रांची: झारखंड की राजधानी रांची में कोतवाली के समीप हुए रांची पानी टंकी हादसा ने एक बार फिर निर्माण मजदूरों की सुरक्षा और उनके अधिकारों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गत 9 सितंबर को कोतवाली थाना क्षेत्र के निकट पानी की विशाल टंकी अचानक ढह जाने से कई मजदूरों की दर्दनाक मौत हो गई थी, जबकि अनेक मजदूर गंभीर रूप से घायल हुए हैं। इस दुखद घटना के बाद मृतकों के परिजनों और घायलों को उचित मुआवजा, न्याय दिलाने एवं दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग को लेकर झारखंड निर्माण मजदूर यूनियन (सम्बंध- ऐकटू) ने अपना आंदोलन तेज करने का एलान किया है।
यूनियन ने दी आंदोलन तेज करने की चेतावनी
यूनियन के नेता भीम साहू, रमेश रवि और मंजू देवी ने संयुक्त बयान जारी कर कहा है कि किसी भी हालत में इस गंभीर मसले को रफा-दफा करने की ठेकेदारों और जिम्मेदार अधिकारियों की कोशिश को सफल नहीं होने दिया जाएगा। नेताओं का आरोप है कि हादसे के बाद से ही जिम्मेदार पक्ष लीपापोती में लगे हैं, लेकिन मजदूर संगठन चुप नहीं बैठेंगे। यूनियन ने स्पष्ट किया है कि जब तक मृतक आश्रितों को सम्मानजनक मुआवजा नहीं मिल जाता और घायलों का समुचित इलाज सुनिश्चित नहीं हो जाता, तब तक संघर्ष जारी रहेगा। साथ ही दोषी ठेकेदारों और लापरवाह अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज कर उनकी गिरफ्तारी की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई है।
भाकपा माले ने सरकार की नीतियों पर उठाए सवाल
झारखंड निर्माण मजदूर यूनियन के साथ-साथ भाकपा माले ने भी झारखंड में लगातार हो रही औद्योगिक दुर्घटनाओं में मजदूरों की मौत की घटनाओं पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के नाम पर मालिकों और ठेकेदारों को दी जा रही मनमानी छूट ही इन जानलेवा दुर्घटनाओं के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार है। श्रम कानूनों में ढील और सुरक्षा मानकों की अनदेखी ने मजदूरों की जिंदगी को खतरे में डाल दिया है। भाकपा माले ने मांग की है कि सरकार अविलंब श्रम सुरक्षा मानकों को सख्ती से लागू करे और लापरवाही बरतने वाले प्रतिष्ठानों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करे। अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के मानकों के अनुसार भी कार्यस्थल पर सुरक्षा मौलिक अधिकार है, जिसका पालन अनिवार्य होना चाहिए।
रांची पानी टंकी हादसा: यूनियन की प्रमुख मांगें
झारखंड निर्माण मजदूर यूनियन ने प्रशासन और सरकार के समक्ष निम्नलिखित मांगें रखी हैं:
- मृतक मजदूरों के परिजनों को अविलंब 20-20 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए।
- घायल मजदूरों का निःशुल्क और बेहतर इलाज सरकारी खर्च पर कराया जाए तथा उन्हें 5-5 लाख रुपये की सहायता राशि दी जाए।
- हादसे के लिए जिम्मेदार ठेकेदार, कंपनी और संबंधित विभाग के लापरवाह अधिकारियों पर गैर इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज हो।
- भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सभी निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों (Safety Norms) का कड़ाई से पालन कराया जाए।
- मजदूरों का बीमा (Insurance) और भविष्य निधि (PF) की सुविधा अनिवार्य रूप से लागू हो।
13 सितंबर को रांची में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन
यूनियन द्वारा लिए गए निर्णय के अनुसार, आगामी 13 सितंबर को रांची में दुर्घटनाओं में मारे गए मजदूरों की याद में एक विशाल श्रद्धांजलि सभा आयोजित की जायेगी। इस सभा के माध्यम से दिवंगत साथियों को श्रद्धांजलि देने के साथ-साथ आंदोलन की आगे की रणनीति तय की जाएगी। यूनियन के निवेदक मो. नसीम अंसारी ने तमाम मजदूर साथियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और न्यायपसंद नागरिकों से इस सभा में अधिक से अधिक संख्या में भाग लेने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई केवल मुआवजे की नहीं, बल्कि मजदूरों के मान-सम्मान और सुरक्षित जीवन के अधिकार की लड़ाई है।
श्रम सुरक्षा के मोर्चे पर चिंताजनक तस्वीर
झारखंड जैसे खनिज संपदा से भरपूर राज्य में निर्माण और खनन क्षेत्र में लगे लाखों मजदूर रोजाना जान जोखिम में डालकर काम करते हैं। बीते कुछ वर्षों में देखा गया है कि सुरक्षा उपकरणों के अभाव, प्रशिक्षण की कमी और ठेका प्रथा की आड़ में श्रम कानूनों के खुले उल्लंघन के कारण दुर्घटनाओं का ग्राफ बढ़ा है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक ठेका मजदूरों को नियमित कर्मचारियों के बराबर सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा की गारंटी नहीं दी जाती, तब तक ऐसे हादसे रुकने वाले नहीं हैं। व्यावसायिक सुरक्षा और स्वास्थ्य के वैश्विक मानकों को अपनाए बिना मजदूरों की जिंदगी बचाना मुश्किल है।
इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि विकास के दावों के बीच मेहनतकश वर्ग की सुरक्षा हाशिये पर है। यूनियन का साफ कहना है कि मजदूरों की लाश पर विकास की इमारत खड़ी नहीं होने दी जाएगी। 13 सितंबर की श्रद्धांजलि सभा इस संघर्ष का एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित होगी।



