नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी ने असम की नागांव लोकसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए देबाशीष शर्मा को अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है। शुक्रवार को पार्टी के केंद्रीय कार्यालय में प्रभारी तरुण चुग ने इस फैसले की जानकारी दी।
देबाशीष शर्मा: प्रशासनिक सेवा से सक्रिय राजनीति में
देबाशीष शर्मा असम कैडर के पूर्व आईएएस अधिकारी रहें हैं। उन्होंने लंबे समय तक प्रशासनिक सेवाओं में योगदान देने के बाद हाल ही में सरकारी नौकरी से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) ली है। इसके तुरंत बाद उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण करते हुए सक्रिय राजनीति में कदम रखा है। पार्टी नेतृत्व ने उनके प्रशासनिक अनुभव और जमीनी समझ को देखते हुए उन्हें नागांव जैसी महत्वपूर्ण सीट से मैदान में उतारने का निर्णय लिया है।
केंद्रीय चुनाव समिति ने लगाई मुहर
भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति (सीईसी) की बैठक में नौगांव लोकसभा क्षेत्र के लिए उनके नाम पर अंतिम मुहर लगी। तरुण चुग ने मीडिया को बताया कि समिति ने सर्वसम्मति से देबाशीष शर्मा की उम्मीदवारी को मंजूरी दी है। इस घोषणा के साथ ही असम की राजनीति में इस उपचुनाव को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एक पूर्व नौकरशाह को टिकट देकर भाजपा ने प्रशासनिक दक्षता और साफ-सुथरी छवि को प्राथमिकता देने का संकेत दिया है।
उपचुनाव का पूरा कार्यक्रम
निर्वाचन आयोग द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार इस उपचुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख इसी महीने की 16 तारीख तय की गई है। मतदान 6 अक्टूबर को होगा, जबकि मतगणना 9 अक्टूबर को की जाएगी। नामांकन पत्रों की जांच 17 तारीख को होगी और नाम वापस लेने की अंतिम तिथि 19 तारीख निर्धारित है। इस पूरे कार्यक्रम को देखते हुए सभी दलों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं।
नागांव सीट का राजनीतिक महत्व
नागांव लोकसभा सीट असम के मध्य भाग में स्थित है और यह राज्य की राजनीति में खासा दखल रखती है। यह सीट पूर्व में कांग्रेस का गढ़ मानी जाती रही है, लेकिन पिछले कुछ चुनावों में यहां भाजपा ने अपनी पैठ मजबूत की है। उपचुनाव की नौबत यहां के सांसद के निधन या पद छोड़ने के कारण आई है। ऐसे में दोनों प्रमुख दलों के लिए यह चुनाव प्रतिष्ठा का विषय बन गया है। भाजपा जहां अपनी जीत का सिलसिला बरकरार रखना चाहेगी, वहीं विपक्षी दल इस सीट को वापस पाने के लिए पूरी ताकत झोंकेंगे।
पूर्व आईएएस की उम्मीदवारी के मायने
देबाशीष शर्मा जैसे पूर्व आईएएस अधिकारी को उम्मीदवार बनाना भाजपा की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। प्रशासनिक सेवा में लंबा अनुभव रखने वाले शर्मा को जिले की भौगोलिक, सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों की गहरी समझ है। उन्होंने अपने सेवाकाल में असम के विभिन्न जिलों में महत्वपूर्ण पदों पर काम किया है। इस लिहाज से वे स्थानीय मुद्दों को न केवल समझते हैं, बल्कि उनके व्यावहारिक समाधान भी सुझा सकते हैं। पार्टी को उम्मीद है कि उनकी छवि मतदाताओं, खासकर मध्यम वर्ग और युवाओं को आकर्षित करेगी।
अन्य दलों की तैयारी
उधर, कांग्रेस और अन्य क्षेत्रीय दल भी अपने उम्मीदवारों के चयन में जुटे हैं। कांग्रेस के लिए यह सीट परंपरागत रूप से महत्वपूर्ण रही है। पार्टी किसी मजबूत स्थानीय नेता या पूर्व सांसद के परिवार के सदस्य पर दांव लगा सकती है। असम की क्षेत्रीय पार्टियां भी इस उपचुनाव में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने का प्रयास करेंगी। चुनावी मैदान में उम्मीदवारों की अंतिम सूची नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी।
चुनाव आयोग ने स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने के निर्देश दिए हैं। अर्धसैनिक बलों की तैनाती के साथ-साथ संवेदनशील बूथों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। मतदाता जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं ताकि अधिक से अधिक लोग अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह उपचुनाव असम में आगामी विधानसभा चुनावों का सेमीफाइनल साबित हो सकता है। इसके नतीजे राज्य में प्रमुख दलों की जमीनी ताकत का संकेत देंगे। भाजपा ने देबाशीष शर्मा पर भरोसा जताकर एक मजबूत दावेदार पेश किया है, लेकिन अंतिम फैसला जनता के हाथ में है।
अधिक जानकारी के लिए आप भारत निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट देख सकते हैं।



