रांची: मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन से आज कांके रोड रांची स्थित मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय में आदिवासी एकता महाजुटान रैली के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री को प्रतिनिधिमंडल में शामिल सदस्यों ने आगामी 30 अगस्त 2026 को मोरहाबादी मैदान, राँची में आयोजित होने वाले “आदिवासी एकता महाजुटान रैली” में मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित होने हेतु सादर आमंत्रित किया।
आदिवासी एकता महाजुटान रैली का उद्देश्य और महत्व
मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन को प्रतिनिधिमंडल ने अवगत कराया कि झारखण्ड में आदिवासी समाज के राजनीतिक प्रतिनिधित्व, संवैधानिक अधिकारों, अस्तित्व, पहचान एवं सामाजिक हितों की रक्षा के उद्देश्य से यह आदिवासी एकता महाजुटान रैली आयोजित की जा रही है। इस रैली का लक्ष्य आदिवासी समुदाय के विभिन्न मुद्दों पर एकजुटता प्रदर्शित करना और सरकार के समक्ष अपनी मांगों को मजबूती से रखना है। झारखंड गठन के बाद से ही आदिवासी अस्मिता और अधिकारों की रक्षा यहां की राजनीति का केंद्रीय विषय रहा है। इस रैली को उसी कड़ी में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख सदस्य
मुलाकात के दौरान प्रतिनिधिमंडल में श्री शशि पन्ना, श्री अजय तिर्की, श्रीमती रमा खलखो, श्री अनिल पन्ना, सुश्री ज्योत्सना केरकेट्टा, श्री शिवा कच्छप, श्री अनिल उरांव, श्री पुष्कर बड़ाईक सहित अन्य गणमान्य सदस्य उपस्थित रहे। इन सदस्यों ने मुख्यमंत्री को रैली की तैयारियों और रूपरेखा से भी अवगत कराया। प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि रैली में राज्य भर के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोगों के जुटने की संभावना है। इसके लिए जिला स्तर पर जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है।
मोरहाबादी मैदान: ऐतिहासिक साक्षी
रांची स्थित मोरहाबादी मैदान झारखंड के आंदोलन और बड़ी रैलियों का ऐतिहासिक गवाह रहा है। झारखंड अलग राज्य आंदोलन के दौरान भी इस मैदान में विशाल जनसभाएं हुई थीं। 30 अगस्त 2026 को होने वाली इस रैली के लिए भी यही मैदान चुना गया है, जो इसकी भव्यता और अपेक्षित भीड़ को दर्शाता है। प्रशासनिक स्तर पर भी इतनी बड़ी रैली के लिए सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के इंतजाम अभी से चर्चा का विषय बने हुए हैं।
झारखंड में आदिवासी राजनीति का परिदृश्य
झारखंड की राजनीति में आदिवासी समाज एक निर्णायक भूमिका निभाता रहा है। संविधान की पांचवीं अनुसूची, पेसा कानून, सरना धर्म कोड, स्थानीय नीति और नियोजन नीति जैसे मुद्दे लगातार विमर्श के केंद्र में रहते हैं। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन स्वयं आदिवासी समुदाय से आते हैं और उनकी सरकार पर इन मुद्दों को लेकर ठोस कदम उठाने का दबाव लगातार बना रहता है। इस रैली को आदिवासी समाज की ओर से सरकार को अपनी शक्ति का अहसास कराने और लंबित मांगों को पूरा कराने के दबाव के रूप में भी देखा जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2026 का समय चुनावी दृष्टिकोण से भी अहम होगा। ऐसे में आदिवासी एकता महाजुटान रैली का आयोजन राजनीतिक दलों के लिए भी एक स्पष्ट संकेत होगा कि आदिवासी मतदाता अपने अधिकारों को लेकर कितने सजग और संगठित हैं। मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को ध्यानपूर्वक सुना और रैली के उद्देश्यों की सराहना करते हुए उचित सहयोग का आश्वासन दिया है।
संवैधानिक अधिकारों की रक्षा पर जोर
प्रतिनिधिमंडल ने विशेष रूप से संवैधानिक अधिकारों की रक्षा पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जल, जंगल, जमीन आदिवासी जीवन का आधार हैं और इनकी रक्षा के लिए संविधान में विशेष प्रावधान किए गए हैं। लेकिन धरातल पर इन प्रावधानों का क्रियान्वयन एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। रैली के माध्यम से इन्हीं मुद्दों को जन-जन तक पहुंचाने और सरकार का ध्यान आकृष्ट कराने का प्रयास किया जाएगा। सरना धर्म कोड को जनगणना में अलग कॉलम के रूप में शामिल कराने की मांग भी इस रैली के प्रमुख एजेंडे में शामिल है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय का माहौल गंभीर किंतु उत्साहपूर्ण रहा। प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने मुख्यमंत्री को पारंपरिक पगड़ा और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित भी किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि आदिवासी समाज की एकता और उनके अधिकारों की रक्षा राज्य सरकार की प्राथमिकता में शामिल है। उन्होंने रैली के सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएं दीं।
आयोजकों का दावा है कि इस रैली में झारखंड के अलावा पड़ोसी राज्यों बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती इलाकों से भी आदिवासी प्रतिनिधि भाग लेंगे। इससे रैली का दायरा राष्ट्रीय स्तर का हो जाएगा। अधिक जानकारी के लिए आप हेमन्त सोरेन के विकिपीडिया पृष्ठ पर उनके राजनीतिक सफर के बारे में पढ़ सकते हैं।
अंत में प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया और रैली की तैयारियों में तेजी लाने की बात कही। यह मुलाकात झारखंड की वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में आदिवासी समाज की बढ़ती सक्रियता को स्पष्ट रूप से दर्शाती है। आने वाले महीनों में रैली की तैयारियां जोर पकड़ेंगी और यह आयोजन राज्य की राजनीति में एक नया अध्याय लिखेगा।



