भाजपा पूर्व दो जिलाध्यक्ष ने भाजपा का दामन छोड़ा
बेगुसराय
क्या बेगूसराय जिले में भाजपा का गढ़ ढहने लगा है।
क्या भाजपा के जिलास्तरीय नेताओं के दल छोड़कर दूसरे दलों में जाने का सिलसिला रूक नहीं रहा है।क्या इसे लेकर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह के संसदीय क्षेत्र में सियासी हलचल तेज है।
क्या भाजपा के जिलास्तरीय नेताओं को दूसरे दल में शामिल होने को कोई रोकने वाला नहीं है।
क्या आरएसएस की पृष्ठभूमि वाले नेताओं के दल छोड़ने से उसके प्रभाव पर भी असर पड़ रहा है।
पहले शिक्षक नेता सुरेश प्रसाद राय और अब भारतीय जनता पार्टी के बेगूसराय के दो पूर्व जिलाध्यक्ष रामलखन सिंह और राजकिशोर सिंह क्या थामेंगे जन सुराज का हाथ।भाजपा के इस भगदड़ से संगठन और पार्टी की सेहत पर पड़ेगा असर।संगठन के इस भागमभागी को किस रूप में देख रहा है भाजपा का केन्द्रीय और राज्य नेतृत्व।बिहार में विधानपरिषद चुनाव का जोर है। नामांकन भी चल रहा है। बिहार में भाजपा के पहले मुख्यमंत्री के तौर पर सम्राट चौधरी सत्ता में हैं। लेकिन, पिछले तीन संसदीय चुनावों से बेगूसराय में सांसद जिताने वाले और विधायक देनेवाले भाजपा की सेहत बिगड़ती जा रही है। पहले बेगूसराय के कद्दावर शिक्षक नेता सुरेश प्रसाद राय अपने समर्थकों के साथ भाजपा छोड़कर जनसुराज में शामिल हो गए। वे दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से जनसुराज के उम्मीदवार बने हैं। पिछले चुनाव में वे इस पद के भाजपा के प्रत्याशी थे। इस बार पार्टी ने शिक्षक क्षेत्र की ंयह सीट अपने सहयोगी जदयू को दे दिया। अब सुरेश प्रसाद राय ने भाजपा छोड़कर जनसुराज का दामन थाम लिया। भाजपा के पुराने और दिग्गज नेता माने जाने वाले श्री राय के जंनसुराज में जाने का जख्म भूला भी नहीं था कि भाजपा के दो कद्दावर पूर्व जिलाध्यक्ष राम-लखन सिंह और राजकिशोर सिंह के जनसुराज में शामिल होने की चर्चा खबर और जनसुराज सुप्रीम प्रशांत किशोर से उनकी मुलाकात ने जिला के राजनीतिक महकमे में भूचाल पैदा कर दिया है।
ये दोनों पूर्व जिलाध्यक्ष आरएसएस पृष्ठभूमि के रहे हैं और बरसों से जिले में बीजेपी के संगठन को सशक्त बनाने में भूमिका निभाई है। ऐसे सूत्रों ने बताया कि भाजपा के केन्द्रीय मंत्री गिरिराज सिंह के क्षेत्र से इस तरह से भाजपा नेताओं का दूसरे दलों की ओर मुखातिब होना सांगठनिक ढांचे के लिए शुभ संकेत नहीं है।



