रांची: झारखंड में पारंपरिक तरीके से खेती करने वाले किसानों और जंगलों से प्राकृतिक उत्पाद जुटाने वाले संग्राहकों के लिए अच्छी खबर आई है। केंद्र सरकार ने जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी की है, जिससे राज्य के किसानों और संग्राहकों को अपने उत्पादों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार तक सीधी पहुंच मिल सकेगी। इस पहल से प्रमाणन प्रक्रिया आसान होगी और बुनियादी ढांचे का विकास भी तेज गति से किया जाएगा।
जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए नई SOP की मुख्य बातें
केंद्रीय कृषि मंत्रालय द्वारा जारी इस नई SOP का मुख्य उद्देश्य बेहतर प्रदर्शन करने वाले किसान समूहों, क्लस्टरों, किसान उत्पादक संगठनों (FPO) और स्वयं सहायता समूहों की पहचान कर उन्हें वित्तीय और तकनीकी रूप से मजबूत करना है। इसके बाद उनके उत्पादों को घरेलू बाजार के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार के मानकों के अनुरूप तैयार किया जाएगा। इस योजना के तहत चयनित क्लस्टरों को तीन वर्षों के लिए सहायता प्रदान की जाएगी, जिससे जैविक खेती का दायरा बढ़ेगा और किसानों की आय में वृद्धि होगी।
अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच होगी आसान
नई SOP के तहत जैविक और प्राकृतिक उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने के लिए विशेष क्लस्टर विकसित किए जाएंगे। इन क्लस्टरों को अंतरराष्ट्रीय मानकों जैसे NPOP (राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम) और PGS-India (भागीदारी गारंटी प्रणाली) के अनुरूप प्रमाणित किया जाएगा। इससे झारखंड के किसान अपने उत्पादों को यूरोप, अमेरिका और मध्य पूर्व के देशों में निर्यात कर सकेंगे। अभी तक प्रमाणन की जटिल प्रक्रिया और बाजार की जानकारी न होने के कारण किसान स्थानीय बाजार में कम दाम पर बेचने को मजबूर थे।
बुनियादी ढांचे के विकास पर जोर
चयनित क्लस्टरों में कोल्ड स्टोरेज, प्रोसेसिंग यूनिट, पैकेजिंग, ग्रेडिंग और सुखाने जैसी बुनियादी सुविधाएं विकसित करने के लिए वित्तीय मदद दी जाएगी। यह बुनियादी ढांचा फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करेगा और उत्पाद की गुणवत्ता बनाए रखेगा। विशेष रूप से झारखंड के वनोपज संग्राहकों के लिए प्राथमिक प्रसंस्करण केंद्र स्थापित किए जाएंगे, जिससे महुआ, इमली, करंज बीज और औषधीय पौधों का उचित मूल्य मिल सके।
- कोल्ड स्टोरेज: जल्दी खराब होने वाली जैविक सब्जियों और फलों के भंडारण के लिए।
- प्रोसेसिंग यूनिट: कच्चे माल को मूल्य वर्धित उत्पादों में बदलने के लिए।
- पैकेजिंग और ग्रेडिंग: अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप पैकेजिंग और गुणवत्ता आधारित ग्रेडिंग।
- सुखाने की इकाइयां: मसालों, औषधीय पौधों और वनोपज के वैज्ञानिक सुखाने के लिए।
किसान समूहों और FPO को मिलेगी मजबूती
योजना के तहत किसान उत्पादक संगठनों (FPO) और स्वयं सहायता समूहों (SHG) को प्राथमिकता दी जाएगी। इन समूहों को व्यवसाय योजना तैयार करने, ब्रांडिंग करने और विपणन रणनीति बनाने में विशेषज्ञ सहायता प्रदान की जाएगी। झारखंड में पहले से सक्रिय कई FPO इस योजना का लाभ उठाकर अपने कारोबार का विस्तार कर सकेंगे। सरकार का लक्ष्य है कि अगले तीन वर्षों में राज्य में कम से कम 50 नए जैविक क्लस्टर विकसित किए जाएं, जिनसे लगभग 50 हजार किसान सीधे लाभान्वित हों।
प्रमाणन प्रक्रिया हुई सरल
नई SOP में प्रमाणन प्रक्रिया को सरल और किसान हितैषी बनाया गया है। अब किसानों को व्यक्तिगत रूप से प्रमाणन लेने की आवश्यकता नहीं होगी; क्लस्टर आधारित सामूहिक प्रमाणन (Group Certification) को मान्यता दी गई है। इससे छोटे और सीमांत किसानों का खर्च और समय दोनों बचेगा। PGS-India प्रणाली के तहत किसान स्वयं अपने समूह की निगरानी कर सकेंगे, जबकि निर्यात के लिए NPOP प्रमाणन की सुविधा भी क्लस्टर स्तर पर उपलब्ध कराई जाएगी। यह कदम भारत में जैविक खेती के विस्तार में मील का पत्थर साबित होगा।
झारखंड के संग्राहकों के लिए नए अवसर
झारखंड की भौगोलिक विविधता और समृद्ध वन संपदा इसे प्राकृतिक और जैविक उत्पादों का प्राकृतिक केंद्र बनाती है। नई SOP का लाभ उन हजारों आदिवासी संग्राहकों को मिलेगा जो जंगलों से महुआ, चिरौंजी, शहद, लाह, तेंदू पत्ता और विभिन्न औषधीय पौधे एकत्र करते हैं। इन उत्पादों के लिए अब गांव स्तर पर ही संग्रह केंद्र, ग्रेडिंग और पैकेजिंग सुविधा उपलब्ध होगी। इससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त होगी और संग्राहकों को उनके श्रम का उचित मूल्य प्राप्त होगा।
राज्य सरकार के कृषि विभाग को निर्देश दिया गया है कि वह जिला स्तर पर नोडल अधिकारी नियुक्त कर इस SOP का तेजी से क्रियान्वयन सुनिश्चित करे। कृषि वैज्ञानिकों और कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) की मदद से किसानों को जैविक खेती की उन्नत तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। उम्मीद है कि यह पहल झारखंड के कृषि परिदृश्य को बदलने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।



