चौपारण: चौपारण प्रखंड के पांडेबारा पैक्स धान खरीद को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के दौरान हुई सरकारी खरीद में एक ही परिवार के कई सदस्यों के नाम पर अलग-अलग किसान आईडी बनाकर बड़े पैमाने पर धान खरीद दिखाने का मामला प्रकाश में आया है। जगदीशपुर निवासी प्रवेश कुमार यादव ने इस संबंध में हजारीबाग उपायुक्त को लिखित शिकायत देकर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर धान खरीद की सरकारी योजना का सुनियोजित तरीके से दुरुपयोग किया गया है, जिससे छोटे और वास्तविक किसानों को पैक्स से बैरंग लौटना पड़ा है।
पांडेबारा पैक्स धान खरीद में एक परिवार के नाम पर कई आईडी
शिकायतकर्ता प्रवेश कुमार यादव के अनुसार सहकारिता विभाग, हजारीबाग से सूचना का अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त सूची में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। दस्तावेजों के अनुसार एक ही खतियान और एक ही परिवार के पिता, पुत्र, पत्नी, बहू के नाम पर अलग-अलग किसान आईडी बनाकर 100 से 250 क्विंटल तक धान की खरीद दर्शाई गई है। यह स्थिति सरकारी खरीद व्यवस्था की पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। आरोप है कि पैक्स प्रबंधन और नोडल अधिकारियों की मिलीभगत से इस फर्जीवाड़े को अंजाम दिया गया है।
आरटीआई से हुआ खुलासा
प्रवेश कुमार यादव ने बताया कि उन्होंने सहकारिता विभाग से आरटीआई के तहत खरीद का ब्योरा मांगा था। प्राप्त दस्तावेजों का विश्लेषण करने पर पता चला कि कई गांवों में एक ही परिवार के सदस्यों के नाम पर असामान्य मात्रा में धान बेचा गया है। जबकि नियमानुसार एक किसान की भूमि के रकबे और वास्तविक उत्पादन क्षमता के आधार पर ही खरीद की सीमा तय होती है। यहां भूमि के रकबे और उत्पादन क्षमता को नजरअंदाज कर मनमाने ढंग से खरीद दिखाई गई है। शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि वास्तविक किसान जब अपना धान लेकर पैक्स पहुंचे तो उन्हें नमी, क्वालिटी या टोकन नहीं होने का बहाना बनाकर लौटा दिया गया।
किस परिवार पर कितना धान खरीद का आरोप
शिकायत पत्र में गांववार और परिवारवार खरीद का विवरण प्रस्तुत किया गया है। प्रमुख आरोप इस प्रकार हैं:
- पवई (पाण्डेबारा): रामप्रताप सिंह उर्फ अशोक सिंह परिवार – पिता 45 क्विं., पुत्र पवन कुमार 48 क्विं., ज्वाला प्रताप 44 क्विं. – कुल 137 क्विंटल
- पांडेबारा: बिरेन्द्र कुमार पांडे परिवार – 25, 38 और 50 क्विंटल – कुल 113 क्विंटल
- पिपरा (जगदीशपुर): सबसे बड़ा मामला – दुलार साव 64, पत्नी कमली देवी 77.5, पुत्र राजकुमार 79.5, ओमप्रकाश गुप्ता 96.5 क्विंटल समेत कुल 555 क्विंटल धान खरीद दिखाने का आरोप
- बेला-बिगहा: साकुन देवी, शेखर कुमार, रूपा कुमारी के नाम पर कुल 160 क्विंटल
- बेला: तिलकी देवी, पुतुल देवी, उमेश महतो के नाम पर 266 क्विंटल तक
यह आंकड़े स्पष्ट इशारा करते हैं कि किसान आईडी का इस्तेमाल वास्तविक खेती के लिए नहीं, बल्कि सरकारी राशि के गबन के लिए किया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार एक सामान्य किसान के लिए इतनी मात्रा में धान का उत्पादन करना संभव नहीं है, जब तक कि उसके पास सैकड़ों एकड़ जमीन न हो।
निजी आवास से धान लोडिंग का गंभीर आरोप
सबसे गंभीर आरोप यह है कि पैक्स के निर्धारित गोदाम के बजाय जगदीशपुर पंचायत के पिपरा निवासी दुलार साव के निजी आवास से धान लोड कर मिल भेजा गया। शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि इस पूरी लोडिंग प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग उसके पास सुरक्षित है, जिसे वह जांच एजेंसी के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए तैयार है। अगर यह आरोप सही साबित होता है तो यह पैक्स अध्यक्ष, कर्मियों और नोडल अधिकारियों की सीधी संलिप्तता को दर्शाता है। सरकारी नियमों के तहत धान की खरीद पैक्स के पंजीकृत गोदाम या क्रय केंद्र पर ही की जा सकती है, निजी परिसर से लोडिंग पूर्णतः अवैध है।
उपायुक्त से उच्चस्तरीय जांच की मांग
शिकायतकर्ता ने हजारीबाग उपायुक्त से मांग की है कि सभी किसान आईडी, आधार कार्ड, खतियान, भूमि का रकबा, वास्तविक उत्पादन और बैंक भुगतान का भौतिक सत्यापन कराया जाए। साथ ही पैक्स अध्यक्ष, कर्मियों और नोडल अधिकारियों की भूमिका की भी गहन जांच हो। दोषी पाए जाने पर प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर सरकारी राशि की वसूली की कार्रवाई की जाए। शिकायतकर्ता ने बताया कि इस पूरे प्रकरण की शिकायत भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) को भी दी गई है।
इस मामले ने एक बार फिर झारखंड में धान खरीद व्यवस्था में व्याप्त अनियमितताओं को उजागर किया है। किसानों का कहना है कि बिचौलिए और पैक्स प्रबंधन की सांठगांठ के कारण वास्तविक उत्पादक लाभ से वंचित रह जाते हैं। प्रशासनिक स्तर पर इस शिकायत पर त्वरित संज्ञान लेकर पारदर्शी जांच कराना आवश्यक है ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम पंक्ति के किसान तक पहुंच सके। न्यूनतम समर्थन मूल्य योजना की सार्थकता तभी है जब उसका क्रियान्वयन ईमानदारी से हो।



