*आज दिनांक 1 नवंबर 2026 को पखवाड़ा दिवस के रूप में बाबा कार्तिक उरांव का जन्मदिन आरोग्य भवन बरियातू के सभागार में बड़ी ही धूमधाम से मनाया गया*।
*सर्वप्रथम बाबा कार्तिक उरांव की फोटो पर दीप प्रज्वलित एवं पुष्प अर्पित कर नमन की गई*। *इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व सांसद एवं पूर्व मंत्री माननीय श्री सुदर्शन भगत जी, विशिष्ट अतिथि के रूप में पूर्व राज्यसभा सांसद माननीय श्री समीर उरांव जी,महापौर* *रोशनी खालखो, बबलू मुंडा अध्यक्ष केंद्रीय सरना समिति, गुरुचरण मुंडा, विश्वकर्मा पहान व कई सामाजिक अगुवा लोग उपस्थित थे*।
*मुख्य अतिथि माननीय श्री सुदर्शन भगत जी ने कहा कि जनजाति सुरक्षा मंच पूरे भारत देश में कार्तिक बाबू के आधा अधूरे कार्य को सुचारू रूप से चला रहे हैं उनके अनुसार जो जनजाति अपने रूढ़ि प्रथा रीति रिवाज संस्कृति छोड़कर ईसाई इस्लाम बन गए हैं वैसे लोगों को अनुसूचित जनजाति का आरक्षण का लाभ मिलना बंद हो*।
*विशिष्ट अतिथि के तौर पर माननीय राज्यसभा सांसद श्री समीर उरांव जी ने कार्तिक बाबू के जीवनी पर प्रकाश डालते हुए कहा वह बहुत गरीब परिवार से थे उनका जन्म 29 अक्टूबर 1924 गुमला जिला के सिसई प्रखंड करौंदा लिटा टोली में हुआ था। उन्होंने बहुत गरीबी में दसवीं तक पढ़ाई की इसके बाद में उच्च पढ़ाई के लिए पटना से इंजीनियर की पढ़ाई की तथा और आगे की पढ़ाई के लिए वह विदेश चले गए और उन्होंने 7 नोबेल अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त की। आज के समय में जनजाति समाज में उनके समान कोई विद्वान नहीं है। कार्तिक बाबू के द्वारा ही कांके में बिरसा कृषि विश्वविद्यालय, धुर्वा में हैवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड, राजेंद्र मेडिकल कॉलेज, केंद्रीय सरना स्थल सिरम टोली तथा लोगों को एग्जिट करने के लिए आंखड़ा अखाड़ा में बैठक करना, लोगों को जुटाना, हक अधिकार की बात बताना, संगठित रहना, केंद्रीय सरना स्थल सिरम टोली की जमीन भी इन्हीं के द्वारा बचाया गया है तथा सरहुल शोभायात्रा में सभी आदिवासियों के एकजुट करना इन्हीं की देन है साथ ही साथ अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद के का गठन करना तथा आदिवासियों का उत्थान हो एवं शिक्षित हो इसके लिए भी प्रयास रहे थे। आज भी अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद कार्यरत है जो गरीब आदिवासी बाल बच्चों की पढ़ाई लिखाई कर शिक्षित कर रही है*।
*दो बार माननीय मंत्री और एक बार सामान्य सांसद बनने के उपरांत 20 साल का अनुभव कर 20 वर्ष की काली रात एक किताब भी लिखी है । इस किताब में किस प्रकार से आदिवासियों का हक अधिकार और धर्मांतरण किया जाता है उसका जिक्र है इस किताब को पढ़ने से अंदर में बहुत ही दर्द होती है*।
*सन 1967 70 की दशक में बाबा कार्तिक उरांव ने सदन पटेल पर एक बिल लाए थे जिसमें 348 सांसदों का हस्ताक्षर युक्त बिल प्रस्तुत किए थे*। *इस बिल में यही था कि जो जनजाति अपने रूढ़ि प्रथा रीति रिवाज धर्म संस्कृति छोड़कर ईसाई इस्लाम अपना लिए हैं वैसे लोगों को अनुसूचित जनजाति का आरक्षण का लाभ मिलना बंद हो*। *लेकिन यह बिल पास नहीं हो सका और आज जस का तस पड़ा हुआ है। इन्हीं के कार्यों को जनजाति सुरक्षा मंच विगत 2006 से पूरे भारत देश में एक जन आंदोलन के रूप में कार्य कर रही है और आज नहीं तो कल जनजाति का आरक्षण का लाभ किसानों एवं मुसलमान को मिलना बंद हो जाएगा*।
*कार्यक्रम में बबलू मुंडा अध्यक्ष केंद्रीय सरना समिति एवं महापौर श्रीमती रोशनी खलखो ने भी संबोधित किया*।
*कार्यक्रम की अध्यक्षता क्षेत्रीय संयोजक जनजाति सुरक्षा मंच संदीप उरांव ने की, संचालन जनजाति सुरक्षा मंच के संयोजक सुनील उरांव तथा धन्यवाद ज्ञापन जनजाति सुरक्षा मंच के मीडिया प्रभारी सोमा उरांव ने दी*।
*कार्यक्रम में संकल्प लिया गया कि बाबा कार्तिक उरांव के आदर्शों का सभी निस्वार्थ भाव से पालन करेंगे*।
*कार्यक्रम में, हिंदुवा उराँव, गुरुचरण मुंडा, बालेश्वर पहान, विश्वकर्मा पहान, चारवा खलखो, नामित हेमराम, नकुल तिर्की वार्ड पार्षद नगर निगम रांची, प्रदीप लकड़ा, सुजाता मुंडा, सुषमा कुमारी, दीनबंधु सिंह, जादो उरांव, व अन्य कार्यकर्ता उपस्थित



