नई दिल्ली: क्वांटो एग्रोवर्ल्ड आईपीओ ने अपने निवेशकों को पहले ही दिन बड़ा झटका दिया जब इसके शेयर बीएसई एसएमई प्लेटफॉर्म पर कमजोर लिस्टिंग के बाद सीधे लोअर सर्किट पर पहुंच गए। आईपीओ प्राइस 67 रुपये के मुकाबले शेयर मात्र 66.99 रुपये पर लिस्ट हुआ और कुछ ही मिनटों में 5 प्रतिशत गिरकर 63.65 रुपये के लोअर सर्किट लेवल पर अटक गया।
लिस्टिंग के दिन क्या हुआ
सोमवार 22 सितंबर को क्वांटो एग्रोवर्ल्ड आईपीओ की लिस्टिंग उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। बाजार खुलते ही बिकवाली का दबाव दिखा और शेयर अपने इश्यू प्राइस से नीचे चला गया। लगातार बिकवाली के चलते स्टॉक एक्सचेंज को इसमें लोअर सर्किट लगाना पड़ा। इस तरह पहले दिन के कारोबार में ही निवेशकों को प्रति शेयर 3.35 रुपये यानी करीब 5 फीसदी का नुकसान उठाना पड़ा। बाजार जानकारों का मानना है कि कमजोर सब्सक्रिप्शन और ग्रे मार्केट में प्रीमियम न होने का असर लिस्टिंग पर दिखा।
आईपीओ सब्सक्रिप्शन का हाल
कंपनी का 500 करोड़ रुपये का आईपीओ 15 से 17 सितंबर के बीच खुला था। इसे निवेशकों से फीका रिस्पॉन्स मिला और ओवरऑल यह 1.39 गुना ही सब्सक्राइब हो सका। नॉन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (एनआईआई) का पोर्शन 1.66 गुना भरा, लेकिन रिटेल निवेशकों का हिस्सा सिर्फ 79 प्रतिशत सब्सक्राइब हुआ। आईपीओ के तहत 10 रुपये फेस वैल्यू वाले 46.30 लाख नए शेयर जारी किए गए थे। जुटाई गई रकम का इस्तेमाल महाराष्ट्र के रावरगांव में डिस्टिलेशन प्लांट लगाने, नए फार्म खरीदने, वर्किंग कैपिटल, कर्ज चुकाने और सामान्य कॉरपोरेट कामकाज में होगा।
क्वांटो एग्रोवर्ल्ड आईपीओ का वित्तीय विश्लेषण
सेबी के पास जमा रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (आरएचपी) के अनुसार कंपनी की वित्तीय सेहत में लगातार सुधार दिख रहा है। वित्त वर्ष 2023-24 में शुद्ध लाभ 5.37 करोड़ रुपये था, जो 2024-25 में बढ़कर 6.63 करोड़ और 2025-26 में 8.38 करोड़ रुपये हो गया। राजस्व भी 2023-24 के 15.56 करोड़ से बढ़कर 2024-25 में 16.49 करोड़ और 2025-26 में 40.35 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। ईबीआईटीडीए इसी अवधि में 7.37 करोड़ से 9.28 करोड़ और फिर 11.92 करोड़ रुपये हो गया।
कर्ज और नेटवर्थ की स्थिति
हालांकि मुनाफे के साथ कंपनी पर कर्ज का बोझ भी बढ़ा है। 2023-24 के अंत में कुल कर्ज 3.70 करोड़ था, जो 2024-25 में 5.30 करोड़ और 2025-26 में 5.48 करोड़ रुपये हो गया। नेटवर्थ इस दौरान 19.01 करोड़ से बढ़कर 25.62 करोड़ और फिर 33.98 करोड़ रुपये हो गई। रिजर्व और सरप्लस भी 6.15 करोड़ से 12.77 करोड़ और 21.12 करोड़ रुपये पर पहुंच गए। ये आंकड़े दिखाते हैं कि कंपनी ग्रोथ तो कर रही है, लेकिन कर्ज पर निर्भरता भी बढ़ रही है।
निवेशकों के लिए सबक
एसएमई आईपीओ में निवेश करते समय सब्सक्रिप्शन लेवल, ग्रे मार्केट प्रीमियम और कंपनी के फंडामेंटल्स का गहन विश्लेषण जरूरी है। क्वांटो एग्रोवर्ल्ड आईपीओ का मामला बताता है कि मजबूत वित्तीय आंकड़ों के बावजूद कमजोर डिमांड लिस्टिंग लाभ को नुकसान में बदल सकती है। निवेशकों को लिस्टिंग गेन के लालच में बगैर रिसर्च के पैसा नहीं लगाना चाहिए। बीएसई एसएमई प्लेटफॉर्म पर लिस्टेड कंपनियों की लिक्विडिटी अक्सर कम होती है, जिससे एग्जिट मुश्किल होता है।
अब देखना होगा कि आने वाले सत्रों में क्वांटो एग्रोवर्ल्ड के शेयर किस दिशा में जाते हैं। अगर कंपनी अपने प्लांट विस्तार और कर्ज कटौती की योजना को समय पर पूरा करती है तो लंबी अवधि में रिटर्न मिल सकता है, लेकिन छोटी अवधि में अस्थिरता बने रहने के आसार हैं।



