नई दिल्ली: कोल इंडिया का विविधीकरण अभियान तेज हो गया है क्योंकि कंपनी पारंपरिक कोयला खनन से आगे बढ़कर ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, नवीकरणीय ऊर्जा और अनुसंधान एवं विकास में बड़े पैमाने पर निवेश कर रही है। कोयला मंत्रालय के अनुसार, सीआईएल का बिजनेस डेवलपमेंट पोर्टफोलियो पांच प्रमुख क्षेत्रों पर आधारित है जिनमें कोयला गैसीकरण एवं रसायन, ताप विद्युत, नवीकरणीय ऊर्जा एवं ऊर्जा भंडारण, महत्वपूर्ण खनिज एवं उन्नत सामग्री तथा लौह अयस्क सहित अन्य खनिज शामिल हैं।
कोल इंडिया का विविधीकरण के प्रमुख क्षेत्र
कंपनी के पास वर्तमान में लगभग 69,346 करोड़ रुपये की चार कोयला-आधारित रसायन परियोजनाएं, 2×800 मेगावाट की चंद्रपुर ताप विद्युत विस्तार परियोजना, 550 मेगावाट सौर क्षमता और कई बैटरी ऊर्जा भंडारण परियोजनाएं हैं। यह रणनीति देश की ऊर्जा सुरक्षा और खनिज सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
कोयला गैसीकरण और रसायन परियोजनाएं
कोयला गैसीकरण क्षेत्र में सीआईएल की चार प्रमुख परियोजनाएं संचालित हैं:
- तालचर फर्टिलाइजर्स लिमिटेड
- भारत कोल गैसीफिकेशन एंड केमिकल्स लिमिटेड
- कोल गैस इंडिया लिमिटेड
- सीआईएल-बीपीसीएल चंद्रपुर परियोजना
इन परियोजनाओं का उद्देश्य कोयले से यूरिया, अमोनियम नाइट्रेट, सिंथेटिक प्राकृतिक गैस और अन्य रसायनों का उत्पादन करना है, जिससे आयात पर निर्भरता कम हो सके।
ताप विद्युत विस्तार और अल्ट्रा सुपर क्रिटिकल तकनीक
ताप विद्युत क्षेत्र में सीआईएल और दामोदर घाटी निगम (डीवीसी) झारखंड के चंद्रपुरा में 1600 मेगावाट क्षमता वाली अल्ट्रा सुपर क्रिटिकल परियोजना विकसित कर रहे हैं। इसके साथ कंपनी उच्च दक्षता वाले बिजली उत्पादन, उत्सर्जन नियंत्रण और जल पुनर्चक्रण पर भी ध्यान दे रही है।
नवीकरणीय ऊर्जा और बैटरी भंडारण
नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में कंपनी लगभग 550 मेगावाट सौर क्षमता स्थापित कर चुकी है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश के गोरखपुर स्थित चिलवा ताल में 20 मेगावाट की फ्लोटिंग सोलर परियोजना विकसित की जा रही है। बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (बीईएसएस) के तहत तेलंगाना और ओडिशा में बड़े प्रोजेक्ट विकसित किए जा रहे हैं, जो भविष्य में ग्रिड स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण होंगे।
महत्वपूर्ण खनिज और उन्नत सामग्री
महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में सीआईएल सक्रिय रूप से अवसर तलाश रही है। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में ग्रेफाइट संसाधनों के अलावा आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र में दुर्लभ पृथ्वी तत्वों से जुड़े अवसरों पर काम किया जा रहा है। कंपनी खनन से लेकर ग्रेफाइट आधारित बैटरी एनोड सामग्री के उत्पादन तक एकीकृत मूल्य श्रृंखला विकसित करने की योजना बना रही है।
अनुसंधान एवं विकास में बढ़ता निवेश
वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 225 करोड़ रुपये के आरएंडडी व्यय की योजना बनाई गई है। कंपनी के आरएंडडी पोर्टफोलियो में 231 करोड़ रुपये के 20 प्रोजेक्ट शामिल हैं। इनमें 5जी आधारित स्मार्ट खदानें, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, महत्वपूर्ण खनिजों की खोज, बिफेशियल पेरोव्स्काइट सौर सेल और भूमिगत कोयला गैसीकरण जैसी परियोजनाएं शामिल हैं।
भविष्य की रणनीति और लक्ष्य
कोयला मंत्रालय के अनुसार, कोल इंडिया का लक्ष्य खुद को एक पारंपरिक कोयला उत्पादक कंपनी से ऊर्जा, खनिज, प्रौद्योगिकी और उन्नत सामग्री क्षेत्र की बहुआयामी कंपनी के रूप में स्थापित करना है। इस विविधीकरण से देश की ऊर्जा सुरक्षा, खनिज सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को मजबूती मिलेगी। अधिक जानकारी के लिए कोल इंडिया लिमिटेड की आधिकारिक जानकारी देख सकते हैं।



