चतरा नगर परिषद अध्यक्ष चुनाव विवाद में हाईकोर्ट का सख्त रुख,राज्य सरकार को अंतिम मौका
दो से अधिक संतान का कथित तथ्य छिपाने का आरोप,निर्वाचन की वैधता को दी गई चुनौती;19 नवंबर को होगी अगली सुनवाई
चतरा नगर परिषद अध्यक्ष पद के निर्वाचन की वैधता को लेकर झारखंड हाईकोर्ट में चल रही कानूनी लड़ाई अब महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच गई है। राजेश कुमार उर्फ राजेश साह की ओर से दायर W.P.(C) No. 3880 of 2026 में 5 अक्टूबर को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने का अंतिम अवसर दिया है। मामले की अगली सुनवाई 19 नवंबर 2026 को निर्धारित की गई है।माननीय न्यायमूर्ति राजेश शंकर की अदालत में हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता विनोद सिंह ने निर्वाचन से संबंधित विभिन्न कानूनी और तथ्यात्मक बिंदुओं को अदालत के समक्ष रखा।
याचिकाकर्ता पक्ष की ओर से आरोप लगाया गया है कि नगर परिषद अध्यक्ष पद के निर्वाचन के समय वर्तमान अध्यक्ष अताउर रहमान द्वारा नामांकन एवं शपथपत्र में दी गई जानकारी में दो से अधिक संतान से संबंधित कथित तथ्यों का खुलासा नहीं किया गया। इसी आधार पर याचिकाकर्ता ने संबंधित नगरपालिका कानून के प्रावधानों का हवाला देते हुए निर्वाचन की पात्रता और वैधता पर सवाल उठाया है।याचिकाकर्ता पक्ष का कहना है कि यदि न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत दस्तावेज और तथ्य सही पाए जाते हैं, तो इसका निर्वाचन की वैधता पर कानूनी प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि, इन आरोपों पर अभी न्यायालय का अंतिम फैसला नहीं आया है।
सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष यह भी मामला आया कि राज्य सरकार को पूर्व में सप्लीमेंट्री काउंटर एफिडेविट दाखिल करने का निर्देश दिया गया था। निर्धारित अवधि में जवाब दाखिल नहीं होने पर 5 अक्टूबर की सुनवाई में अदालत ने राज्य सरकार को “Last Indulgence” यानी अंतिम अवसर प्रदान करते हुए काउंटर एफिडेविट दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया।याचिकाकर्ता पक्ष ने मामले की शीघ्र सुनवाई का आग्रह करते हुए कहा कि नगर परिषद का कार्यकाल पांच वर्ष का होता है और ऐसे में निर्वाचन से जुड़े विवाद का जल्द निपटारा आवश्यक है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने प्रतिवादी संख्या-5 को नोटिस तामिल कराने के लिए स्पीड पोस्ट के माध्यम से आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया। वहीं, याचिकाकर्ता के अधिवक्ता विनोद सिंह के आग्रह पर अदालत ने इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से भी नोटिस तामिल कराने की अनुमति दी।इसके तहत ई-मेल, व्हाट्सऐप अथवा अन्य डिजिटल माध्यम से नोटिस भेजा जा सकेगा। नोटिस की तामिला के बाद याचिकाकर्ता को अगली सुनवाई से पहले इस संबंध में हलफनामा दाखिल करना होगा।
अब मामले की अगली सुनवाई 19 नवंबर 2026 को होगी। इस दौरान राज्य सरकार की ओर से दाखिल किए जाने वाले जवाब और अन्य पक्षों की स्थिति पर अदालत की आगे की कार्यवाही महत्वपूर्ण मानी जा रही है।नगर परिषद अध्यक्ष के निर्वाचन से जुड़ा यह मामला स्थानीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि, याचिका में लगाए गए आरोपों की सत्यता और निर्वाचन की वैधता को लेकर अंतिम निर्णय अभी न्यायालय द्वारा दिया जाना बाकी है। इसलिए फिलहाल निर्वाचन को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।याचिकाकर्ता पक्ष ने अदालत से मामले में प्रस्तुत दस्तावेजों और तथ्यों की कानूनी कसौटी पर जांच करते हुए निर्वाचन की वैधता पर उचित निर्णय देने की मांग की है। अब सबकी निगाहें 19 नवंबर को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं।



