प्रातःकालीन सत्र: योगासन और मंत्र अभ्यास
दूसरे दिन की शुरुआत प्रातः स्मरण के साथ हुई। इसके तुरंत बाद सामूहिक योगासन सत्र आयोजित किया गया, जिसमें शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए विभिन्न आसनों का अभ्यास कराया गया। तदोपरांत सामूहिक सरस्वती वंदना और गायत्री मंत्र का सस्वर उच्चारण हुआ। सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, शास्त्री नगर की संगीत शिक्षिका श्रीमती सीमा गुप्ता ने गायत्री मंत्र का अभ्यास कराया। वहीं डॉ रागिनी भूषण ने दीप मंत्र और सेवा गीत का सस्वर अभ्यास प्रशिक्षणार्थियों को कराया। इन सत्रों का उद्देश्य आचार्यों में सांस्कृतिक मूल्यों और उच्चारण शुद्धि को सुदृढ़ करना है।
बाल संस्कार केंद्र के उद्देश्य और प्रभाव पर विमर्श
प्रातःकालीन सत्र के पश्चात एक महत्वपूर्ण बौद्धिक सत्र में बाल संस्कार केंद्र के उद्देश्य और उसके सामाजिक प्रभाव पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। वक्ताओं ने बताया कि कैसे ये केंद्र ग्रामीण और शहरी बस्तियों में बच्चों में नैतिक मूल्य, राष्ट्रप्रेम और स्वच्छता जैसे संस्कारों का बीजारोपण करते हैं। इस सत्र में प्रशिक्षणार्थियों ने अपने-अपने क्षेत्र के अनुभव साझा किए और केंद्रों के संचालन में आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों पर चर्चा की।
स्थानीय समस्या और समाधान: चार गटों में सामूहिक चर्चा
वर्ग का एक प्रमुख आकर्षण चर्चा सत्र रहा, जिसमें स्थानीय समस्या और समाधान विषय पर प्रशिक्षणार्थियों को चार गटों में विभाजित किया गया। प्रत्येक गट ने अपने कार्यक्षेत्र की विशिष्ट समस्याओं जैसे जल संकट, शिक्षा में कमी, स्वास्थ्य जागरूकता का अभाव आदि को सूचीबद्ध किया और उनके व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत किए। इस समूह चर्चा ने सहभागी दृष्टिकोण और नेतृत्व क्षमता विकसित करने में सहायता की।
भारतीय संस्कृति, ग्रंथ और पर्व-त्योहारों का परिचय
बौद्धिक श्रृंखला को आगे बढ़ाते हुए एक सत्र भारतीय संस्कृति, प्रमुख ग्रंथों तथा पर्व-त्योहारों के वैज्ञानिक एवं सामाजिक महत्व पर केंद्रित रहा। वक्ताओं ने बताया कि कैसे त्योहार सामाजिक समरसता के सेतु का कार्य करते हैं। प्रशिक्षणार्थियों को यह जानकारी दी गई कि वे अपने-अपने सेवा बस्तियों में इन पर्वों को कैसे सांस्कृतिक जागरण के अवसर में बदल सकते हैं।
संध्या शाखा, खेल-कूद और कविता पाठ कला
सायंकालीन सत्र में संध्या शाखा का आयोजन हुआ, जिसमें शारीरिक व्यायाम, खेल-कूद और योग के संक्षिप्त क्रम शामिल थे। खेल-कूद के माध्यम से टीम भावना और अनुशासन का पाठ पढ़ाया गया। इसके पश्चात एक विशेष सत्र में कविता बोलने की कला सिखाई गई। प्रशिक्षणार्थियों को स्वर उतार-चढ़ाव, भाव भंगिमा और मंच संचालन के गुर बताए गए, ताकि वे बस्तियों में सांस्कृतिक कार्यक्रमों को प्रभावी बना सकें।
रात्रि कार्यक्रम: अंत्याक्षरी से सांस्कृतिक समागम
दिन का समापन रात्रि विविध कार्यक्रम के साथ हुआ, जिसमें अंत्याक्षरी का रोचक आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम ने प्रशिक्षणार्थियों के बीच सहजता और आत्मीयता का वातावरण निर्मित किया। गीत-संगीत के माध्यम से तनाव मुक्ति और सामूहिकता का भाव जागृत हुआ। वर्ग प्रमुख ने बताया कि ऐसे अनौपचारिक कार्यक्रम प्रशिक्षण की गंभीरता के बीच संतुलन स्थापित करते हैं।
इस छः दिवसीय वर्ग का उद्देश्य आचार्यों को सेवा कार्यों के लिए सैद्धांतिक और व्यावहारिक रूप से दक्ष बनाना है। सेवा भारती के प्रांतीय पदाधिकारियों ने बताया कि प्रशिक्षण के आगामी दिनों में सेवा बस्ती सर्वेक्षण, प्राथमिक चिकित्सा और संगठन कौशल जैसे विषयों पर सत्र रखे गए हैं। अधिक जानकारी के लिए सेवा भारती की आधिकारिक वेबसाइट देख सकते हैं।




