चतरा: ब्रिटिश शासनकाल से संचालित चतरा हेड पोस्ट ऑफिस आज अपनी बदहाली पर आंसू बहाता नजर आ रहा है। 11 लाख से अधिक आबादी वाले इस जिले का मुख्य डाकघर मूलभूत सुविधाओं के अभाव और जर्जर भवन से जूझ रहा है। यहां आने वाले ग्राहकों को जहां तमाम परेशानियों का सामना करना पड़ता है, वहीं कर्मचारियों के लिए भी बेहतर व्यवस्था नहीं है।
चतरा हेड पोस्ट ऑफिस की जर्जर होती इमारत
मुख्य डाकघर की हालत देखकर लगता है कि लंबे समय से भवन के रख-रखाव पर ध्यान नहीं दिया गया। भवन के विभिन्न हिस्सों में जर्जरता साफ दिखाई देती है। पुराने ढांचे में ही कर्मचारी रोजाना काम करने को मजबूर हैं। समय के साथ डाक सेवाओं का स्वरूप बदल गया है। अब डाकघर महज चिट्ठी-पत्री तक सीमित नहीं हैं। बचत खाता, डाक जीवन बीमा, पार्सल, स्पीड पोस्ट, आधार सेवाएं और वित्तीय सेवाओं के कारण लोगों की आवाजाही बनी रहती है। इसके बावजूद आधुनिक ग्राहक सुविधाओं के अनुरूप व्यवस्था विकसित नहीं हो पाना चिंता का विषय है।
ग्राहकों को होती है परेशानी
डाकघर में रोजाना बड़ी संख्या में बुजुर्ग, महिलाएं, पेंशनधारी, व्यापारी, विद्यार्थी और ग्रामीण क्षेत्र के लोग पहुंचते हैं। बैठने की पर्याप्त व्यवस्था, स्वच्छ वातावरण, पेयजल, साफ-सफाई और शौचालय जैसी जरूरी सुविधाओं का अभाव है। ग्राहकों का कहना है कि सरकारी कार्यालयों को आधुनिक बनाने की बातें होती हैं, लेकिन धरातल पर स्थिति अलग नजर आती है। जिस भवन में हजारों लोगों का कामकाज होता है, वहां मूलभूत सुविधाएं न होना आम लोगों की परेशानी बढ़ाता है।
कर्मचारियों के लिए भी चुनौतीपूर्ण हालात
सिर्फ ग्राहक ही नहीं, डाकघर के कर्मचारी भी मौजूदा व्यवस्था से प्रभावित हैं। सीमित और पुरानी आधारभूत संरचना के बीच काम करना उनके लिए चुनौतीपूर्ण है। बेहतर कार्य वातावरण के लिए आवश्यक संसाधनों का होना जरूरी है। डाक विभाग देश के सबसे पुराने सरकारी सेवा नेटवर्क में शामिल है। ऐसे में उसके प्रमुख कार्यालय का बेहतर होना नागरिकों के हित में आवश्यक है।
विकास के दावों को मुंह चिढ़ाता डाकघर
चतरा जिले में विकास को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जाते रहे हैं। नई सड़कें, भवन और परियोजनाओं की बातें सामने आती हैं। लेकिन शहर के बीचोंबीच स्थित मुख्य डाकघर की जर्जर स्थिति इन दावों को मुंह चिढ़ाती नजर आती है। जब जिले के सबसे महत्वपूर्ण कार्यालयों में शामिल हेड पोस्ट ऑफिस की दशा सुधारने पर ध्यान नहीं दिया जा रहा, तो आधुनिक सरकारी सेवाओं का सपना कितना साकार होगा?
संरक्षण और आधुनिकीकरण की जरूरत
ब्रिटिश शासनकाल से संचालित होने के कारण इस डाकघर का ऐतिहासिक महत्व भी है। ऐसे पुराने संस्थानों को शहर की ऐतिहासिक विरासत के हिस्से के तौर पर देखा जाना चाहिए। भवन की स्थिति को देखते हुए इसके संरक्षण, मरम्मत और आधुनिकीकरण की दिशा में गंभीर पहल की जरूरत है। स्थानीय लोगों की मांग है कि डाक विभाग के वरीय अधिकारी स्थिति का निरीक्षण करें और तकनीकी जांच कराकर आवश्यक मरम्मत अथवा नए भवन निर्माण की दिशा में ठोस पहल करें।
2009 में हुआ था नवीनीकरण, 17 साल में फिर बदहाल
मौजूदा बदहाली इसलिए भी गंभीर है, क्योंकि इसका नवीनीकरण करीब 17 वर्ष पूर्व प्रोजेक्ट ऐरो के तहत किया गया था। भारत सरकार के संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, डाक विभाग के तत्वावधान में डाक सेवाएं झारखंड सर्किल की तत्कालीन निदेशक शशि शालिनी कुजूर द्वारा प्रोजेक्ट ऐरो के अंतर्गत नवीनीकृत चतरा मुख्य डाकघर का लोकार्पण 15 सितंबर 2009 को किया गया था। प्रोजेक्ट ऐरो का उद्देश्य डाकघरों को आधुनिक स्वरूप प्रदान कर ग्राहकों को बेहतर सेवाएं देना था। लेकिन समय बीतने के साथ भवन और व्यवस्था दोबारा बदहाल होती चली गई। इससे सवाल उठता है कि नवीनीकरण के बाद नियमित रख-रखाव की व्यवस्था कितनी प्रभावी रही? भारतीय डाक विभाग को इस ओर गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता है।
कब बदलेगी तस्वीर?
चतरा के मुख्य डाकघर की स्थिति को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इसकी तस्वीर कब बदलेगी? जिले की बड़ी आबादी आज भी डाक सेवाओं का इस्तेमाल करती है। मुख्य डाकघर का जर्जर रहना केवल एक भवन की समस्या नहीं, बल्कि सरकारी सेवा व्यवस्था से जुड़ा गंभीर विषय है। जरूरत है कि संबंधित विभाग और शासन-प्रशासन इस ओर गंभीरता से ध्यान दें और कागजों पर विकास के दावों के बजाय धरातल पर बेहतर सुविधाएं मुहैया कराएं। चतरा का ऐतिहासिक हेड पोस्ट ऑफिस भी अब इसी बदलाव का इंतजार कर रहा है।



