बेगूसराय: कार्तिक कल्पवास मेला के पावन अवसर पर तिलरथ स्थित सर्वमंगला आध्यात्म योग विद्यापीठ परिसर में आदि कवि वाल्मीकि जयंती समारोह का भव्य आयोजन किया गया। महर्षि चिदात्मन वेद अनुसंधान न्यास सिमरिया धाम के तत्वाधान में हुए इस कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन वैदिक मंत्रोच्चार के बीच दीप प्रज्वलन के साथ संपन्न हुआ। मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित डॉक्टर सच्चिदानंद पाठक ने अपने संबोधन में महर्षि वाल्मीकि के व्यक्तित्व पर गहरी छाप छोड़ी।
उद्घाटन सत्र में गूंजा वाल्मीकि का दर्शन
समारोह का शुभारंभ वैदिक रीति से हुआ। डॉ सच्चिदानंद पाठक ने कहा कि “अंधकार से प्रकाश की ओर यात्रा का नाम वाल्मीकि है”। उन्होंने रत्नाकर से वाल्मीकि बनने की रूपांतरण यात्रा को महर्षि उपाधि की सार्थकता बताया। उनके अनुसार आज के दौर में भी महर्षि वाल्मीकि सर्वथा प्रासंगिक हैं। उनके शब्द ऋषि होने का प्रमाण रामायण की रचना है। इस दौरान मंच पर विशिष्ट अतिथि धनंजय श्रोति्य (संपादक, मगही पत्रिका), सम्मानित अतिथि डॉ रामकिंकर सिंह, मुख्य वक्ता डॉ पुरुषोत्तम कुमार (प्रदेश मंत्री, एबीपी) एवं प्रसिद्ध इतिहासकार डॉ फुलेश्वर सिंह उपस्थित रहे।
वक्ताओं ने रखे आदि कवि वाल्मीकि जयंती समारोह पर विचार
विषय प्रवेश कराते हुए न्यास के उपनिदेशक प्रो अवधेश झा ने कहा कि आदि कवि वाल्मीकि ने स्वार्थपूर्ण संसार का दुख दूर करने के लिए वेद पुरुष श्रीराम के चरित्र को रामायण में महानायक बनाकर प्रस्तुत किया। विशिष्ट अतिथि धनंजय श्रोति्य ने जीवन दर्शन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि व्यक्ति जब भी जाग जाए, उसी क्षण जीवन में सवेरा आ जाता है। यह वाल्मीकि जी के जीवन की सबसे बड़ी सीख है।
डॉ रामकिंकर सिंह ने आश्विन मास की पूर्णिमा तिथि को जीवन सार्थक करने का साधन बताया। मुख्य वक्ता डॉ पुरुषोत्तम कुमार ने वाल्मीकि के जीवन चरित्र को रेखांकित करते हुए कहा कि उन्होंने प्रभु श्रीराम का चरित्र लिखकर आने वाली सैकड़ों पीढ़ियों को प्रेरणा दी। इतिहासकार डॉ फुलेश्वर सिंह ने महर्षि वाल्मीकि के विभिन्न आयामों पर विस्तृत चर्चा प्रस्तुत की।
मिथिला परंपरा में हुआ अतिथियों का सम्मान
समारोह में सर्वमंगला परिवार के सचिव दिनेश प्रसाद सिंह ने मिथिला की समृद्ध परंपरा का निर्वहन करते हुए सभी सम्मानित अतिथियों को अंगवस्त्र और पाग पहनाकर सम्मानित किया। न्यास के सहसचिव प्रो प्रेम ने न्यास का साहित्य सप्रेम भेंट कर अतिथियों का अभिनंदन किया। कार्यक्रम का सफल संचालन न्यास के सचिव सुधीर चौधरी ने किया जबकि धन्यवाद ज्ञापन सुशील चौधरी ने प्रस्तुत किया।
आयोजन में इनकी रही गरिमामयी उपस्थिति
इस अवसर पर रविंद्र ब्रह्मचारी, मीडिया प्रभारी नीलमणि, मनोज कुमार, कन्हैया कुमार, राम झा, दिनेश झा, राजेश झा, आचार्य नारायण झा, लक्ष्मण झा, श्याम झा, रंजना देवी, पूनम देवी, सुनीता देवी, रितु देवी समेत बड़ी संख्या में गणमान्यजन एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे। वाल्मीकि जयंती पर आयोजित इस वैचारिक मंथन ने उपस्थित जनमानस को आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर कर दिया। वाल्मीकि के जीवन दर्शन पर विस्तृत जानकारी के लिए विकिपीडिया पृष्ठ देख सकते हैं।



