सबसे बड़ी क्रिप्टो एक्सचेंज बाइनेंस हैकिंग का उत्तर कोरिया पर शक
कंपनी ने बंद की पैसे जमा और निकालने की सुविधा
वाशिंगटन: दुनिया के सबसे बड़े क्रिप्टो एक्सचेंज बाइनेंस के यूजर्स के लिए अचानक मुश्किल खड़ी हो गई। जिस प्लेटफॉर्म पर लोग अपनी डिजिटल कमाई सुरक्षित समझकर रखते थे, उसके डिजिटल वॉलेट में हैकर्स ने सेंध लगा दी। इस हमले में करीब 6 अरब डॉलर की क्रिप्टोकरेंसी चोरी होने का दावा किया गया है, जो भारतीय मुद्रा में करीब 60 हजार करोड़ है। इसे अब तक की सबसे बड़ी क्रिप्टो चोरी माना जा रहा है। घटना के बाद बाइनेंस ने पैसे जमा करने और निकालने की सुविधा अस्थायी रूप से बंद कर दी है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी का कहना है कि यूजर्स का पैसा सुरक्षित है और चोरी हुई रकम की भरपाई वह अपने फंड से करेगी। इस हैकिंग के पीछे उत्तर कोरिया के हैकर्स का नाम सामने आ रहा है और अमेरिकी जांच एजेंसियां भी इसकी जांच में जुट गई हैं। बाइनेंस ने शुरुआती जांच के आधार पर बताया कि हैकिंग की शुरुआत कंपनी के एक इंजीनियर के लैपटॉप से हुई थी। इसके जरिए हमलावर एक सर्विस कंटेनर तक पहुंचने में कामयाब रहे और फिर पैसे ट्रांजैक्शन किए।
कंपनी के मुताबिक जांच जारी है और फिलहाल किसी एक व्यक्ति को हमले के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया गया है। साथ ही ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है जिससे पता चले कि किसी डिजिटल वॉलेट की पर्सनल चाबी लीक हुई थी। कंपनी के सह-सीईओ ने सोशल मीडिया पर कहा कि यह कोई साधारण या एक क्लिक में किया गया हमला नहीं था, बल्कि इसके पीछे कई चरणों वाली जटिल प्रक्रिया थी।
कंपनी ने कहा है कि वह सभी नुकसान की भरपाई अपने फंड और इमरजेंसी एसेट्स फंड से करेगी। बाइनेंस ने साफ कहा कि यूजर्स का पैसा सुरक्षित है। सुरक्षा जांच पूरी करने और चोरी हुई रकम का पता लगाने के लिए कंपनी ने जमा और निकासी की सुविधा अस्थायी रूप से रोक दी है। कंपनी को उम्मीद है कि रविवार सुबह तक निकासी की सुविधा फिर शुरू हो जाएगी। जानकारों और कई क्रिप्टो जांच कंपनियों ने इस हमले के पीछे उत्तर कोरिया के हैकिंग समूहों का हाथ होने की आशंका जताई है। उनका कहना है कि हमले का तरीका उत्तर कोरिया से जुड़े पहले के कई साइबर हमलों से मिलता-जुलता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक चोरी की रकम को नकदी में बदलने के लिए उत्तर कोरिया से जुड़े हैकर्स मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क की मदद ले सकते हैं। अमेरिकी जांच एजेंसियों ने भी मामले पर नजर रख रही हैं। एफबीआई ने कहा कि उसे घटना की जानकारी है और वह सरकारी व प्राइवेट क्षेत्र से जुड़े संगठनों के साथ मिलकर पता लगा रही है कि हमला कितना बड़ा था और नुकसान कितना हुआ। अमेरिकी सीक्रेट सर्विस ने बताया कि उसके जांचकर्ता निजी कंपनियों के साथ मिलकर चोरी हुई रकम की पहचान, उसे फ्रीज करने और वापस लाने की कोशिश कर रहे हैं।



