नई दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने नशीली दवाओं की तस्करी और पीएसीएल निवेश धोखाधड़ी से जुड़े दो अलग-अलग धनशोधन मामलों में कार्रवाई करते हुए हैदराबाद और मंदसौर में 90 लाख रुपये से अधिक मूल्य की अचल संपत्तियों को कुर्क किया है। ईडी ने संपत्ति कुर्क की इस कार्रवाई में इंडस्ट्रियल इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट लिमिटेड के 42.13 करोड़ रुपये के मौजूदा बाजार मूल्य वाले 29,46,341 इक्विटी शेयरों को भी जब्त किया गया है।
ईडी ने संपत्ति कुर्क की: दोनों मामलों का विवरण
एजेंसी के अनुसार, पहला मामला मध्य प्रदेश के मंदसौर से जुड़ा है जहां करीब 70 करोड़ रुपये मूल्य के मेफेड्रोन (एमडी) की कथित अवैध तस्करी से अपराध की आय अर्जित की गई। दूसरा मामला पीएसीएल लिमिटेड की सामूहिक निवेश योजना से संबंधित है जिसमें निवेशकों से जुटाई गई राशि को कथित तौर पर शेयरों में लगाने की बात सामने आई है।
मादक पदार्थ तस्करी मामला: इंदौर और मंदसौर में कार्रवाई
ईडी के इंदौर सब-जोनल कार्यालय ने नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटांसेज एक्ट-1985 के तहत दर्ज मामलों के आधार पर जांच शुरू की थी। इंदौर अपराध शाखा में वेद प्रकाश व्यास, दिनेश अग्रवाल, अक्षय अग्रवाल और अन्य के खिलाफ दर्ज एफआईआर के आधार पर धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत जांच की गई।
अनुसूचित अपराध में व्यावसायिक मात्रा में मेफेड्रोन के कथित अवैध कब्जे और तस्करी का मामला शामिल है, जिसकी कीमत करीब 70 करोड़ रुपये आंकी गई है। जांच के दौरान ईडी ने पाया कि आरोपितों ने कथित मादक पदार्थों की तस्करी से नकद के रूप में अपराध की आय अर्जित की और उसे कई व्यक्तिगत तथा कारोबारी बैंक खातों के जरिए इधर-उधर किया।
- वित्तीय जांच में बड़ी मात्रा में नकद लेनदेन सामने आए।
- ईडी ने इसे अपराध की आय को रखने, स्थानांतरित करने और छिपाने की प्रक्रिया बताया।
- दर्ज बयानों में आरोपितों की नियमित कारोबारी गतिविधियों के साथ मादक पदार्थों की आपूर्ति में संलिप्तता की जानकारी मिली।
ईडी ने बताया कि इंदौर और मंदसौर में 17 जुलाई 2026 को कई परिसरों पर तलाशी अभियान चलाया गया था। इस मामले में ईडी तीन लोगों को गिरफ्तार कर चुका है जो फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। ताजा कार्रवाई में हैदराबाद और मंदसौर स्थित 90 लाख रुपये से अधिक मूल्य की अचल संपत्तियों को अंतरिम रूप से कुर्क किया गया है।
पीएसीएल निवेश धोखाधड़ी: 48 हजार करोड़ का घोटाला
दूसरे मामले में ईडी के दिल्ली जोनल कार्यालय ने पीएसीएल लिमिटेड और उससे जुड़ी संस्थाओं की कथित सामूहिक निवेश योजना में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के तहत कार्रवाई की है। जांच की शुरुआत नई दिल्ली में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की ओर से दर्ज एफआईआर से हुई थी। सीबीआई ने बाद में 33 आरोपितों के खिलाफ आरोपपत्र और पूरक आरोपपत्र दाखिल किए।
सीबीआई के आरोपपत्रों के अनुसार, संबंधित संस्थाओं और व्यक्तियों ने कृषि भूमि की बिक्री और विकास के नाम पर देशभर में लाखों निवेशकों से 48 हजार करोड़ रुपये से अधिक जुटाए। निवेशकों को नकद भुगतान और किस्त आधारित योजनाओं के जरिए निवेश के लिए प्रेरित किया गया और उनसे समझौते, पावर ऑफ अटॉर्नी सहित विभिन्न दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए गए।
ईडी के अनुसार, अधिकांश मामलों में निवेशकों को जमीन नहीं दी गई और करीब 48 हजार करोड़ रुपये अब भी निवेशकों को वापस किया जाना बाकी है। पीएसीएल मामले में ईडी ने 2016 में ईसीआईआर दर्ज की थी और 2018 में अभियोजन शिकायत दाखिल की थी। इसके बाद 2022, 2025 एवं 2026 में छह पूरक अभियोजन शिकायतें दाखिल की गईं। इस कड़ी में ताजा कुर्की में 42.13 करोड़ रुपये के शेयर शामिल हैं।
कानूनी प्रक्रिया और आगे की कार्रवाई
दोनों मामलों में ईडी की कार्रवाई धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के प्रावधानों के तहत की गई है। एजेंसी ने बताया कि कुर्क की गई संपत्तियों का मूल्य अपराध की आय के बराबर है। आगे की जांच में आरोपितों के अन्य वित्तीय लेनदेन और संपत्तियों का पता लगाया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की कार्रवाई से वित्तीय अपराधियों में कड़ा संदेश जाता है। प्रवर्तन निदेशालय लगातार मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में संपत्तियों को जब्त कर रहा है ताकि अपराध की आय को रोका जा सके।
ईडी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि दोनों मामलों में जांच जारी है और आगे भी कई खुलासे हो सकते हैं। एजेंसी आरोपितों की अन्य बेनामी संपत्तियों का भी पता लगा रही है। इस कार्रवाई को ईडी की बड़ी कामयाबी माना जा रहा है क्योंकि इसमें नशीली दवाओं की तस्करी और बड़े निवेश घोटाले दोनों को एक साथ निशाना बनाया गया है।



