नई दिल्ली: विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने रविवार को कहा कि दो बड़े संघर्षों की कीमत दुनिया चुका रही है, जिनका इन संघर्षों से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने चिन्मय अमृत महोत्सव ग्लोबल सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि जटिल आपूर्ति श्रृंखलाओं, वैश्वीकृत बाजारों और साझा संसाधनों के युग में दुनिया आधी समृद्ध और आधी वंचित रहकर प्रगति नहीं कर सकती।
दो बड़े संघर्षों की कीमत और वैश्विक अस्थिरता
जयशंकर ने स्पष्ट किया कि यूक्रेन और पश्चिम एशिया में जारी संघर्षों का असर उन अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ रहा है जो सीधे तौर पर शामिल नहीं हैं। उन्होंने कहा कि भारत संवाद और कूटनीति पर बल देकर वैश्विक भावना को व्यक्त करता है और अन्य साझेदारों के साथ मिलकर काम करने को तैयार है। मंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि वर्तमान भू-राजनीतिक तनाव ने ऊर्जा, खाद्य और उर्वरक सुरक्षा को गंभीर रूप से प्रभावित किया है, जिससे विकासशील देशों पर बोझ बढ़ा है।
आतंकवाद पर कड़ा रुख
मंत्री ने आतंकवाद को शांति के लिए घातक खतरा बताया। उन्होंने कहा कि कुछ देश राजनीतिक गणना को प्राथमिकता देते हैं और राज्य की नीति के हथियार के रूप में आतंकवाद का इस्तेमाल अस्वीकार्य है। इसे कभी भी उचित नहीं ठहराया जा सकता। दुनिया को इस साझा खतरे के प्रति अधिक जागरूक होना होगा और आतंकवाद के सभी रूपों के खिलाफ मजबूत संकल्प के साथ एकजुट होना होगा। जयशंकर ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आतंकवाद के वित्तपोषण और सुरक्षित पनाहगाहों को समाप्त करने के लिए ठोस कदम उठाने का आग्रह किया।
संयुक्त राष्ट्र दिवस पर एकजुटता का आह्वान
संयुक्त राष्ट्र दिवस (24 अक्टूबर) के अवसर पर जयशंकर ने कहा कि मानवता में प्रतिस्पर्धा और सहयोग को लेकर हमेशा बहस रही है। आठ दशक पहले संयुक्त राष्ट्र की स्थापना ने सामूहिक सहयोग की भावना को अभिव्यक्त किया। उन्होंने कहा कि वैश्विक चुनौतियों और अवसरों का प्रभावी समाधान सामूहिक प्रयासों से ही संभव है। अधिक जानकारी के लिए संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक वेबसाइट देखें।
इस सम्मेलन में विद्वानों, राजनयिकों और नीति निर्माताओं ने भाग लिया। जयशंकर के संबोधन को वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका को रेखांकित करने वाला माना जा रहा है। उन्होंने बहुपक्षवाद के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराई और कहा कि सुधारित बहुपक्षवाद समय की मांग है।



