नई दिल्ली: केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने विकसित भारत–रोजगार एवं आजीविका मिशन यानी वीबी-जी राम जी अधिनियम के तहत वीबी-जी राम जी शिकायत निवारण नियम 2026 को आधिकारिक तौर पर अधिसूचित कर दिया है। इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण विकास योजनाओं के क्रियान्वयन से जुड़ी समस्याओं का समयबद्ध, पारदर्शी और प्रभावी समाधान सुनिश्चित करना है। इस योजना के बारे में अधिक जानकारी के लिए आप ग्रामीण विकास मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट पर जा सकते हैं।
वीबी-जी राम जी शिकायत निवारण नियम और बहुस्तरीय व्यवस्था
सरकार द्वारा जारी नए नियमों के तहत राज्य सरकारों को ग्राम पंचायत, ब्लॉक और जिला स्तर पर एक मजबूत और बहुस्तरीय शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करना होगा। इन विभिन्न स्तरों पर नामित शिकायत निवारण अधिकारी तैनात किए जाएंगे, जो नागरिकों की शिकायतें प्राप्त करने, उनका पंजीकरण करने, उनकी जांच करने और तय सीमा में उनका निपटारा करने के लिए पूरी तरह जिम्मेदार होंगे। जिला कार्यक्रम समन्वयक इस पूरी व्यवस्था की निगरानी करेंगे ताकि डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से पारदर्शिता बनी रहे।
शिकायत दर्ज कराने के आसान माध्यम और पंजीकरण प्रक्रिया
नागरिकों के लिए अपनी बात रखना बेहद आसान बनाया गया है। शिकायत दर्ज कराने के लिए कई विकल्प उपलब्ध कराए गए हैं:
- नामित शिकायत निवारण अधिकारी के समक्ष व्यक्तिगत रूप से आवेदन देना।
- डिफरेंट डिलीवरी प्रूफ के साथ स्पीड पोस्ट द्वारा शिकायत भेजना।
- केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर पोर्टल का उपयोग करना।
- टेलीफोन, हेल्पलाइन या राज्य सरकार द्वारा तय अन्य माध्यमों से संपर्क करना।
ग्राम पंचायत, ब्लॉक या जिला स्तर पर प्राप्त होने वाली सभी भौतिक शिकायतों को उसी दिन या अगले कार्य दिवस तक अनिवार्य रूप से डिजिटल पोर्टल पर पंजीकृत करना होगा। पंजीकरण के बाद शिकायतकर्ता को पावती रसीद दी जाएगी जिसमें पंजीकरण संख्या और अधिकारी का पदनाम दर्ज होगा। प्रक्रियागत कमियों के आधार पर किसी भी शिकायत को खारिज नहीं किया जा सकता है।
जांच और निपटारे के लिए निर्धारित सख्त समय-सीमा
नियमों के अनुसार प्रत्येक पंजीकृत शिकायत की जांच 7 कार्य दिवसों के भीतर पूरी करना अनिवार्य कर दिया गया है। जांच के बाद अधिकारी आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाएंगे। इसके साथ ही, प्रत्येक शिकायत का अंतिम निवारण उसकी प्राप्ति की तारीख से कुल 15 दिनों के भीतर होना जरूरी है। यदि तय 15 दिनों में समाधान नहीं होता है, तो मामले स्वतः उच्च स्तर पर भेज दिए जाएंगे। इस पूरी व्यवस्था से प्रशासनिक जवाबदेही मजबूत होगी और ग्रामीण परिवारों के अधिकारों का संरक्षण सुनिश्चित होगा।



