काठमांडू: नेपाल के रसुवा क्षेत्र में बुधवार को भोटेकोशी नदी की बाढ़ ने भीषण तबाही मचा दी है। तिब्बत सीमा से आए अचानक सैलाब के कारण अब तक 160 लोगों की मौत की आधिकारिक पुष्टि हो चुकी है, जबकि 750 से अधिक लोग लापता बताए जा रहे हैं। यह आपदा नेपाल के हालिया वर्षों की सबसे विनाशकारी प्राकृतिक घटनाओं में से एक है।
तिब्बत सीमा से आया मौत का सैलाब
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बाढ़ का पानी तिब्बत की ओर से भोटेकोशी नदी में अत्यधिक मात्रा में प्रवेश कर गया। इस तेज बहाव के साथ आए विशाल मलबे और बोल्डर ने अपने रास्ते में आने वाली हर चीज को तहस-नहस कर दिया। रसुवा जिले के प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि बाढ़ इतनी तेजी से आई कि स्थानीय निवासियों और पर्यटकों को सुरक्षित स्थान पर जाने का अवसर ही नहीं मिला।
प्रभावित जिले और बुनियादी ढांचे को नुकसान
बाढ़ का असर भोटेकोशी और त्रिशूला नदी के आसपास के क्षेत्रों में तेजी से फैला। नुवाकोट, धाडिंग और चितवन जिले भी इस जलप्रलय की चपेट में आ गए हैं। बुनियादी ढांचे को पहुंची क्षति का आकलन करते हुए अधिकारियों ने बताया कि त्रिशूला नदी पर बने 4 पक्के और 15 अस्थायी पुल पूरी तरह से बह गए हैं। इसके अलावा तटीय क्षेत्र की लगभग 40 किलोमीटर सड़क बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई है, जिससे राहत और बचाव कार्यों में भारी बाधा आ रही है। एक दर्जन से अधिक हाइड्रोपावर परियोजनाओं के भी प्रभावित होने की सूचना है, जिससे क्षेत्र की बिजली आपूर्ति ठप पड़ गई है।
सैकड़ों पर्यटक और तीर्थयात्री फंसे
नेपाल पर्यटन बोर्ड के ताजा आंकड़ों के अनुसार, बाढ़ प्रभावित इलाकों से 750 यात्रियों का संपर्क पूरी तरह टूट चुका है। इनमें 391 विदेशी नागरिक और 93 नेपाली नागरिक शामिल हैं। विदेशी यात्रियों में 133 भारतीय और 37 अनिवासी भारतीय (NRI) बताए जा रहे हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में 59 कैलाश मानसरोवर यात्रियों समेत सैकड़ों पर्यटकों के फंसे होने की पुष्टि हुई है।
ईशा फाउंडेशन के सदस्य भी लापता
इस त्रासदी में बेंगलुरु स्थित ईशा फाउंडेशन के 77 सदस्यों के भी लापता होने की दुखद सूचना मिली है। फाउंडेशन की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि उनका एक दल कैलाश मानसरोवर यात्रा पर था, जो बाढ़ की चपेट में आ गया। भारतीय दूतावास काठमांडू लगातार नेपाली अधिकारियों के संपर्क में है और लापता भारतीय नागरिकों का पता लगाने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं।
तिब्बत में भी भारी तबाही
इस जलप्रलय का असर सीमा पार तिब्बत में भी देखने को मिला है। चीनी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में बाढ़ के कारण 3 लोगों की मौत हुई है और 265 लोग लापता हैं। चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने बताया कि तिब्बत के शिगात्से शहर के अंतर्गत आने वाले क्यिरोंग काउंटी में भारी बारिश और हिमस्खलन के बाद नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया, जिससे यह तबाही आई।
राहत और बचाव कार्य जारी
नेपाल सरकार ने प्रभावित जिलों में आपातकाल की घोषणा करते हुए सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस को बड़े पैमाने पर बचाव अभियान में उतार दिया है। हेलीकॉप्टरों के माध्यम से फंसे हुए लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाने और उन्हें सुरक्षित निकालने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि, खराब मौसम और टूटी सड़कों के कारण ऑपरेशन में देरी हो रही है। प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ ने मंत्रिपरिषद की आपात बैठक बुलाकर राहत कार्यों की समीक्षा की और मृतकों के परिजनों को उचित मुआवजा देने की घोषणा की है।
भोटेकोशी नदी हिमालय से निकलने वाली एक प्रमुख नदी है जो तिब्बत से नेपाल में प्रवेश करती है। यह नदी अपने तीव्र प्रवाह और राफ्टिंग के लिए विश्व प्रसिद्ध है, लेकिन मानसून और ग्लेशियर झीलों के फटने (GLOF) की घटनाओं के दौरान यह बेहद खतरनाक रूप धारण कर लेती है। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालयी क्षेत्र में ऐसी अचानक आने वाली बाढ़ (Flash Flood) की घटनाएं भविष्य में और बढ़ सकती हैं।
अधिक जानकारी के लिए आप विकिपीडिया पर भोटेकोशी नदी के बारे में पढ़ सकते हैं।



