सेंट ज्यूड्स विद्यालय में धूमधाम से मनाई गई भारत रत्न डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की जयंती
तेघड़ा बेगूसराय),
सेंट ज्यूड्स विद्यालय, फुलवरिया, बरौनी में आज भारत के महान वैज्ञानिक, प्रख्यात शिक्षाविद्, दूरदर्शी विचारक एवं पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की जयंती अत्यंत श्रद्धा, उत्साह एवं गरिमामय वातावरण में मनाई गई। इस अवसर पर विद्यालय में एक विशेष प्रातःकालीन सभा का आयोजन किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा, रचनात्मकता एवं अभिव्यक्ति-कौशल का उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए महान वैज्ञानिक के प्रेरणादायी जीवन और आदर्शों को जीवंत कर दिया।कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को डॉ. कलाम के संघर्षपूर्ण जीवन, वैज्ञानिक उपलब्धियों, अनुशासन, सादगी, राष्ट्रप्रेम तथा शिक्षा के प्रति उनके समर्पण से परिचित कराना और उनमें बड़े सपने देखने तथा उन्हें साकार करने का संकल्प विकसित करना था।कार्यक्रम की शुरुआत प्रार्थना एवं प्रेरणादायी विचारों के साथ हुई। इसके पश्चात विद्यार्थियों ने प्रभावशाली भाषणों, मनमोहक कविताओं, ज्ञानवर्धक प्रश्नोत्तरी, आकर्षक नाटकों एवं लघु नाटिकाओं सहित विविध प्रस्तुतियों के माध्यम से डॉ. कलाम के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डाला। प्रत्येक प्रस्तुति में उनके जीवन-मूल्यों, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और राष्ट्र निर्माण के प्रति अटूट प्रतिबद्धता की झलक दिखाई दी।
कार्यक्रम का सबसे आकर्षक एवं भावपूर्ण क्षण वह था, जब एक विद्यार्थी ने डॉ. कलाम की विशिष्ट वेशभूषा धारण कर उनके व्यक्तित्व को सजीव रूप में प्रस्तुत किया। उनकी प्रस्तुति ने उपस्थित सभी लोगों का ध्यान आकर्षित किया और महान वैज्ञानिक की स्मृतियों को ताजा कर दिया।इस अवसर पर प्रस्तुत विशेष नाटक डॉ. कलाम के बचपन और उनके प्रेरणादायी जीवन-सफर पर आधारित था। नाटक में रामेश्वरम में समाचार-पत्र वितरित करने वाले एक साधारण बालक से लेकर देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद, राष्ट्रपति भवन तक पहुँचने की उनकी असाधारण यात्रा को प्रभावशाली ढंग से दर्शाया गया। इस प्रस्तुति ने यह संदेश दिया कि सफलता किसी की प्रारंभिक परिस्थितियों की मोहताज नहीं होती। दृढ़ इच्छाशक्ति, कठोर परिश्रम, अनुशासन, निरंतर सीखने की ललक और अपने सपनों के प्रति अटूट विश्वास के बल पर कोई भी व्यक्ति असाधारण ऊँचाइयाँ प्राप्त कर सकता है।विद्यार्थियों की आत्मविश्वासपूर्ण प्रस्तुतियों, प्रभावशाली संवादों और उत्कृष्ट अभिव्यक्ति ने पूरे वातावरण को प्रेरणा एवं उत्साह से भर दिया। कार्यक्रम ने सभी को यह स्मरण कराया कि डॉ. कलाम केवल भारत के महान वैज्ञानिक और पूर्व राष्ट्रपति ही नहीं थे, बल्कि वे करोड़ों युवाओं के मार्गदर्शक, विद्यार्थियों के प्रिय शिक्षक और एक विकसित, आत्मनिर्भर एवं सशक्त भारत के स्वप्नद्रष्टा भी थे।
विद्यालय के चेयरमैन श्री शंकर कुमार, मैनेजिंग डायरेक्टर श्री ओम नारायण तथा एकेडमिक डायरेक्टर श्री राहुल कुमार ने डॉ. कलाम के जीवन और विचारों को विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का अमूल्य स्रोत बताते हुए इस प्रकार के शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों के महत्त्व को रेखांकित किया। उन्होंने विद्यार्थियों को जिज्ञासु बनने, वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने, ज्ञान अर्जित करने तथा अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने के लिए प्रेरित किया।विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री संतोष पांडेय ने डॉ. कलाम को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि डॉ. कलाम का जीवन प्रत्येक विद्यार्थी के लिए प्रेरणा, संघर्ष, समर्पण और सफलता का अनुपम उदाहरण है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे केवल बड़े सपने ही न देखें, बल्कि उन सपनों को साकार करने के लिए निरंतर परिश्रम करें, अपने चरित्र को मजबूत बनाएँ, समय का सदुपयोग करें और समाज तथा राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से निर्वहन करें।उन्होंने यह भी कहा कि विद्यालय का उद्देश्य केवल विद्यार्थियों को अकादमिक ज्ञान प्रदान करना नहीं, बल्कि उनमें मानवीय मूल्यों, वैज्ञानिक सोच, आत्मविश्वास, अनुशासन और राष्ट्रप्रेम का विकास करना भी है, ताकि वे भविष्य में जिम्मेदार नागरिक और राष्ट्र के सशक्त निर्माता बन सकें।कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को यह संदेश दिया गया कि डॉ. कलाम के सपनों का भारत तभी साकार हो सकता है, जब देश का प्रत्येक युवा ज्ञान, नवाचार, नैतिकता और परिश्रम को अपने जीवन का आधार बनाए।अंत में, विद्यालय परिवार ने महान वैज्ञानिक एवं भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के आदर्शों को आत्मसात करने तथा उनके सपनों के विकसित भारत के निर्माण में अपना योगदान देने का संकल्प व्यक्त किया।“सपने वे नहीं हैं जो हम सोते समय देखते हैं, सपने वे हैं जो हमें सोने नहीं देते।”डॉ. कलाम के विचार आज भी देश की युवा पीढ़ी को नई दिशा, नई ऊर्जा और नए संकल्प प्रदान कर रहे हैं। उनकी प्रेरणादायी विरासत सदैव विद्यार्थियों के मन में ज्ञान की ज्योति प्रज्वलित करती रहेगी।“ज्ञान, संस्कार और नवाचार के साथ उज्ज्वल भविष्य की ओर।”



