नई दिल्ली: रक्षा मंत्रालय ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट 2025-26 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायु सेना की निर्णायक भूमिका को प्रमुखता से रेखांकित किया है। रिपोर्ट के अनुसार वायु सेना ने पूरे पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए, जिसमें नूर खान और रहीम यार खान एयर बेस जैसे रणनीतिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया। इसके साथ ही जवाबी ड्रोन और यूएवी हमलों के दौरान भारतीय हवाई क्षेत्र की सुरक्षा में भी वायु सेना ने अहम योगदान दिया।
ऑपरेशन सिंदूर में वायु सेना का पराक्रम
रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट में बताया गया है कि एक लेयर्ड एयर डिफेंस ग्रिड में स्वदेशी आकाश मिसाइल सिस्टम, पेचोरा और ओएसए-एके प्लेटफॉर्म को प्रभावी ढंग से तैनात किया गया था। इंटीग्रेटेड एयर कमांड और कंट्रोल सिस्टम ने रियल-टाइम कोऑर्डिनेशन को संभव बनाया, जिससे हवाई खतरों को बेअसर करने और पूरे संघर्ष के दौरान नेट-सेंट्रिक ऑपरेशन बनाए रखने में मदद मिली। यह ऑपरेशन वायु सेना की सामरिक क्षमता और स्वदेशी तकनीक पर भरोसे का प्रमाण है।
एस-400 ने रचा इतिहास
रिपोर्ट में सबसे लंबे समय तक जमीन से हवा में मार करने वाले विमानों का विशेष उल्लेख है। एस-400 यूनिट के एक ऑपरेशन में एक पाकिस्तानी स्पेशल मिशन एयरक्राफ्ट को 314 किलोमीटर की दूरी से सफलतापूर्वक निशाना बनाकर नष्ट कर दिया गया। इस ऑपरेशन से वायु सेना ने एयर डिफेंस के नियमों को फिर से लिखा। भारतीय रडार ने चुपचाप और बिना किसी गलती के खतरे को ट्रैक किया और लंबी दूरी की मिसाइल को उसकी दूर की सीमा तक गाइड किया। इस जरूरी ऑपरेशन ने दुश्मन को साबित कर दिया कि जमीन या हवा में कोई भी जगह वायु सेना के हमलों की पहुंच से बाहर नहीं है।
उत्तरी सीमा पर चीनी तैनाती में कमी
रक्षा मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर चीनी सेना की तैनाती में काफी कमी आने की बात कही गई है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत द्वारा एलएसी और ट्रेनिंग एरिया में 10 ब्रिगेड साइज की सेना तैनात करने के कदम के बाद उत्तरी बॉर्डर पर पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) की तैनाती में उल्लेखनीय गिरावट देखी गई है। वर्ष 2025 में उत्तरी मोर्चे पर पूरी स्थिति नियंत्रण में रही। अलग-अलग लड़ाकू ब्रांच जैसे पैदल सेना, टैंक, आर्टिलरी और एयर डिफेंस एक ही छत के नीचे स्वतंत्र रूप से और सबसे असरदार तरीके से लड़ने के लिए तैनात हैं।
भारत-चीन वार्ता से बनी सहमति
- मार्च और जुलाई 2025 में डब्ल्यूएमसीसी की 33वीं और 34वीं राउंड की बैठक के साथ नए सिरे से बातचीत हुई।
- भारत-चीन सीमा विवाद सुलझाने के लिए स्पेशल रिप्रेजेंटेटिव्स की बातचीत भी फिर से शुरू हुई, जिसके दो राउंड दिसंबर 2024 और अगस्त 2025 में हुए।
- दोनों देश दुश्मनी के बजाय पार्टनरशिप और शांति से मतभेदों को सुलझाने की प्रतिबद्धता चाहते हैं।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान द्विपक्षीय वार्ता हुई, जिसमें व्यापार घाटा कम करना, आतंकवाद जैसी चुनौतियों से निपटना और बहुपक्षीय मंच पर फेयर ट्रेड सुनिश्चित करना शामिल था। इस बैठक में एलएसी के मुद्दे पर कोई बात नहीं हुई।
जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा हालात
रिपोर्ट में कहा गया है कि सेना की लगातार कोशिशों की वजह से जम्मू एवं कश्मीर में सुरक्षा की स्थिति पूरी तरह से काबू में है। जनता ने विकास का रास्ता चुना है और सभी सरकारी और भारतीय सेना के कार्यों में सक्रिय रूप से हिस्सा ले रही है। इससे हिंसा का स्तर कम हुआ है, विरोध प्रदर्शन कम हुए हैं और पत्थरबाजी की कोई घटना नहीं हुई है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जम्मू-कश्मीर और लाइन ऑफ कंट्रोल (एलओसी) के पास हालात काफी बदल गए थे, लेकिन 10 एवं 12 मई 2025 को डीजीएमओ स्तर की बातचीत के बाद हालात काफी हद तक स्थिर हो गए हैं, हालांकि अनिश्चितता अभी भी बनी हुई है।
रक्षा मंत्रालय की यह वार्षिक रिपोर्ट भारत की रक्षा तैयारियों और कूटनीतिक सफलताओं का व्यापक दस्तावेज है। अधिक जानकारी के लिए रक्षा मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट देखें।



