलकर करीब 108 भरे हुए फॉर्म-7 संबंधित बूथ की बीएलओ शहजादी खातून को सौंपे और उन पर हस्ताक्षर करने का दबाव बनाया। फॉर्म-7 मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए भरा जाता है। इस पूरे प्रकरण ने तब और तूल पकड़ लिया जब बीएलओ शहजादी खातून ने स्वयं मीडिया के सामने आकर इसकी पुष्टि की।
बीएलओ का चौंकाने वाला खुलासा
बीएलओ शहजादी खातून ने बताया, “जो 108 फॉर्म मुझे दिए गए, उनमें सभी नाम मुस्लिम समुदाय के लोगों के हैं, उसमें मेरा खुद का नाम भी शामिल है।” इस खुलासे के बाद मामले ने सांप्रदायिक रंग ले लिया और ग्रामीणों में भारी आक्रोश फैल गया। बीएलओ के इस बयान ने प्रशासनिक महकमे में भी हलचल मचा दी है। शहजादी खातून के अनुसार, उन्हें फॉर्म जमा करने के लिए मजबूर किया जा रहा था, लेकिन उन्होंने अपनी सूझबूझ से काम लिया और पूरे मामले को ग्रामीणों के सामने उजागर कर दिया।
ग्रामीणों का विरोध और पूर्व विधायक का समर्थन
घटना की जानकारी मिलते ही ताजपुर के पूर्व मुखिया शौकत खान के नेतृत्व में बड़ी संख्या में ग्रामीण लामबंद हो गए। पूर्व विधायक उमाशंकर अकेला यादव भी ग्रामीणों के समर्थन में आगे आए। ग्रामीणों का एक प्रतिनिधिमंडल पूर्व विधायक के साथ अंचल कार्यालय पहुंचा और अंचलाधिकारी संजय यादव को पूरे मामले से अवगत कराया। ग्रामीणों ने स्पष्ट मांग की कि बिना स्थलीय जांच के किसी भी वैध मतदाता का नाम न काटा जाए। उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र की जड़ों पर सीधा हमला है।
प्रशासन का रुख और आगे की कार्रवाई
मामले पर अंचलाधिकारी संजय यादव ने कहा कि ग्रामीण संबंधित दस्तावेज प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) को उपलब्ध कराएं, जिस पर निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी के स्तर से नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि मामले की निष्पक्ष जांच होगी। वहीं पूर्व विधायक उमाशंकर अकेला यादव ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि इस मामले में दोषियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो ग्रामीणों के साथ बीडीओ और प्रखंड कार्यालय का घेराव किया जाएगा।
चुनाव आयोग के दिशानिर्देश और फॉर्म-7 का प्रावधान
भारत निर्वाचन आयोग के नियमानुसार, मतदाता सूची से किसी भी व्यक्ति का नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 भरा जाता है। इसके लिए ठोस आधार होना आवश्यक है, जैसे मृत्यु, स्थानांतरण या दोहरी प्रविष्टि। आयोग के दिशानिर्देशों के अनुसार, बीएलओ को फॉर्म-7 स्वीकार करने से पहले स्थलीय सत्यापन करना अनिवार्य होता है। भारत निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर इस संबंध में विस्तृत जानकारी उपलब्ध है। मरहेड़ी के मामले में आरोप है कि इन प्रक्रियाओं का पालन किए बिना ही थोक में फॉर्म-7 जमा कराने का प्रयास किया गया।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और आगे की रणनीति
इस घटना को लेकर राजनीतिक दलों में भी हलचल है। स्थानीय नेताओं का कहना है कि मतदाता सूची पुनरीक्षण जैसे संवेदनशील कार्य में किसी भी तरह की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ग्रामीणों ने मांग की है कि जिन लोगों ने फॉर्म-7 भरे हैं, उनकी पहचान उजागर की जाए और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो। साथ ही बीएलओ शहजादी खातून को सुरक्षा प्रदान की जाए, क्योंकि उन्होंने साहस दिखाकर इस साजिश का पर्दाफाश किया है। फिलहाल प्रशासन ने मामले को जांच के दायरे में ले लिया है और आरोपों की सत्यता की पड़ताल की जा रही है।
इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का आक्रोश जायज है, क्योंकि मताधिकार लोकतंत्र का आधार है और इससे किसी भी तरह का खिलवाड़ संविधान की भावना के विरुद्ध है। देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई करता है।



