नई दिल्ली: ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के विभिन्न कार्यक्रमों में शिरकत करने के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) शासित राज्यों के कई मुख्यमंत्री दिल्ली पहुंच रहे हैं। इस महत्वपूर्ण आयोजन में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल हो रहे हैं।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में राज्यों की सक्रिय भागीदारी
शिखर सम्मेलन के प्रतिनिधियों के लिए आयोजित रात्रिभोज में केंद्रीय मंत्री और भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री भी मौजूद रहेंगे। इस दौरान विभिन्न देशों से दिल्ली पहुंचे राजनयिकों और प्रतिनिधियों के साथ मुख्यमंत्रियों की मुलाकात का कार्यक्रम तय किया गया है। सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री अलग-अलग देशों के प्रतिनिधियों के साथ संवाद करेंगे और भारत के राज्यों से जुड़े अनुभव तथा सहयोग की संभावनाओं पर भी चर्चा कर सकते हैं।
कूटनीतिक और संघीय सहभागिता का प्रदर्शन
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के मद्देनजर दिल्ली में देश-विदेश के शीर्ष नेताओं और प्रतिनिधियों की मौजूदगी के बीच यह कार्यक्रम भारत की कूटनीतिक और संघीय सहभागिता को भी प्रदर्शित करेगा। केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय का यह उदाहरण सहकारी संघवाद की भावना को मजबूत करता है। राज्यों के मुख्यमंत्रियों की उपस्थिति से अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की विविधता और संघीय ढांचे की झलक मिलती है।
मुख्यमंत्रियों का व्यस्त कार्यक्रम
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने राज्य की निवेश संभावनाओं और विकास योजनाओं को अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के सामने रख सकते हैं। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पर्यटन और आध्यात्मिक विरासत पर चर्चा कर सकते हैं। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, गुजरात के भूपेंद्र पटेल, महाराष्ट्र के देवेंद्र फडणवीस और गोवा के प्रमोद सावंत भी अपने-अपने राज्यों की प्रगति और सहयोग के अवसरों पर बातचीत करेंगे।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग के नए आयाम
ब्रिक्स समूह में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं। हाल ही में इस समूह का विस्तार हुआ है और नए सदस्य देश जुड़े हैं। ऐसे में भारतीय राज्यों की भागीदारी आर्थिक, सांस्कृतिक और तकनीकी सहयोग के नए द्वार खोल सकती है। मुख्यमंत्री अपने राज्यों की विशिष्टताओं को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करेंगे, जिससे विदेशी निवेश और ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलेगा।
संघीय ढांचे की मजबूती
इस आयोजन से स्पष्ट होता है कि विदेश नीति केवल केंद्र सरकार का विशेषाधिकार नहीं रह गई है। राज्य सरकारें भी अब अंतरराष्ट्रीय संबंधों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। यह प्रवृत्ति भारत के लोकतांत्रिक संघीय ढांचे की परिपक्वता को दर्शाती है। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन जैसे मंचों पर राज्यों की उपस्थिति देश की समग्र क्षमता को प्रदर्शित करती है।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस तरह के आयोजन ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास’ के मंत्र को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मूर्त रूप देते हैं। विदेश मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट पर भी इस संबंध में विस्तृत जानकारी उपलब्ध है।
भविष्य की संभावनाएं
विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में राज्यों की भागीदारी एक नई परंपरा की शुरुआत है। आने वाले समय में अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी राज्यों की सक्रिय उपस्थिति देखने को मिल सकती है। इससे न केवल राज्यों को वैश्विक पहचान मिलेगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर विकास योजनाओं को अंतरराष्ट्रीय सहयोग से गति भी मिलेगी।
दिल्ली में चल रहे इस आयोजन पर पूरे देश की नजर है। अगले कुछ दिनों में मुख्यमंत्रियों की विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों के साथ होने वाली द्विपक्षीय बैठकों के नतीजे सामने आएंगे, जो भारत के राज्यों के लिए नए अवसरों का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं।



