बेगूसराय: जिला पदाधिकारी श्री रिची पांडेय ने जिलेवासियों से अपील की है कि वे बाढ़ की मछली का सेवन बिल्कुल न करें। नेपाल में आई हालिया बाढ़ के दौरान बहकर आई किसी भी अज्ञात अथवा असामान्य मछली को खाने से गंभीर स्वास्थ्य जोखिम हो सकता है।
बाढ़ की मछली से गंभीर स्वास्थ्य खतरा
मत्स्य निदेशालय, बिहार, पटना के निर्देश के आलोक में जिला प्रशासन ने यह चेतावनी जारी की है। प्राप्त सूचना के अनुसार, नेपाल में आई बाढ़ के पानी के बहाव के साथ राज्य के विभिन्न जलस्रोतों में अज्ञात एवं असामान्य मछलियां पहुंची हैं। बाढ़ के दूषित पानी, गंदे नालों, मृत जीव-जंतुओं तथा सड़े-गले अवशेषों के संपर्क में रहने के कारण ऐसी मछलियां विभिन्न प्रकार के जीवाणुओं, विषाणुओं एवं फफूंदी आदि से अत्यधिक प्रदूषित हो सकती हैं।
क्यों खतरनाक है बाढ़ की मछली
विशेषज्ञों का कहना है कि बाढ़ का पानी अपने साथ अनेक हानिकारक तत्व लाता है। सीवेज, औद्योगिक कचरा, मृत जानवरों के अवशेष और सड़े-गले कार्बनिक पदार्थ पानी में घुल जाते हैं। इनके संपर्क में आने वाली मछलियां इन विषाक्त पदार्थों को अपने शरीर में जमा कर लेती हैं। ऐसी मछलियों का सेवन करने से फूड पॉइजनिंग, हैजा, टाइफाइड, हेपेटाइटिस और अन्य गंभीर बीमारियां हो सकती हैं।
जिला प्रशासन का सख्त निर्देश
जनस्वास्थ्य एवं स्वास्थ्य सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए जिला प्रशासन ने सभी नागरिकों से आग्रह किया है कि वे किसी भी अज्ञात अथवा असामान्य मछली की खरीद-बिक्री, उपयोग एवं सेवन से पूरी तरह परहेज करें। विशेष रूप से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में मछली खरीदते समय अतिरिक्त सावधानी बरतने की अपील की गई है। जिला पदाधिकारी ने संबंधित पदाधिकारियों को इस संबंध में व्यापक प्रचार-प्रसार के माध्यम से आमलोगों को जागरूक करने तथा आवश्यक सतर्कता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
पहचान और बचाव के उपाय
- असामान्य आकार, रंग या गंध वाली मछली न खरीदें
- बाढ़ प्रभावित इलाकों से आई मछली से परहेज करें
- विश्वसनीय और लाइसेंस प्राप्त विक्रेताओं से ही मछली खरीदें
- मछली को अच्छी तरह पकाने के बाद भी बाढ़ की मछली सुरक्षित नहीं होती
- किसी भी संदिग्ध मछली की सूचना स्थानीय प्रशासन को दें
जिला प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। मत्स्य विभाग की टीमें जलस्रोतों की निगरानी कर रही हैं। नागरिकों से सहयोग की अपेक्षा करते हुए प्रशासन ने कहा है कि जागरूकता ही बचाव का सबसे बड़ा उपाय है। इस संबंध में अधिक जानकारी के लिए जिला मत्स्य कार्यालय या निकटतम प्रखंड विकास पदाधिकारी से संपर्क किया जा सकता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, बाढ़ के बाद जलजनित बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। WHO की गाइडलाइंस भी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में खाद्य सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने की सिफारिश करती हैं।



