बद्रीनाथ हेलीकॉप्टर हादसे में 6 की मौत, खराब मौसम में उड़ान की अनुमति पर उठे सवाल
बद्रीनाथ से उड़ान भरने के दो मिनट बाद टूटा संपर्क, हादसे में पायलट समेत छह की मौत
बद्रीनाथ हेलीकॉप्टर हादसे में छह की मौत, खराब मौसम में उड़ान की अनुमति पर उठे सवाल**
मौसम अलर्ट के बीच बद्रीनाथ से सहस्त्रधारा जा रहा हेलीकॉप्टर ज्योतिर्मठ घाटी में दुर्घटनाग्रस्त, पांच यात्री कर्नाटक के निवासी**
**जोशीमठ/गोपेश्वर।** उत्तराखंड में खराब मौसम के बीच बद्रीनाथ से देहरादून जा रहा एक हेलीकॉप्टर शुक्रवार को दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे में पायलट समेत सभी छह लोगों की मौत हो गई। ट्रांस भारत एविएशन प्राइवेट लिमिटेड का हेलीकॉप्टर VT-HCX बद्रीनाथ हेलीपैड से सहस्त्रधारा के लिए रवाना हुआ था। दुर्घटना के बाद खराब मौसम में उड़ान की अनुमति दिए जाने को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (यूसीएडीए) और पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, हेलीकॉप्टर ने 30 अक्टूबर को दोपहर 1:12 बजे उड़ान भरी थी। करीब दो मिनट बाद 1:14 बजे ज्योतिर्मठ घाटी के ऊपर उसका संपर्क टूट गया। आर्मी पोस्ट के माध्यम से हेलीकॉप्टर के रडार से गायब होने की सूचना मिली। इसके बाद पुलिस, एसडीआरएफ और सेना की संयुक्त टीमों के साथ ड्रोन टीम को तलाशी अभियान में लगाया गया। घने बादलों, बारिश और बर्फबारी के बीच चाय गांव के पास हेलीकॉप्टर का मलबा मिला। घटनास्थल से सभी छह शव बरामद किए गए।
मृतकों में पायलट कैप्टन हिमांशु सभरवाल (48), निवासी दिल्ली शामिल हैं। पांच यात्रियों की पहचान प्रतापा (41), अरुण सालुंके (44), वीबी शंकर गौड़ा (39), सुधीर के. (50) और एचएस नटराजा (51) के रूप में हुई है। सभी कर्नाटक के निवासी बताए गए हैं। जानकारी के मुताबिक, यात्री बद्रीनाथ दर्शन के बाद देहरादून लौट रहे थे।
**मौसम क्लीयरेंस पर उठे सवाल**
हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि मौसम खराब होने के बावजूद हेलीकॉप्टर को उड़ान की अनुमति कैसे मिली। पिछले 48 घंटों से प्रदेश के कई इलाकों में बारिश और बर्फबारी की चेतावनी जारी थी। स्थानीय लोगों के अनुसार, सुबह से ही घाटी में बादल छाए हुए थे। ऐसे में उड़ान से पहले मौसम की स्थिति और क्लीयरेंस प्रक्रिया की जांच अहम होगी।
चारधाम यात्रा के दौरान हेलीकॉप्टर दुर्घटनाओं का सिलसिला भी चिंता बढ़ा रहा है। उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2023 से 2025 के बीच चारधाम क्षेत्र में कई हादसे हुए। वर्ष 2025 में भी उत्तरकाशी और केदारनाथ क्षेत्र में हेलीकॉप्टर दुर्घटनाओं में लोगों की जान गई थी।
अब इस हादसे की जांच में उड़ान से पहले मौसम की स्थिति, पायलट के निर्णय, संचालन प्रक्रिया और संबंधित अनुमति की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। हादसे ने एक बार फिर चारधाम हेली सेवाओं की सुरक्षा व्यवस्था और खराब मौसम में उड़ानों के संचालन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।



