चतरा: चतरा सदर अस्पताल में निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों की अनदेखी का गंभीर मामला सामने आया है जहां मजदूर बिना सेफ्टी बेल्ट के ऊंचाई पर काम करने को विवश हैं।
चतरा सदर अस्पताल में निर्माण कार्य में सुरक्षा की अनदेखी
जिला मुख्यालय स्थित सदर अस्पताल परिसर में इन दिनों भवन निर्माण का कार्य तेजी से चल रहा है। इस निर्माण कार्य का जिम्मा राज कंस्ट्रक्शन कंपनी के पास है। मौके पर देखा जा रहा है कि कंपनी द्वारा मजदूरों की सुरक्षा के लिए निर्धारित मानकों का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है। ऊंचाई पर चढ़कर ईंट-जोड़ी, प्लास्टर और छत ढलाई जैसे जोखिम भरे काम कर रहे मजदूरों के पास न तो सेफ्टी बेल्ट है और न ही हेलमेट या अन्य जरूरी सुरक्षा उपकरण। मजदूर बांस-बल्लियों के सहारे बने अस्थायी मचान पर बिना किसी सुरक्षा के आवाजाही कर रहे हैं।
निर्माण स्थल पर सुरक्षा जाल (सेफ्टी नेट) तक नहीं लगाया गया है। थोड़ी सी चूक या संतुलन बिगड़ने पर मजदूर सीधे नीचे आ सकते हैं, जिससे बड़ी जनहानि की आशंका बनी रहती है। श्रम कानूनों और भवन निर्माण अधिनियम के तहत ठेकेदार की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह कार्यस्थल पर श्रमिकों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करे, लेकिन यहां नियमों को ताक पर रखकर काम लिया जा रहा है।
मजदूरों की जान जोखिम में, प्रशासनिक निगरानी पर सवाल
मामले को लेकर स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं में गहरी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि अस्पताल परिसर पहले से ही संवेदनशील क्षेत्र है, जहां इलाज के लिए आने वाले मरीजों और उनके परिजनों की आवाजाही लगी रहती है। ऐसे स्थान पर निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। इसके विपरीत यहां लापरवाही बरती जा रही है।
नागरिकों ने जिला प्रशासन और श्रम विभाग की निगरानी प्रणाली पर भी सवाल खड़े किए हैं। उनका आरोप है कि बड़े निर्माण कार्यों की समय-समय पर जांच होनी चाहिए, लेकिन विभागीय उदासीनता के कारण ठेकेदार मनमानी कर रहे हैं। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो किसी अप्रिय घटना से इनकार नहीं किया जा सकता।
अस्पताल परिसर में निर्माण के विशेष मानक जरूरी
विशेषज्ञों के अनुसार स्वास्थ्य संस्थानों के परिसर में निर्माण कार्य के दौरान धूल, मलबा और शोरगुल से मरीजों को बचाने के साथ-साथ श्रमिक सुरक्षा के दोहरे मानक लागू होने चाहिए। भारतीय मानक ब्यूरो (आईएस कोड) और व्यावसायिक सुरक्षा और स्वास्थ्य मानक के तहत ऊंचाई पर कार्य करने वाले हर श्रमिक को पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट (पीपीई) किट अनिवार्य रूप से मुहैया कराई जानी चाहिए। इसमें सेफ्टी हेलमेट, सेफ्टी बेल्ट, सुरक्षा जूते और दस्ताने शामिल हैं।
चतरा सदर अस्पताल में निर्माण कार्य करा रही एजेंसी इन बुनियादी सुविधाओं से भी मजदूरों को वंचित रख रही है। मजदूरों से बात करने पर पता चला कि उन्हें कंपनी की ओर से कोई सुरक्षा सामग्री नहीं दी गई है। वे अपनी जान जोखिम में डालकर दिहाड़ी कमाने को मजबूर हैं। डर के मारे कोई भी मजदूर खुलकर कैमरे पर बोलने को तैयार नहीं हुआ, लेकिन दबी जुबान उन्होंने अपनी मजबूरी बयां की।
निर्माण क्षेत्र में सुरक्षा उपायों की अनिवार्यता
भारत में भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार (रोजगार विनियमन और सेवा शर्तें) अधिनियम, 1996 के तहत निर्माण श्रमिकों के कल्याण और सुरक्षा के स्पष्ट प्रावधान हैं। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन शून्य नजर आता है। श्रम विभाग के अधिकारियों का दायित्व है कि वे निर्माण स्थलों का औचक निरीक्षण करें और सुरक्षा मानकों के उल्लंघन पर ठेकेदार के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करें।
चतरा जिले में पूर्व में भी निर्माण कार्यों के दौरान सुरक्षा चूक से हादसे होते रहे हैं, लेकिन उनसे सबक नहीं लिया गया। इस बार सदर अस्पताल जैसी महत्वपूर्ण जगह पर बरती जा रही लापरवाही प्रशासनिक तंत्र की संवेदनहीनता को दर्शाती है। जिले के उपायुक्त और सिविल सर्जन से अपेक्षा की जाती है कि वे तत्काल संज्ञान लेकर निर्माण एजेंसी को सुरक्षा मानक पूरे करने का निर्देश दें और लापरवाही पर जुर्माना लगाएं।
आमजन की मांग, हो ठोस कार्रवाई
स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि राज कंस्ट्रक्शन कंपनी को तत्काल नोटिस जारी कर सुरक्षा उपकरण मुहैया कराने का आदेश दिया जाए। साथ ही, निर्माण स्थल पर सेफ्टी ऑफिसर की तैनाती सुनिश्चित की जाए। श्रम अधीक्षक कार्यालय को भी नियमित मॉनिटरिंग करनी चाहिए ताकि मजदूरों की जिंदगी से खिलवाड़ रोका जा सके। यह केवल चतरा की नहीं, बल्कि पूरे राज्य के निर्माण स्थलों की हकीकत बयां करता है जहां विकास की दौड़ में मानवीय जीवन हाशिये पर चला गया है।



