रांची: हिनू पूजा कमेटी 114वां दुर्गोत्सव का आयोजन इस वर्ष भी पारंपरिक भव्यता के साथ किया जाएगा। शुक्रवार, 4 सितंबर 2026 को बंगाली मंडप में भूमि पूजन एवं खुटी पूजन के साथ तैयारियों का औपचारिक शुभारंभ हो गया। वर्ष 1913 में स्थापित यह समिति पिछले एक शताब्दी से अधिक समय से बंगाली संस्कृति और आस्था की ध्वजवाहक बनी हुई है।
भूमि पूजन एवं खुटी पूजन का आयोजन
बंगाली विधि-विधान एवं पारंपरिक अनुष्ठानों के अनुरूप संपन्न हुए भूमि पूजन एवं खुटी पूजन में समिति के सदस्यों सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे। पूरा वातावरण भक्तिमय एवं उत्साहपूर्ण रहा। पंडितों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मां दुर्गा के आगमन हेतु मंडप स्थल को पवित्र किया और निर्विघ्न आयोजन की कामना की।
समिति के पदाधिकारी रहे उपस्थित
कार्यक्रम में हिनू पूजा कमेटी के संयोजक विनय गांगुली के साथ तुषार रंजन रॉय, सुमन मुखर्जी, पिनाकी, भूलोक सरकार, सौमिक दास, कौशिक चंद्र, आलोक मित्र, पार्थो गोस्वामी, सोमीत्र कुमार पाल, दीप सहित अन्य सदस्य एवं गणमान्य लोग उपस्थित थे। सभी ने मिलकर आगामी दुर्गोत्सव के सफल, शांतिपूर्ण एवं भव्य आयोजन की मंगलकामना की।
113 वर्षों की गौरवशाली परंपरा
हिनू पूजा कमेटी बंगाली मंडप की स्थापना 1913 में हुई थी। तब से लेकर अब तक यह संस्था निरंतर दुर्गा पूजा का आयोजन करती आ रही है। स्वतंत्रता पूर्व से लेकर आधुनिक भारत तक, इस मंडप ने रांची की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने में अहम भूमिका निभाई है। प्रत्येक वर्ष यहां बंगाली पद्धति से मां दुर्गा की आराधना होती है, जिसमें पारंपरिक ढाक, शंख, उलु ध्वनि और धुनुची नृत्य मुख्य आकर्षण होते हैं।
समिति के सदस्यों ने बताया कि 114वां दुर्गोत्सव केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि रांची की सांस्कृतिक विरासत और बंगाली समाज की गौरवशाली परंपरा का उत्सव है। हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी पूजा को पारंपरिक रीति-रिवाजों एवं धार्मिक आस्था के अनुरूप भव्य रूप से आयोजित करने की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।
आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा
- महालया: पितृपक्ष की समाप्ति और देवीपक्ष की शुरुआत के साथ महालया का विशेष आयोजन।
- षष्ठी से दशमी: पांच दिवसीय मुख्य पूजा जिसमें बोधन, अधिवास, नवपत्रिका पूजा, संधि पूजा, कुमारी पूजा और सिंदूर खेला शामिल हैं।
- विजयादशमी: प्रतिमा विसर्जन के साथ उत्सव का समापन।
समिति ने बताया कि इस वर्ष पंडाल निर्माण की थीम पारंपरिक बंगाली वास्तुकला पर आधारित होगी। मूर्ति निर्माण का कार्य कारीगरों द्वारा प्रारंभ कर दिया गया है। प्रसाद वितरण, भोग व्यवस्था एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रूपरेखा भी तैयार की जा रही है।
सामाजिक सरोकारों का निर्वहन
हिनू पूजा कमेटी केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रही है। विगत वर्षों में समिति ने निर्धन कन्याओं के विवाह, चिकित्सा शिविर, रक्तदान शिविर एवं शैक्षिक सहयोग जैसे सामाजिक कार्यों में भी बढ़-चढ़कर भाग लिया है। इस वर्ष भी पूजा अवधि के दौरान निःशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर एवं वस्त्र वितरण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
रांची के हिनू क्षेत्र में स्थित बंगाली मंडप शहर के प्रमुख दुर्गा पूजा पंडालों में से एक माना जाता है। यहां दर्शनार्थियों की भारी भीड़ उमड़ती है। प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित कर यातायात व्यवस्था, सुरक्षा प्रबंध एवं भीड़ नियंत्रण की तैयारियां भी प्रारंभ कर दी गई हैं।
1913 से निरंतर आस्था, परंपरा और संस्कृति की इस यात्रा को आगे बढ़ाते हुए हिनू पूजा कमेटी बंगाली मंडप एक बार फिर मां दुर्गा के स्वागत के लिए पूरी तरह तैयार है। शहरवासियों में इस आयोजन को लेकर विशेष उत्साह देखा जा रहा है।
स्रोत: हिनू पूजा कमेटी, बंगाली मंडप, रांची



