चतरा: यूपी एटीएस के हाथों वाराणसी में मारे गए टीएसपीसी सुप्रीमो ब्रजेश गंझू का शव जब चतरा के लावालौंग पहुंचा तो माहौल गम और गुस्से में बदल गया। परिजनों ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए इसे फर्जी एनकाउंटर करार दिया है। मृतक के भाई और पूर्व विधायक गणेश गंझू ने सीधे तौर पर कहा कि झारखंड पुलिस ने ब्रजेश को पकड़कर यूपी पुलिस को सौंपा, जहां अधिकारियों ने प्रमोशन के लालच में उसकी हत्या कर दी। परिवार ने इस पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग उठाई है।
ब्रजेश गंझू की अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब
ब्रजेश गंझू की अंतिम यात्रा में ग्रामीणों का भारी हुजूम उमड़ पड़ा। शव देखकर परिजनों में चीख-पुकार मच गई। इस दौरान एक बेहद भावुक कर देने वाला दृश्य सामने आया जब मृतक की बेटियों ने भी बेटों के साथ पिता की अर्थी को कंधा दिया। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं। सुरक्षा के लिहाज से पुलिस मौके पर मौजूद तो रही, लेकिन अंतिम संस्कार की प्रक्रिया से दूर ही खड़ी रही। ग्रामीणों की भीड़ और भावनाओं को देखते हुए पुलिस ने कोई हस्तक्षेप नहीं किया।
पुलिस के लिए इनामी, ग्रामीणों के लिए जननायक
ब्रजेश गंझू की जिंदगी के दो बिल्कुल अलग-अलग पहलू सामने आए हैं। पुलिस के रिकॉर्ड में वह 30 लाख का इनामी उग्रवादी और टेरर फंडिंग का मास्टरमाइंड था। उस पर टीएसपीसी (तृतीय सम्मेलन प्रस्तुति कमेटी) का सुप्रीमो होने का आरोप था। वहीं, लावालौंग और आसपास के इलाके के ग्रामीण उसे ‘जननायक’ मानते थे। वर्ष 2010 में वह निर्विरोध मुखिया चुने गए थे। ग्रामीणों के मुताबिक, उन्होंने अपने कार्यकाल में करीब 500 गरीब बेटियों का विवाह करवाया था। इतना ही नहीं, उन्होंने अपनी निजी जमीन दान कर एक कॉलेज की स्थापना भी की थी, ताकि इलाके के बच्चों को उच्च शिक्षा मिल सके।
एनआईए जांच में खुला काले धन का राज
हालांकि, ब्रजेश गंझू के इस सामाजिक कार्य की आड़ में चल रहे काले कारोबार का खुलासा एनआईए (NIA) की जांच में हुआ। जांच एजेंसी ने पाया कि कॉलेज का निर्माण लेवी (रंगदारी) के काले धन को सफेद करने के मकसद से किया गया था। इस खुलासे के बाद प्रशासन ने कॉलेज को सील कर दिया था। इस दोहरी जिंदगी ने ब्रजेश गंझू को इलाके में एक विवादित लेकिन प्रभावशाली शख्सियत बना दिया था।
पूर्व विधायक ने लगाए गंभीर आरोप
पूर्व विधायक गणेश गंझू ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “मेरे भाई को झारखंड पुलिस ने गिरफ्तार किया था। इसके बाद उसे यूपी एटीएस के हवाले कर दिया गया। यूपी पुलिस ने प्रमोशन और वाहवाही लूटने के लिए उसकी हत्या कर दी और इसे एनकाउंटर का नाम दे दिया।” उन्होंने मांग की कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच सीबीआई से कराई जाए, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके। परिवार का आरोप है कि ब्रजेश गंझू के पास से कोई हथियार बरामद नहीं हुआ था, फिर भी उसे मार गिराया गया।
इलाके में तनाव, पुलिस अलर्ट पर
इस घटना के बाद लावालौंग समेत आसपास के इलाकों में तनाव का माहौल है। ग्रामीणों में पुलिस और प्रशासन के प्रति गहरा आक्रोश देखा जा रहा है। एहतियात के तौर पर भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई है। वरिष्ठ अधिकारी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। इस बीच, झारखंड पुलिस के अधिकारियों ने अभी तक परिजनों के आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। यूपी एटीएस का दावा है कि ब्रजेश गंझू वाराणसी में किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की फिराक में था और मुठभेड़ में मारा गया।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर झारखंड में उग्रवाद, पुलिस कार्रवाई और मानवाधिकारों के सवाल को सतह पर ला खड़ा किया है। ग्रामीण जहां अपने ‘जननायक’ को खोने का शोक मना रहे हैं, वहीं पुलिस इसे बड़ी कामयाबी बता रही है। सच क्या है, यह तो सीबीआई जांच के बाद ही सामने आ पाएगा, लेकिन फिलहाल लावालौंग की गलियों में सिर्फ सन्नाटा और सवाल ही गूंज रहे हैं।



