नई दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मंगलवार को ईडी की छापेमारी करते हुए अमृत समूह से जुड़े 17 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। इस कार्रवाई में अमित गांगुली को गिरफ्तार भी किया गया है। यह कार्रवाई पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश से जुड़े दो अलग-अलग मामलों में की गई है।
ईडी की छापेमारी में अमृत समूह के निदेशक निशाने पर
कोलकाता क्षेत्रीय कार्यालय की टीम ने धनशोधन निवारण कानून (पीएमएलए) के तहत अमृत समूह की कंपनियों के निदेशकों और प्रवर्तकों के कोलकाता तथा इंदौर स्थित 17 आवासीय और कार्यालय परिसरों में तलाशी एवं जब्ती की कार्रवाई की। ईडी के अनुसार, अमृत समूह से जुड़ी कंपनियों और उनके निदेशकों ने विभिन्न जमा योजनाओं के नाम पर लोगों से बड़ी रकम जुटाई थी। निवेशकों को अधिक रिटर्न देने का भरोसा दिया गया, लेकिन कथित तौर पर वादे के मुताबिक राशि वापस नहीं की गई।
इसी जांच के सिलसिले में केसी दुजारी, काली किशोर बागची समेत अन्य निदेशकों और प्रवर्तकों से जुड़े परिसरों की तलाशी ली जा रही है। एजेंसी का कहना है कि इस दौरान कई अहम दस्तावेज और डिजिटल सबूत जब्त किए गए हैं, जिनकी जांच की जा रही है।
अमित गांगुली पर जमीन हड़पने और जालसाजी के आरोप
दूसरे मामले में ईडी ने अमित गांगुली को संपत्तियों पर कथित अवैध कब्जे, दस्तावेजों में हेरफेर और पावर ऑफ अटॉर्नी से जुड़ी अनियमितताओं के आरोप में गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी के मुताबिक, गांगुली ने अलग-अलग व्यक्तियों और संस्थाओं की संपत्तियों पर कथित तौर पर गैरकानूनी तरीके से नियंत्रण हासिल किया।
ईडी का आरोप है कि इसके लिए फर्जी बोर्ड प्रस्ताव, जाली हस्ताक्षर वाले बिक्री समझौते, कथित फर्जी दस्तावेज और विलेख तैयार करने तथा जमीन के रिकॉर्ड में हेरफेर जैसे तरीकों का इस्तेमाल किया गया। एजेंसी के अनुसार, कुछ मामलों में कथित झूठे दावों के आधार पर दीवानी मुकदमे भी दायर किए गए।
पश्चिम बंगाल पुलिस में दर्ज हैं 23 प्राथमिकी
जांच के दौरान पश्चिम बंगाल पुलिस में अमित गांगुली के खिलाफ दर्ज 23 प्राथमिकी का भी पता चला है। ईडी के मुताबिक, ये मामले संपत्तियों को कथित धोखाधड़ी और गैरकानूनी तरीके से हासिल करने तथा उनके लेनदेन से संबंधित हैं। एजेंसी ने कहा कि इन मामलों की जांच के जरिए संपत्तियों पर नियंत्रण हासिल करने के कथित तौर-तरीकों की पड़ताल की जा रही है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि पीएमएलए के तहत इस तरह की कार्रवाई वित्तीय अनियमितताओं पर अंकुश लगाने की दिशा में अहम कदम है। प्रवर्तन निदेशालय की आधिकारिक वेबसाइट पर भी इस संबंध में विस्तृत दिशानिर्देश उपलब्ध हैं।
निवेशकों के हितों की रक्षा प्राथमिकता
ईडी के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि अमृत समूह की जमा योजनाओं में फंसे निवेशकों के हितों की रक्षा जांच का मुख्य उद्देश्य है। एजेंसी जब्त दस्तावेजों का विश्लेषण कर रही है ताकि धन के लेन-देन का पूरा ब्योरा सामने आ सके। आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
इस बीच, अमृत समूह की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। मामले की जांच जारी है और ईडी जल्द ही अदालत में आरोपपत्र दाखिल कर सकती है।



