टंडवा एनटीपीसी प्लांट में बिजली उत्पादन आधा
अधिकारियों के तबादले के बाद भी हालात में अपेक्षित सुधार नहीं
चतरा: टंडवा स्थित एनटीपीसी के नॉर्थ करनपुरा पावर प्लांट में बिजली उत्पादन निर्धारित क्षमता से काफी कम होने और फ्लाई ऐश से डेक के भर जाने का मामला एक बार फिर चर्चा में है। बताया जा रहा है कि परियोजना की स्थिति को लेकर केंद्रीय स्तर पर अधिकारियों की ओर से लगातार सख्त संदेश दिए जा रहे हैं। पिछले दिनों एचओपी आलोक त्रिपाठी समेत अन्य अधिकारियों के स्थानांतरण के बाद परियोजना की स्थिति में सुधार की उम्मीद जताई गई थी। हालांकि अधिकारियों के स्थानांतरण और नए पदस्थापन के बावजूद परियोजना में अपेक्षित सुधार नहीं होने की बात सामने आ रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, नॉर्थ करनपुरा परियोजना की तीनों इकाइयों की कुल निर्धारित क्षमता 1980 मेगावाट है, जबकि वर्तमान में करीब 1000 मेगावाट ही बिजली उत्पादन होने का दावा किया जा रहा है। इससे परियोजना की उत्पादन क्षमता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। वहीं आरोप है कि परियोजना प्रबंधन की कथित लापरवाही के कारण प्लांट को प्रतिदिन निर्धारित मात्रा में कोयला नहीं मिल पा रहा है। बताया जा रहा है कि जहां करीब 30 हजार टन प्रतिदिन कोयले की आवश्यकता है, वहीं वर्तमान में महज 10 से 15 हजार टन कोयले की ही आपूर्ति हो रही है। हालांकि, इन आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। कोयले की कथित कमी और कम बिजली उत्पादन के कारण केंद्र सरकार को राजस्व का नुकसान होने का भी दावा किया जा रहा है। साथ ही फ्लाई ऐश के डेक में जमा होने की समस्या ने परियोजना प्रबंधन के समक्ष एक और चुनौती खड़ी कर दी है। छात्र नेता उमेश प्रसाद ने मामले में जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि परियोजना के संचालन में लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सरकार को सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। फिलहाल परियोजना की उत्पादन क्षमता, कोयला आपूर्ति और फ्लाई ऐश प्रबंधन को लेकर आधिकारिक स्थिति स्पष्ट होना बाकी है। ऐसे में संबंधित अधिकारियों के आधिकारिक पक्ष के बाद ही स्थिति की पूरी तस्वीर सामने आ सकेगी।



