रांची: नामकुम में स्वास्थ्य कर्मियों का प्रदर्शन सोमवार को 21 सूत्री मांगों को लेकर स्वास्थ्य निदेशालय परिसर में जोरदार तरीके से हुआ। झारखंड चिकित्सा एवं जन स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के बैनर तले राज्यभर से आए लगभग 600 अनुबंध एएनएम, एमपीडब्ल्यू और आउटसोर्सिंग कर्मियों ने निदेशक प्रमुख (स्वास्थ्य सेवाएं) के कार्यालय का घेराव किया और दोनों मुख्य द्वारों को बंद कर जमकर नारेबाजी की।
नामकुम में स्वास्थ्य कर्मियों का प्रदर्शन: प्रमुख मांगें और विवाद
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में आउटसोर्सिंग कर्मियों को समान काम के बदले न्यूनतम 32,000 रुपये मानदेय देना, महिला कर्मचारियों को प्रतिमाह दो दिनों का विशेष अवकाश प्रदान करना, और मई 2026 से लंबित बकाये का तत्काल भुगतान करना शामिल था। इसके अलावा अनुबंध एएनएम को स्वास्थ्य बीमा एवं 15,000 रुपये मासिक इंसेंटिव देने, एमपीडब्ल्यू कर्मियों को वरीयता के आधार पर नियमित करने, कर्मचारी चयन आयोग के विवादित विज्ञापन को रद्द करने, लिपिकों के स्थानांतरण आदेश को निरस्त करने तथा बिहार की तर्ज पर पदसोपान लागू करने जैसी मांगें भी प्रमुखता से उठाई गईं।
आउटसोर्सिंग कर्मियों के मानदेय का मुद्दा
आउटसोर्सिंग कर्मियों का कहना है कि वे वर्षों से स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ बने हुए हैं, लेकिन उन्हें न्यूनतम मजदूरी से भी कम मानदेय मिलता है। संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि पड़ोसी राज्यों में इसी तरह के पदों पर 30,000 से 35,000 रुपये तक दिए जा रहे हैं। ऐसे में 32,000 रुपये की मांग पूरी तरह न्यायसंगत है। इस संबंध में झारखंड सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर भी न्यूनतम मजदूरी अधिसूचना देखी जा सकती है।
महिला कर्मचारियों के लिए विशेष अवकाश
महिला स्वास्थ्य कर्मियों ने प्रति माह दो दिनों के विशेष अवकाश की मांग रखी। उनका तर्क है कि ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत महिला एएनएम को पारिवारिक जिम्मेदारियों और स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों के लिए अतिरिक्त अवकाश की आवश्यकता होती है। बिहार और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में ऐसी व्यवस्था पहले से लागू है।
प्रशासन का आश्वासन और आगे की रणनीति
धरना-प्रदर्शन के बाद संघ के प्रतिनिधिमंडल ने निदेशक प्रमुख के साथ सभी 21 बिंदुओं पर विस्तृत चर्चा की। वार्ता में प्रशासन की ओर से 10 दिनों के भीतर सभी मांगों पर आवश्यक कार्रवाई करने का आश्वासन दिया गया। साथ ही 31 अगस्त को पुनः समीक्षा बैठक निर्धारित करते हुए पत्रांक 252 (दिनांक 25.08.2026) के जरिए लिखित पत्र भी सौंपा गया। संघ के नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि तय समय सीमा में ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों का बयान
इस धरने को संबोधित करते हुए संघ के अध्यक्ष भूषण कुमार ने कहा कि स्वास्थ्य कर्मी कोरोना काल से लगातार विषम परिस्थितियों में काम कर रहे हैं, लेकिन उनकी जायज मांगों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। महासचिव अरविंद प्रसाद ने बताया कि कर्मचारी चयन आयोग का हालिया विज्ञापन अनुबंध कर्मियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। कोषाध्यक्ष जीतवाहन उरांव ने लिपिकों के मनमाने स्थानांतरण का विरोध किया। उपाध्यक्ष महेश सिंह, सुधीर थापा, मीरा कुमारी और चन्द्रदीप ठाकुर ने भी अपनी बात रखी।
स्वास्थ्य सेवाओं पर असर और जन प्रतिक्रिया
प्रदर्शन के दौरान नामकुम स्थित स्वास्थ्य निदेशालय का कामकाज पूरी तरह ठप रहा। हालांकि संघ ने दावा किया कि अस्पतालों में आपातकालीन सेवाएं बाधित नहीं होने दी गईं। स्थानीय निवासियों और मरीजों के परिजनों ने कर्मचारियों की मांगों का समर्थन करते हुए कहा कि सरकार को स्वास्थ्य कर्मियों के कल्याण पर ध्यान देना चाहिए। झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री ने भी मामले का संज्ञान लेते हुए जल्द समाधान का भरोसा दिलाया है।
इस आंदोलन ने एक बार फिर झारखंड में अनुबंध और आउटसोर्सिंग स्वास्थ्य कर्मियों की अनिश्चित सेवा शर्तों को उजागर किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्वास्थ्य प्रणाली की मजबूती के लिए इन कर्मियों को नियमितीकरण और सम्मानजनक मानदेय देना आवश्यक है। झारखंड सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर स्वास्थ्य विभाग की नीतियों और अधिसूचनाओं की जानकारी उपलब्ध है।
अब सबकी निगाहें 31 अगस्त की समीक्षा बैठक पर टिकी हैं। यदि प्रशासन अपने वादे पर खरा उतरता है तो यह राज्य के हजारों स्वास्थ्य कर्मियों के लिए राहत भरा कदम होगा, अन्यथा आंदोलन का अगला चरण और व्यापक हो सकता है।



