नई दिल्ली: रूसी तेल पर अमेरिका का नया विधायी दांव भारत और चीन जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में रूस पर प्रतिबंधों से जुड़े जिस विधेयक पर प्रक्रिया आगे बढ़ रही है, उसमें रूस से बड़े पैमाने पर ऊर्जा खरीद जारी रखने वाले देशों के सामान पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रावधान शामिल है।
रूसी तेल पर अमेरिका के विधेयक का पूरा ब्योरा
यह विधेयक दिवंगत रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम के नाम पर Lindsey O. Graham Sanctioning Russia Act of 2026 के रूप में आगे बढ़ रहा है। अमेरिकी सीनेट ने सात अगस्त को इसे 86-11 मतों से मंजूरी दी थी। सीनेट के संस्करण में राष्ट्रपति को रूस के तेल और गैस के पांच बड़े खरीदार देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार देने का प्रस्ताव है। भारत और चीन रूस से ऊर्जा खरीदने वाले प्रमुख देशों में शामिल हैं। ऐसे में यदि अंतिम कानून में मौजूदा प्रावधान बरकरार रहता है और भारत उसके दायरे में आता है, तो अमेरिका को होने वाले भारतीय निर्यात पर अतिरिक्त शुल्क का असर पड़ सकता है।
विधेयक के प्रमुख प्रावधान
विधेयक का मुख्य उद्देश्य रूस की ऊर्जा आय पर दबाव बढ़ाना है। इसमें रूसी अधिकारियों, वित्तीय संस्थानों और प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाले नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई के साथ तेल की ढुलाई करने वाले तथाकथित ‘शैडो फ्लीट’ पर भी प्रतिबंध मजबूत करने का प्रस्ताव है। हालांकि, टैरिफ स्वतः लागू नहीं होगा; इसका वास्तविक दायरा अंतिम कानून और अमेरिकी प्रशासन के फैसले पर निर्भर करेगा।
प्रतिनिधि सभा में संशोधनों की संभावना
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में विधेयक को लेकर कई संशोधन प्रस्तावित हैं। कुछ सांसद टैरिफ संबंधी अधिकारों को सीमित या हटाने की कोशिश कर रहे हैं। इसलिए अंतिम कानून में भारत और अन्य देशों पर प्रस्तावित शुल्क किस रूप में लागू होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है। हाउस से पारित होने और राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद ही इसकी अंतिम स्थिति तय होगी।
भारत के लिए निहितार्थ
भारत रूस से कच्चे तेल का बड़ा खरीदार बनकर उभरा है। यूक्रेन युद्ध के बाद से भारतीय रिफाइनरियों ने रूसी तेल की खरीद में भारी बढ़ोतरी की है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 2023 में भारत रूसी कच्चे तेल के शीर्ष खरीदारों में शामिल रहा। यदि प्रस्तावित टैरिफ लागू होता है, तो अमेरिकी बाजार में भारतीय वस्तुओं की प्रतिस्पर्धात्मकता प्रभावित हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत कूटनीतिक चैनलों के माध्यम से इस मुद्दे पर बातचीत कर सकता है।
चीन की स्थिति
चीन भी रूसी ऊर्जा का प्रमुख आयातक है। दोनों देशों के बीच ऊर्जा साझेदारी हाल के वर्षों में गहरी हुई है। अमेरिकी विधेयक का असर चीन पर भी समान रूप से पड़ने की आशंका है। हालांकि, चीन-अमेरिका व्यापार संबंध पहले से ही तनावपूर्ण हैं, इसलिए यह नया प्रावधान मौजूदा व्यापार युद्ध को और जटिल बना सकता है।
अंतिम निर्णय तक अनिश्चितता बनी रहेगी। भारतीय विदेश मंत्रालय और वाणिज्य मंत्रालय इस घटनाक्रम पर करीब से नजर रखे हुए हैं। अमेरिका में भी उद्योग समूहों ने टैरिफ वृद्धि से घरेलू महंगाई बढ़ने की चेतावनी दी है।
रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों पर विकिपीडिया का विस्तृत विवरण उपलब्ध है।



