बैंकों में 5 वर्किंग डे की मांग जायज, निजीकरण और स्टाफ की कमी का भी हो समाधान : आलोक कुमार दूबे
*बैंक कर्मियों की हड़ताल का प्रदेश कांग्रेस महासचिव ने किया नीतिगत समर्थन*
*ग्राहकों को डिजिटल सुविधाएं मिलने के बाद बैंकिंग व्यवस्था में कार्यदिवसों की समीक्षा जरूरी;आलोक दूबे*
रांची। झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी के महासचिव आलोक कुमार दूबे ने बैंक कर्मियों की हड़ताल का नीतिगत समर्थन करते हुए कहा कि बैंकों में भी 5 वर्किंग डे की व्यवस्था लागू की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के अधीन कई अन्य प्रतिष्ठानों में कार्यदिवसों को लेकर समय-समय पर बदलाव किए गए हैं, ऐसे में बैंक कर्मचारियों की इस मांग पर भी सकारात्मक तरीके से विचार किया जाना चाहिए।
आलोक कुमार दूबे ने कहा कि आज बैंकिंग व्यवस्था पहले की तुलना में काफी बदल चुकी है। एटीएम, इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग, यूपीआई और अन्य डिजिटल माध्यमों के कारण ग्राहकों को कई बैंकिंग सेवाएं चौबीसों घंटे उपलब्ध रहती हैं। ऐसी स्थिति में बैंक कर्मचारियों के कार्यदिवस और अवकाश की व्यवस्था को भी वर्तमान तकनीकी और बैंकिंग जरूरतों के अनुरूप बनाया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जब द्वितीय शनिवार और अंतिम शनिवार को बैंक बंद रखने की व्यवस्था लागू की जा सकती है, तो बैंक कर्मचारियों की लंबे समय से चली आ रही 5 वर्किंग डे की मांग पर भी गंभीरता से विचार किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि बैंक कर्मी लगातार बढ़ते काम के दबाव और जिम्मेदारियों के बीच अपनी सेवाएं दे रहे हैं, इसलिए उनकी जायज मांगों पर सरकार और बैंक प्रबंधन को संवेदनशीलता दिखानी चाहिए।
प्रदेश कांग्रेस महासचिव ने बैंकों के निजीकरण की प्रक्रिया का विरोध, पर्याप्त संख्या में नए कर्मचारियों की बहाली तथा ग्राहकों पर लगाए जा रहे विभिन्न प्रकार के बैंकिंग चार्ज और शुल्क की समीक्षा की मांग का भी समर्थन किया। उन्होंने कहा कि बैंक केवल मुनाफा कमाने वाली संस्थाएं नहीं हैं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था और आम जनता की वित्तीय जरूरतों से सीधे जुड़ी महत्वपूर्ण संस्थाएं हैं।
उन्होंने कहा कि बैंकों में पर्याप्त स्टाफ नहीं होने का असर सीधे ग्राहकों को मिलने वाली सेवाओं पर पड़ता है। ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता बनाए रखने के लिए पर्याप्त मानव संसाधन जरूरी है। वहीं, छोटे खाताधारकों और आम ग्राहकों पर विभिन्न प्रकार के शुल्क का अतिरिक्त बोझ डालने से पहले उसके सामाजिक और आर्थिक प्रभाव पर भी विचार होना चाहिए।
आलोक कुमार दूबे ने कहा कि बैंकिंग क्षेत्र को मजबूत करना, कर्मचारियों के हितों की रक्षा करना और ग्राहकों को बेहतर एवं सुलभ सेवा उपलब्ध कराना—तीनों एक-दूसरे से जुड़े हुए विषय हैं। केंद्र सरकार को बैंक कर्मियों की मांगों पर वार्ता के माध्यम से सकारात्मक समाधान निकालना चाहिए।



