बेंगलुरु: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने आबकारी विभाग में कथित अनियमितताओं के सिलसिले में कर्नाटक के मंत्री सतीश जारकीहोली पर ईडी की छापेमारी बुधवार सुबह शुरू की, जिससे राज्य की राजनीति में हलचल मच गई है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, लोक निर्माण विभाग के मंत्री सतीश जारकीहोली से जुड़े बेलगावी, गोकाक और बेंगलुरु स्थित कई आवासों पर एक साथ तलाशी और जांच अभियान चलाया जा रहा है।
सतीश जारकीहोली पर ईडी की छापेमारी: मुख्य बिंदु
- स्थान: बेलगावी स्थित निजी आवास, गोकाक स्थित आवास, बेंगलुरु के डॉलर्स कॉलोनी स्थित आवास और सरकारी आवास।
- कारण: आबकारी विभाग में कथित अनियमितताएं और अवैध रूप से अर्जित धन के हस्तांतरण के आरोप।
- पिछली कार्रवाई: 24 जून को आबकारी विभाग के अतिरिक्त आयुक्त वाई. मंजूनाथ के ठिकानों पर छापेमारी हुई थी, जो मंत्री के बहनोई हैं।
- स्थिति: तलाशी अभियान अभी जारी है, दस्तावेजों और डिजिटल उपकरणों की जांच की जा रही है।
आबकारी विभाग में अनियमितताओं के आरोप
ईडी की यह कार्रवाई कर्नाटक आबकारी विभाग में कथित तौर पर हुए भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले से जुड़ी है। आरोप है कि विभाग में लाइसेंस आवंटन, शराब वितरण और राजस्व संग्रह में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की गई। जांच एजेंसी को शक है कि इस कथित घोटाले की रकम का एक हिस्सा प्रभावशाली लोगों तक पहुंचाया गया। इसी कड़ी में मंत्री के रिश्तेदार और विभाग के वरिष्ठ अधिकारी वाई. मंजूनाथ के ठिकानों पर पिछले महीने छापेमारी की गई थी।
वाई. मंजूनाथ से कनेक्शन
वाई. मंजूनाथ, जो सतीश जारकीहोली की बहन के पति हैं, आबकारी विभाग में अतिरिक्त आयुक्त के पद पर तैनात थे। 24 जून को ईडी ने उनके बेलगावी के हनुमान नगर स्थित आवास, बेंगलुरु के रेसकोर्स रोड स्थित फ्लैट, मैसूरु और हरपनहल्ली समेत छह स्थानों पर तलाशी ली थी। सूत्रों के मुताबिक, उस छापेमारी में मिले अहम दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर ही मंत्री के ठिकानों पर कार्रवाई का दायरा बढ़ाया गया है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और आगे की राह
कर्नाटक में सत्तारूढ़ दल और विपक्ष ने इस छापेमारी पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। सत्तारूढ़ गठबंधन के नेताओं ने इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया है, जबकि विपक्षी दलों ने निष्पक्ष जांच की मांग की है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि ईडी की कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत की जा रही है, जिसमें संपत्ति कुर्की और गिरफ्तारी के प्रावधान हैं।
मंत्री सतीश जारकीहोली ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन उनके करीबी सूत्रों का कहना है कि वे जांच में पूरा सहयोग करेंगे। कर्नाटक उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता ईडी की शक्तियों का हवाला देते हुए बताते हैं कि एजेंसी के पास समन जारी करने, दस्तावेज जब्त करने और आरोपियों को हिरासत में लेने का अधिकार होता है।
आम जनता पर असर
इस तरह की हाई-प्रोफाइल छापेमारी से प्रशासनिक तंत्र में भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस का संदेश जाता है। हालांकि, लंबी कानूनी प्रक्रिया के चलते अंतिम नतीजे आने में वक्त लग सकता है। नागरिक समाज के कार्यकर्ताओं का कहना है कि ऐसी कार्रवाइयों से व्यवस्था में पारदर्शिता आती है, बशर्ते जांच निष्पक्ष और समयबद्ध हो।
फिलहाल, ईडी के अधिकारी जब्त दस्तावेजों का विश्लेषण कर रहे हैं और आने वाले दिनों में कुछ और लोगों को पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है। इस मामले पर राजनीतिक गलियारों के साथ-साथ आम जनता की भी नजर बनी हुई है।



