रांची: मुंडा समाज के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात कर ऑनलाइन खतियान में जाति सुधार की मांग उठाई है। यह मुलाकात शुक्रवार को कांके रोड स्थित मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय में हुई। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को एक गंभीर प्रशासनिक त्रुटि से अवगत कराया जिससे तमाड़ विधानसभा क्षेत्र के सैकड़ों ग्रामीण प्रभावित हो रहे हैं।
क्या है पूरा मामला
प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को बताया कि तमाड़ विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत बुंडू अंचल की छह पंचायतों के 18 गांवों के ऑनलाइन खतियान में जाति के कॉलम में गड़बड़ी है। इन गांवों के निवासियों की जाति ‘मुंडा’ होने के बावजूद सरकारी रिकॉर्ड में ‘स्वासी’ अंकित कर दिया गया है। इस क्लेरिकल एरर के कारण संबंधित ग्रामीणों को जाति प्रमाण पत्र बनवाने, सरकारी योजनाओं का लाभ लेने और शैक्षणिक संस्थानों में नामांकन कराने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
ऑनलाइन खतियान में जाति सुधार को लेकर मुख्यमंत्री का आश्वासन
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को धैर्यपूर्वक सुना। उन्होंने माना कि खतियान जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज में जाति का गलत अंकन गंभीर चिंता का विषय है। मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि इस मामले में नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की दिशा में त्वरित पहल की जाएगी। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित करने की बात कही ताकि रिकॉर्ड में ‘स्वासी’ के स्थान पर सही जाति ‘मुंडा’ दर्ज हो सके।
विधायक विकास मुंडा भी रहे मौजूद
इस मुलाकात के दौरान तमाड़ विधायक श्री विकास मुंडा भी उपस्थित रहे। विधायक ने भी ग्रामीणों की समस्या को प्रमुखता से मुख्यमंत्री के समक्ष रखा। उन्होंने कहा कि यह त्रुटि वर्षों से चली आ रही है और इसके कारण मुंडा समाज के लोगों को उनके संवैधानिक अधिकारों से वंचित होना पड़ रहा है। विधायक की उपस्थिति से प्रतिनिधिमंडल का मनोबल बढ़ा और मामले के शीघ्र समाधान की उम्मीद जगी है।
प्रभावित गांव और पंचायतें
- बुंडू अंचल की छह पंचायतें इस त्रुटि से प्रभावित हैं।
- कुल 18 गांवों के खतियान में जाति कॉलम गलत है।
- ग्रामीण लंबे समय से इस सुधार के लिए कार्यालयों का चक्कर लगा रहे थे।
प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि ऑनलाइन प्रणाली लागू होने के बाद जब खतियान डिजिटल हुए तब यह त्रुटि सामने आई। पहले मैनुअल रिकॉर्ड में किसी तरह काम चल जाता था, लेकिन अब ऑनलाइन सत्यापन के दौर में ‘स्वासी’ जाति दर्ज होने से सिस्टम ‘मुंडा’ जाति को मान्यता नहीं दे रहा है। इससे छात्रवृत्ति, नौकरी में आरक्षण और अन्य कल्याणकारी योजनाओं में बाधा उत्पन्न हो रही है।
प्रशासनिक प्रक्रिया और आगे की राह
जानकारों के अनुसार खतियान में सुधार की एक निर्धारित प्रशासनिक प्रक्रिया होती है। इसमें अंचल अधिकारी की जांच रिपोर्ट, उपायुक्त की अनुशंसा और फिर राजस्व विभाग की स्वीकृति शामिल होती है। मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद अब इस प्रक्रिया में तेजी आने की संभावना है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि जल्द ही उनके रिकॉर्ड दुरुस्त होंगे।
झारखंड सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर भी भूमि सुधार और खतियान से संबंधित जानकारियां उपलब्ध हैं। अधिक जानकारी के लिए आप झारखंड सरकार का आधिकारिक पोर्टल देख सकते हैं।
समाज में खुशी की लहर
मुख्यमंत्री से मिले सकारात्मक आश्वासन के बाद मुंडा समाज के लोगों में खुशी की लहर है। प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने कहा कि मुख्यमंत्री ने उनकी पीड़ा को समझा और ठोस कार्रवाई का भरोसा दिलाया। अब सभी की निगाहें प्रशासनिक अमले पर टिकी हैं कि कब तक इस वर्षों पुरानी त्रुटि को सुधारा जाता है।



