शिक्षकों की तरह स्कूल का भी ट्रांसफर हो रहे है मामला
मंझौलबेगुसराय
आपने शिक्षा विभाग में शिक्षकों के ट्रांसफर की बात तो सुनी होगी लेकिन, मंझौल अनुमंडल मुख्यालय के मंझौल पंचायत तीन स्थित जयमंगलागढ में शिक्षा विभाग ने स्कूल का ही ट्रांसफर कर दिया और विगत आठ महीने से जयमंगलागढ के बच्चे अपने गांव के विद्यालय में पढ़ाई से वंचित हैं । दरअसल, सरकारी आदेश से जयमंगलागढ मुसहरी स्थित उच्च माध्यमिक विद्यालय तथा उत्क्रमित मध्य विद्यालय जयमंगलागढ को दो अलग-अलग विद्यालयों में शिफ्ट कर देने से यह स्थिति बनी है। चेरियां बरियारपुर प्रखंड के शिक्षा अधिकारी ने अपने पत्रांक 165 दिनांक 27-02-2026 के माध्यम से दोनों विद्यालयों को यहां से हटाने का आदेश दोनों स्कूल के प्रधानाध्यापकों को जारी कर दिया। जयमंगलागढ स्थित उच्च माध्यमिक विद्यालय को जहां सात किलोमीटर दूर मंझौल की जयमंगला हाईस्कूल में तथा उत्क्रमित मध्य विद्यालय को एक किलोमीटर दूर प्राथमिक विद्यालय जयमंगलपुर में चलाने का आदेश दिया। आनन-फानन में मार्च में उक्त दोनों विद्यालयों के शिक्षक उसको संबंधित अधिकारियों के आदेशानुसार शिफ्ट तो कर गए लेकिन जब स्कूल से बेंच कुर्सी उपस्कर आदि ले जाने लगे तो ग्रामीणों ने एतराज जताते हुए सामान ले जाने से रोक दिया और स्कूल में अपना ताला लगा दिया। अब स्थिति है कि आठ महीने से विद्यालय तो उपरोक्त वर्णित स्कूलों में चल रहे हैं लेकिन न तो वहां छात्रों की सही उपस्थिति है रही है और न उपस्कर हैं। पहले वर्ग से लेकर आठवीं वर्ग तक उत्क्रमित मध्य विद्यालय के तीन सौ से ज्यादा छात्र छात्राओं के लिए दो कमरे प्राथमिक विद्यालय से उधार मिले हैं जहां दो कमरे में आठ वर्ग की तथाकथित गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दी जा रही है। इसी तरह से उच्च माध्यमिक विद्यालय जयमंगलागढ को सात किलोमीटर दूर मंझौल में शिफ्ट किया गया है जहां मुसहर दलित बच्चे बच्चियां दूरी की वजह से स्कूल जाने से कतरा रहे हैं। प्राथमिक विद्यालय जयमंगलपुर में शिक्षकों के बैठने की जगह नहीं है तो छात्रों को फर्श पर बैठाकर किसी तरह से शिक्षा देने की कवायद शिक्षक कर रहे हैं प्रधान शिक्षक और शिक्षकों ने बताया वे सरकारी हुक्म का पालन कर रहे हैं। जयमंगलागढ स्कूल में बड़े परिसर, मकान तथा उपस्करों की व्यवस्था के बावजूद विद्यालय की बाहर शिफ्टिंग से वंचित वर्ग के बच्चे स्कूल आने से कतरा रहे हैं वहीं अधिकांश छात्र छात्राएं बाहर स्कूल चले जाने से घोंघा मछली चुनने तथा मजदूरी करने में लग गए हैं और विद्यालयों में बच्चों की उपस्थिति दस प्रतिशत भी नहीं रहती है। ने विद्यालय में बच्चों को सही रूप से जब बैठने की व्यवस्था नहीं है तो शिक्षा कहां से मिलेगी।
पिछले आठ महीनों से ग्रामीण से लेकर स्थानीय बुद्धिजीवियों तक ने इस पर जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों का ध्यान दिलाया है लेकिन, किसी ने इसपर ध्यान देना मुनासिब नहीं समझा है। स्थानीय निवासी नरेश सदा, ध्यानी सदा सहित अनेक लोगों ने बताया कि लगभग डेढ़ हजार की आबादी वाले जयमंगलागढ से दोनों विद्यालयों का ट्रांसफर करना कहीं से भी उचित नहीं है।
इधर जयमंगलागढ स्थित स्कूल भवन पर लत्ती लतड़ गया है और परिसर जंगलों से भर गया है दूसरी तरफ इस विद्यालय की छात्र छात्राएं अन्यत्र भटक रहे हैं। जयमंगलागढ कू ग्रामीणों और महिलाओं ने बताया कि इन विद्यालयों में शत-प्रतिशत दलित और उसमें भी सबसे वंचित मुसहर समुदाय के बच्चे पढ़ते थे लेकिन विद्यालय के कई किलोमीटर दूर भेज देना वर्तमान सरकार की इस आबादी को शिक्षा देने के लिए एक धोखा ही है।



