चौपारण: हजारीबाग जिले के चौपारण प्रखंड अंतर्गत दैहर पंचायत का मुख्य मार्ग पूरी तरह जर्जर हो चुका है। यह सड़क दैहर, हथिंदर, सोहरा, नीमा तथा झापा पंचायत के बेढ़ना गांव को दैहर मोड़ होते हुए हजारीबाग-चौपारण मुख्य मार्ग से जोड़ती है। दो पंचायतों के हजारों ग्रामीणों के लिए यही एकमात्र संपर्क मार्ग है।
दैहर पंचायत का मुख्य मार्ग बरसात में बना दलदल
बरसात के मौसम में सड़क पर बने बड़े-बड़े गड्ढों में पानी भर जाने से यह मार्ग कीचड़ के दलदल में तब्दील हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि पैदल चलना तक मुश्किल हो रहा है। दोपहिया वाहन चालक आए दिन दुर्घटना के शिकार होते हैं। चार पहिया वाहन तो दूर, साइकिल चलाना भी जोखिम भरा हो गया है।
स्कूली बच्चों पर भारी पड़ रही बदहाली
इसी रास्ते से प्रतिदिन सैकड़ों स्कूली छात्र-छात्राएं पैदल व साइकिल से विद्यालय जाते हैं। कीचड़ अधिक होने के कारण बच्चे अक्सर फिसल कर गिर जाते हैं। इससे उनके कपड़े तो खराब होते ही हैं, बैग में रखी किताबें-कॉपियां भी भीगकर बर्बाद हो जाती हैं। अभिभावक बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। कई बच्चों को चोटें भी आई हैं।
स्मार्ट विलेज का दर्जा, सुविधा शून्य
ग्रामीणों का कहना है कि दैहर पंचायत को स्मार्ट विलेज का दर्जा दिया गया है, लेकिन मुख्य मार्ग की स्थिति अत्यंत दयनीय है। सरकारी योजनाओं का बोर्ड लगा है, पर धरातल पर काम नहीं दिखता। इस संबंध में कई बार स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रखंड से लेकर जिला स्तर के अधिकारियों को अवगत कराया गया, परंतु अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
ग्रामीण बताते हैं कि चुनाव के समय नेता वादे करते हैं, जीतने के बाद कोई सुध नहीं लेता। पंचायत के मुखिया से लेकर विधायक तक को ज्ञापन दिया गया, लेकिन आश्वासन के सिवा कुछ नहीं मिला। सड़क निर्माण के लिए टेंडर भी निकला था, पर काम शुरू नहीं हुआ।
ग्रामीणों ने की अविलंब पक्कीकरण की मांग
आक्रोशित ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से इस मार्ग का अविलंब पक्कीकरण कराने की मांग की है। उनका कहना है कि अगर जल्द काम शुरू नहीं हुआ तो आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि सड़क नहीं बनी तो वे मतदान का बहिष्कार भी कर सकते हैं।
हजारीबाग जिला प्रशासन का ध्यान इस ओर दिलाते हुए ग्रामीणों ने कहा कि यह केवल सड़क नहीं, हजारों लोगों की जीवनरेखा है। स्वास्थ्य आपातकाल में एंबुलेंस तक नहीं पहुंच पाती। प्रसव पीड़ित महिलाओं को खाट पर ले जाना पड़ता है। इस समस्या का स्थायी समाधान जरूरी है।
जिले के उपायुक्त से ग्रामीणों ने अपील की है कि वे स्वयं स्थल निरीक्षण करें और वस्तुस्थिति से अवगत हों। स्मार्ट विलेज की अवधारणा तभी सार्थक होगी जब बुनियादी सुविधाएं धरातल पर उतरें। हजारीबाग जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट पर भी इस समस्या को दर्ज कराया गया है।
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता रमेश कुमार ने बताया कि इस मार्ग के निर्माण के लिए कई बार धरना-प्रदर्शन भी किया गया, लेकिन प्रशासन के कान पर जूं तक नहीं रेंगी। उन्होंने कहा कि ग्रामीण अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। अगर 15 दिनों के भीतर कार्य प्रारंभ नहीं हुआ तो प्रखंड मुख्यालय पर अनिश्चितकालीन धरना दिया जाएगा।



