चान्हो: चान्हो बांध का पानी बिना जरूरत बहा दिए जाने के विरोध में शुक्रवार को छह गांवों के सैकड़ों किसानों ने बांध के सामने दिनभर धरना देकर विरोध जताया। बूचा-ओपा सिंचाई परियोजना के तहत बने इस बांध से पानी छोड़ने का आरोप लगाते हुए किसानों ने कहा कि अभी खेतों में सिंचाई की आवश्यकता नहीं थी, इसके बावजूद जल भंडारण को घटा दिया गया है।
चान्हो बांध से पानी छोड़ने का विरोध
ग्रामीणों का कहना है कि बांध का संचालन कर रहे कर्मचारियों ने मनमाने ढंग से गेट खोल दिए, जिससे स्टोर किया गया पानी नदी में बह गया। किसान नेता महेश उरांव ने बताया कि इस समय फसलों को पानी की जरूरत नहीं है, लेकिन आने वाले रबी सीजन में सिंचाई के लिए जल संकट खड़ा हो सकता है। उन्होंने कहा कि विभागीय लापरवाही के कारण हर साल यही स्थिति बनती है।
किसानों की प्रमुख मांगें
- मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए
- वर्तमान संचालन कर्मचारी को हटाकर नए सरकारी कर्मचारी की नियुक्ति हो
- दुक्क चौरा के पास टूटी नहर की तत्काल मरम्मत की जाए
- विभिन्न स्थानों पर आउटलेट पुल का निर्माण किया जाए
अधिकारियों ने दिया कार्रवाई का आश्वासन
मामले की सूचना मिलते ही सिंचाई विभाग के कार्यपालक अभियंता अमित कुमार और कनीय अभियंता नितेश सिंह मौके पर पहुंचे। उन्होंने किसानों से वार्ता की और आश्वस्त किया कि भविष्य में बिना वरीय अधिकारियों के आदेश के पानी नहीं छोड़ा जाएगा। अधिकारियों ने ग्रामीणों द्वारा सौंपे गए आवेदन को विभाग के वरीय पदाधिकारियों तक पहुंचाने का भरोसा दिया।
कार्यपालक अभियंता अमित कुमार ने कहा, “किसानों की शिकायत जायज है। बांध संचालन में पारदर्शिता लाई जाएगी और जल वितरण की व्यवस्था दुरुस्त की जाएगी।” उन्होंने नहर मरम्मत और आउटलेट निर्माण के प्रस्ताव भी मुख्यालय भेजने की बात कही।
बूचा-ओपा सिंचाई परियोजना का महत्व
बूचा-ओपा सिंचाई परियोजना रांची जिले के चान्हो प्रखंड में स्थित एक प्रमुख मध्यम सिंचाई परियोजना है। इसका निर्माण क्षेत्र के किसानों को सिंचाई सुविधा मुहैया कराने के लिए किया गया था। परियोजना से आसपास के दर्जनों गांवों की कृषि भूमि सिंचित होती है। भारत में सिंचाई परियोजनाओं के रखरखाव और संचालन में स्थानीय भागीदारी की कमी अक्सर ऐसे विवादों का कारण बनती है।
जल प्रबंधन में सुधार की जरूरत
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि बांधों के संचालन के लिए स्पष्ट नियमावली और किसान समितियों की भागीदारी आवश्यक है। झारखंड में कई सिंचाई परियोजनाएं रखरखाव के अभाव में अपनी क्षमता से कम कार्य कर रही हैं। चान्हो बांध का यह मामला विभागीय जवाबदेही तय करने की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
धरने में शामिल किसानों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर समयबद्ध कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन तेज करेंगे। ग्रामीणों ने कहा कि पानी उनके लिए जीवनरेखा है और इसके प्रबंधन में कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।



