बेगूसराय: बिहार के बेगूसराय जिले में सर्पदंश से किशोर की मौत का दुखद मामला सामने आया है। बछवाड़ा थाना क्षेत्र के रानी एक पंचायत स्थित नारेपुर पश्चिम गांव में रविवार की अहले सुबह एक 12 वर्षीय किशोर को जहरीले सांप ने डंस लिया, जिससे उसकी मौत हो गई। इस घटना के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई और मृतक के घर पर ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा हो गई।
घटना का पूरा विवरण
मृतक किशोर की पहचान रानी एक पंचायत के वार्ड संख्या 5, नारेपुर पश्चिम गांव निवासी धर्मेन्द्र यादव के लगभग 12 वर्षीय पुत्र नीरज कुमार के रूप में हुई है। मृतक की मां रंजू देवी ने रोते हुए बताया कि शनिवार की रात पूरा परिवार खाना खाकर सो गया था। रात के लगभग एक बजे नीरज बाथरूम जाने के लिए घर से बाहर निकला था। पांच मिनट बाद जब वह वापस आया तो उसने बताया कि उसके पैर में किसी चीज ने काट लिया है। जब परिजनों ने पैर देखा तो सांप काटने के स्पष्ट निशान मिले।
आनन-फानन में परिजन उसे बाइक से इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल ले गए, लेकिन वहां चिकित्सकों ने किशोर को मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों के अनुसार, सर्पदंश के बाद समय पर एंटी-वेनम नहीं मिलने और विष के शरीर में फैल जाने के कारण किशोर की मौत हुई।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि मृतक नीरज कुमार तीन भाई और तीन बहनों में दूसरे नंबर पर था। उसके पिता धर्मेन्द्र यादव मजदूरी करके परिवार का भरण-पोषण करते हैं। नीरज की मौत के बाद मां रंजू देवी समेत पूरे परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। पिता धर्मेन्द्र यादव बार-बार बेहोश हो जा रहे हैं। बहनों का विलाप सुनकर हर किसी की आंखें नम हो जा रही हैं।
ग्रामीणों के अनुसार, नीरज पढ़ने-लिखने में होशियार था और गांव के ही सरकारी स्कूल में कक्षा 6 का छात्र था। वह अपने भाइयों में सबसे ज्यादा जिम्मेदार माना जाता था और अक्सर घर के कामकाज में पिता का हाथ बंटाता था।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने बंधाया ढाढ़स, मुआवजे की मांग
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पंचायत समिति सदस्य सिकन्दर कुमार, पूर्व मुखिया उमेश कुंवर कवि, समाजसेवी रंधीर यादव समेत कई गणमान्य लोग मृतक के घर पहुंचे और शोक संतप्त परिजनों को ढाढ़स बंधाया। उन्होंने जिलाधिकारी से मृतक के परिजनों को उचित मुआवजा देने की मांग की है।
समाजसेवी रंधीर यादव ने कहा, “ग्रामीण इलाकों में सर्पदंश की घटनाएं आम हैं, लेकिन समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण अक्सर जान चली जाती है। सरकार को हर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर एंटी-वेनम की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करनी चाहिए। साथ ही मृतक के आश्रितों को आपदा प्रबंधन के तहत 4 लाख रुपये का मुआवजा अविलंब दिया जाना चाहिए।”
पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा
घटना की सूचना मिलने पर बछवाड़ा थाना की पुलिस मौके पर पहुंची और शव को अपने कब्जे में ले लिया। इंस्पेक्टर सह थानाध्यक्ष विकास कुमार राय ने बताया कि सर्पदंश से किशोर की मौत हुई है। मृतक किशोर के शव को पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल बेगूसराय भेज दिया गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि इस संबंध में यूडी केस दर्ज किया गया है।
ग्रामीण इलाकों में सर्पदंश एक बड़ी समस्या
बिहार के ग्रामीण इलाकों में बारिश के मौसम में सर्पदंश की घटनाएं काफी बढ़ जाती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, भारत में हर साल लगभग 58,000 लोगों की मौत सर्पदंश से होती है, जिसमें सबसे ज्यादा मामले ग्रामीण क्षेत्रों से आते हैं। बिहार सर्पदंश से होने वाली मौतों के मामले में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों के पास सर्पदंश के प्राथमिक उपचार की जानकारी का अभाव होता है। झाड़-फूंक और ओझा-गुनी के चक्कर में कीमती समय बर्बाद हो जाता है, जिससे मरीज की जान चली जाती है। सरकार द्वारा चलाए जा रहे जागरूकता अभियानों के बावजूद स्थिति में खास सुधार नहीं आया है।
सरकारी प्रावधान और मुआवजा प्रक्रिया
बिहार सरकार ने सर्पदंश से मौत को राजकीय आपदा घोषित कर रखा है। आपदा प्रबंधन विभाग के प्रावधान के अनुसार, सर्पदंश से मौत होने पर मृतक के आश्रितों को 4 लाख रुपये अनुग्रह अनुदान दिया जाता है। इसके लिए परिजनों को थाने में प्राथमिकी दर्ज करानी होती है, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मृत्यु प्रमाण पत्र और अन्य कागजात जमा करने होते हैं।
हालांकि, ग्रामीणों का आरोप है कि मुआवजा मिलने में महीनों लग जाते हैं और दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते हैं। कई बार तो कागजी प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण पात्र परिवार मुआवजे से वंचित रह जाते हैं।
ग्रामीणों की मांग: स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार हो
घटना से आक्रोशित ग्रामीणों ने मांग की है कि बछवाड़ा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में एंटी-वेनम की स्थायी व्यवस्था की जाए। साथ ही क्षेत्र में सर्पदंश से बचाव के लिए जागरूकता शिविर लगाए जाएं। ग्रामीण रामबली यादव ने कहा, “अगर गांव में ही समय पर इलाज मिल जाता तो शायद नीरज बच जाता। सरकार को ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों को सुदृढ़ करना चाहिए।”
एक अन्य ग्रामीण मोहन सिंह ने बताया कि पिछले साल भी इसी गांव में एक महिला की मौत सर्पदंश से हुई थी। बार-बार हो रही ऐसी घटनाओं के बावजूद स्वास्थ्य विभाग कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है।
फिलहाल, नारेपुर पश्चिम गांव में मातम पसरा हुआ है। नीरज की चिता की आग ठंडी भी नहीं हुई कि परिवार के सामने भविष्य की चिंता मुंह बाए खड़ी है। देखना होगा कि प्रशासन कितनी तत्परता से पीड़ित परिवार को राहत पहुंचाता है और भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए क्या कदम उठाता है।



