रांची: सीपीआई रांची जिला, एटक (AITUC) एवं झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा के संयुक्त तत्वावधान में गुरुवार को कृषि निदेशालय का घेराव सह प्रदर्शन किया गया। इस दौरान सैकड़ों की संख्या में किसान और महिला कार्यकर्ता कृषि भवन प्रांगण पहुंचे और निदेशालय में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि विभाग में चारा घोटाले से भी बड़ा घोटाला हुआ है और काली सूची में दर्ज कंपनियों को नियमों को ताक पर रखकर कार्यादेश दिया जा रहा है।
कृषि निदेशालय का घेराव: जुलूस और सभा का नजारा
घेराव से पूर्व सीएमपीडीआई (CMPDI) मुख्यालय से एक विशाल जुलूस निकाला गया जिसने पूरे माहौल को गर्म कर दिया। जुलूस का नेतृत्व सीपीआई के जिला सचिव अजय सिंह, एटक के वरिष्ठ नेता अशोक यादव, पुष्कर महतो एवं किसान नेता तारा सिंह मुंडा द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। जुलूस में भारी संख्या में महिलाओं सहित सैकड़ों किसान शामिल हुए जो हाथों में तख्तियां लिए हुए थे। जुलूस में “कृषि निदेशक किसानों को ठगना बंद करो”, “काली सूची में दर्ज कंपनियों को कार्यादेश क्यों?” और “कृषि निदेशालय में व्याप्त भ्रष्टाचार पर रोक लगाओ” जैसे जोरदार नारे गूंज रहे थे। जुलूस कृषि भवन प्रांगण पहुंचकर एक विशाल सभा में तब्दील हो गया जहां वक्ताओं ने अपनी बातें रखीं।
सीपीआई नेता अजय सिंह ने लगाए गंभीर आरोप
सभा को संबोधित करते हुए सीपीआई रांची जिला सचिव अजय सिंह ने बेहद गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि कृषि निदेशालय में चारा घोटाले से भी बड़ा घोटाला हुआ है। उनके अनुसार किसानों को अमानक सामग्री का वितरण किया गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि CIPET की जांच में अमानक पाई गई कंपनियों को फिर से कार्यादेश क्यों दिया जा रहा है? अजय सिंह ने विशेष रूप से “भारत ड्रिप इरिगेशन एंड एग्रो” कंपनी का नाम लेते हुए कहा कि यह कंपनी काली सूची में दर्ज है। हजारीबाग के उपायुक्त द्वारा इस कंपनी पर केस दर्ज करने की अनुशंसा की गई थी, लेकिन इसके बावजूद इसी कंपनी को सबसे ज्यादा कार्यादेश और भुगतान किया जा रहा है। उन्होंने इसे खुली मिलीभगत का प्रमाण बताया।
काली सूची वाली कंपनियों को कार्यादेश पर सवाल
सीपीआई नेता ने आगे बताया कि तार्किक आदेश की शर्तों का पालन हुए बिना ही 14 काली सूची वाली कंपनियों को मुक्त कर दिया गया। यह विभागीय पारदर्शिता पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। उन्होंने मांग की कि जब तक CIPET की नई जांच रिपोर्ट नहीं आती, तब तक सभी कंपनियों के भुगतान पर तत्काल रोक लगाई जाए और पूरे प्रकरण की जांच S.I.T. (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) से कराई जाए। इस मांग को उपस्थित हजारों किसानों और कार्यकर्ताओं ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ समर्थन दिया।
एटक ने दी अनिश्चितकालीन धरना की चेतावनी
सभा में एटक के नेता अशोक यादव एवं पुष्कर महतो ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने राज्य सरकार और कृषि विभाग के अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर 7 दिनों के अंदर निष्पक्ष जांच शुरू नहीं हुई तो कृषि निदेशालय पर अनिश्चितकालीन धरना दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसानों के हक की लड़ाई अब आर-पार की होगी। एटक नेताओं ने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार की यह गंगा ऊपर से नीचे तक बह रही है और छोटे कर्मचारियों को बलि का बकरा बनाकर बड़े अधिकारियों और नेताओं को बचाया जा रहा है।
CIPET जांच और SIT गठन की मांग तेज
इस पूरे प्रकरण में CIPET (सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ प्लास्टिक्स इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी) की जांच रिपोर्ट केंद्रीय बिंदु बन गई है। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि जब एक सरकारी संस्थान की जांच में सामग्री अमानक पाई गई तो फिर उन्हीं कंपनियों को काम देना किस आधार पर न्यायोचित है? इस मुद्दे पर राजनीतिक गलियारों में भी हलचल तेज हो गई है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) ने इस मुद्दे को विधानसभा सत्र में भी उठाने का संकेत दिया है। किसान नेता तारा सिंह मुंडा ने कहा कि यह लड़ाई केवल किसानों की नहीं बल्कि जनता के पैसे की लूट के खिलाफ है।
प्रदर्शन के अंत में एक ज्ञापन कृषि निदेशक को सौंपा गया जिसमें सभी मांगों का विस्तृत उल्लेख है। आयोजकों ने स्पष्ट किया कि यदि सात दिनों के भीतर सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा जिसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन और राज्य सरकार की होगी। इस कृषि निदेशालय का घेराव कार्यक्रम में झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा के प्रतिनिधियों ने भी अपनी भागीदारी सुनिश्चित की और आंदोलन को पूर्ण समर्थन देने की घोषणा की।



