वाशिंगटन: अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में भारतीय मूल के उम्मीदवार इस बार रिकॉर्ड संख्या में मैदान में हैं। मंगलवार को होने वाले मतदान में कुल 57 भारतीय-अमेरिकी चेहरे अपनी किस्मत आजमाएंगे। यह संख्या अमेरिकी समाज में समुदाय की बढ़ती राजनीतिक महत्वाकांक्षा को दर्शाती है।
कहां-कहां आजमा रहे किस्मत
इन 57 उम्मीदवारों में से एक सीनेट, 11 प्रतिनिधि सभा, तीन राज्यव्यापी पदों, 36 राज्य विधानमंडलों और छह स्थानीय पदों के लिए चुनाव लड़ रहे हैं। 22 राज्यों में राज्य विधानमंडल के लिए दावेदारी पेश की गई है। कैलिफोर्निया, इलिनॉय और न्यूयॉर्क प्रमुख राज्य हैं।
प्रमुख मुकाबले जिन पर निगाहें
गवर्नर और राज्यव्यापी पद
ओहायो में रिपब्लिकन पार्टी के विवेक रामास्वामी गवर्नर पद के लिए मैदान में हैं। उनकी जीत भारतीय मूल के नेताओं की स्थिति को नई ऊंचाई दे सकती है। लॉस एंजिलिस में सिटी काउंसिल सदस्य नित्या रमन मौजूदा मेयर को चुनौती दे रही हैं। न्यूयॉर्क में सरिता कोमाटिरेड्डी अटॉर्नी जनरल पद के लिए लड़ रही हैं। मैरीलैंड की लेफ्टिनेंट गवर्नर अरुणा मिलर दोबारा चुनाव जीतने की कोशिश में हैं। मैसाचुसेट्स की सीनेट सीट पर शिवा अय्यादुरई निर्दलीय उम्मीदवार हैं।
प्रतिनिधि सभा में रोचक टक्कर
चार मौजूदा डेमोक्रेटिक सांसद फिर से मैदान में हैं: कैलिफोर्निया से रो खन्ना और अमी बेरा, वाशिंगटन राज्य से प्रमिला जयपाल और वर्जीनिया से सुहास सुब्रमण्यम। इस बार कुछ सीटों पर भारतीय मूल के उम्मीदवार आमने-सामने हैं। कैलिफोर्निया में रो खन्ना का मुकाबला रिपब्लिकन उद्यमी रितेश टंडन से है। वाशिंगटन में प्रमिला जयपाल के सामने निरव शेठ हैं। एरिजोना में अमीश शाह और फ्लोरिडा में पिया दांडिया जैसे नए चेहरे खाली सीटों के लिए लड़ रहे हैं। विश्लेषक इन मुकाबलों को कड़ा बता रहे हैं।
राज्य और स्थानीय स्तर पर बढ़ता प्रभाव
यूटा के डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी सिम गिल और ओकलैंड की काउंसिल सदस्य जननी रामचंद्रन जैसे नाम स्थानीय स्तर पर समुदाय के बढ़ते प्रभाव को दर्शाते हैं। चुनाव के अंतिम दिनों में धन जुटाने और प्रचार पर भारी खर्च देखा गया है।
यह बढ़ती भागीदारी अमेरिकी राजनीति के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण मोड़ है। मंगलवार को मतदान से तय होगा कि यह ऐतिहासिक दस्तक कितनी दूर तक जाती है। अधिक जानकारी के लिए 2022 संयुक्त राज्य चुनाव देखें।



