पटना: बिहार में आरटीपीएस पोर्टल के माध्यम से ई-गवर्नेंस व्यवस्था ने आम नागरिकों की राह बेहद आसान कर दी है। पंचायती राज विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर 2024 से सितंबर 2026 के बीच सिर्फ पंचायत स्तर पर इस पोर्टल पर 39 लाख 78 हजार से अधिक आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से रिकॉर्ड 39 लाख 32 हजार से ज्यादा आवेदनों का सफलतापूर्वक निष्पादन किया जा चुका है।
निपटारे के मामले में टॉप-5 जिले
आवेदनों के सफल निपटारे के मामले में मधुबनी जिले की पंचायतें पूरे बिहार में पहले स्थान पर हैं। यहां की 386 पंचायतों में दो वर्षों के दौरान 3 लाख 24 हजार से अधिक आवेदन मिले, जिनमें से 3 लाख 22 हजार का निस्तारण किया जा चुका है।
- दूसरा स्थान: सिवान (2 लाख 97 हजार से अधिक आवेदन, जिनमें से 2 लाख 95 हजार का निपटारा)
- तीसरा स्थान: सीतामढ़ी (1 लाख 99 हजार से अधिक आवेदन, 1 लाख 97 हजार से ज्यादा का निष्पादन)
- चौथा स्थान: सारण (1 लाख 87 हजार आवेदन में से 1 लाख 84 हजार का निपटारा)
- पांचवां स्थान: पश्चिम चंपारण (1 लाख 53 हजार आवेदन में से 1 लाख 52 हजार का सफल निष्पादन)
आरटीपीएस पोर्टल पर उपलब्ध हैं 64 प्रकार की सेवाएं
आरटीपीएस पोर्टल (RTPS) पर नागरिकों की सुविधा के लिए कुल 64 प्रकार की सेवाएं लाइव हैं। इनमें जाति प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र और जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र जैसे जरूरी दस्तावेज शामिल हैं। आवेदक अपने लॉग-इन आईडी के जरिए न केवल अपने आवेदन की स्थिति (Status) को ट्रैक कर सकते हैं, बल्कि तैयार होने के बाद प्रमाण पत्र भी आसानी से डाउनलोड कर सकते हैं। इस पूरी डिजिटल व्यवस्था ने सरकारी कामकाज को समयबद्ध और पूरी तरह पारदर्शी बना दिया है।
डिजिटल व्यवस्था से पारदर्शिता बढ़ी
पंचायती राज विभाग के अधिकारियों का कहना है कि ऑनलाइन माध्यम से आवेदन लेने और निपटाने की प्रक्रिया ने भ्रष्टाचार की गुंजाइश काफी कम कर दी है। पहले जहां लोगों को दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते थे, वहीं अब घर बैठे मोबाइल या कॉमन सर्विस सेंटर के जरिए आवेदन हो जाता है। आवेदन की स्थिति भी रियल टाइम में देखी जा सकती है।
विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पोर्टल पर प्राप्त आवेदनों का निपटारा निर्धारित समय-सीमा के भीतर करने का सख्त निर्देश सभी जिलों को दिया गया है। इसी का नतीजा है कि निपटारे का प्रतिशत 98 फीसदी से ऊपर बना हुआ है। मधुबनी, सिवान और सीतामढ़ी जैसे जिलों ने इस मामले में मिसाल कायम की है।
आम लोगों को मिली बड़ी राहत
ग्रामीण इलाकों के लोगों के लिए यह व्यवस्था किसी वरदान से कम नहीं है। छात्रों को छात्रवृत्ति, नौकरी या दाखिले के लिए जाति और आय प्रमाण पत्र की जरूरत पड़ती रहती है। पहले इसके लिए हफ्तों इंतजार करना पड़ता था, अब चंद दिनों में प्रमाण पत्र हाथ में आ जाता है। इसी तरह जमीन-जायदाद के कागजात के लिए निवास प्रमाण पत्र भी आसानी से बन जाता है।
जानकारों का मानना है कि बिहार का यह मॉडल दूसरे राज्यों के लिए भी अनुकरणीय है। डिजिटल इंडिया अभियान के तहत लोक सेवाओं का अधिकार (आरटीपीएस) कानून को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जोड़ने का यह प्रयोग सफल रहा है। आने वाले दिनों में सेवाओं की संख्या और बढ़ाई जा सकती है।
अधिक जानकारी के लिए नागरिक आरटीपीएस पोर्टल की आधिकारिक वेबसाइट पर जा सकते हैं।



