गरहरा: बेगूसराय जिले के गरहरा स्थित गंगा ब्रिज रेलवे कॉलोनी में शारदीय नवरात्रि के दौरान बंगाली पद्धति से पूजा का आयोजन दशकों से अनवरत जारी है। यह परंपरा गंगा नदी पर रेल पुल के निर्माण काल से जुड़ी हुई है, जब बंगाली श्रमिकों और अभियंताओं ने इस मंडप की स्थापना की थी। आज भी यह आयोजन क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत का अटूट हिस्सा बना हुआ है, जहां सैकड़ों श्रद्धालु मां दुर्गा का आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं।
निर्माण काल से जुड़ा है बंगाली पद्धति से पूजा का इतिहास
आयोजन समिति के सचिव जीवानंद मिश्रा ने बताया कि गंगा ब्रिज के निर्माण काल में ही तत्कालीन बंगाली समुदाय के लोगों ने इस पूजा मंडप की नींव रखी थी। उस दौर में टी के लहरी, एस के पैट, सपन विश्वास, तिमि बनर्जी और लिली बनर्जी जैसे गणमान्य व्यक्तियों के सक्रिय सहयोग से यह सिलसिला शुरू हुआ जो आज तक बदस्तूर जारी है। इस आयोजन ने गरहरा की पहचान एक विशिष्ट सांस्कृतिक केंद्र के रूप में स्थापित की है।
दो दिवसीय विशेष अनुष्ठान का रहता है विधान
समिति के अनुसार नवरात्रि के दौरान यहां दो दिनों का विशेष कार्यक्रम निर्धारित होता है। सोमवार को मां का पट्ट खुलने के साथ भोग प्रसाद का वितरण होता है। वहीं मंगलवार को हवन और आरती का भव्य आयोजन किया जाता है। इस क्रमबद्ध विधान का पालन वर्षों से पूरी निष्ठा के साथ किया जा रहा है, जिसमें स्थानीय निवासियों के साथ रेलवे कर्मचारी भी बढ़-चढ़कर भाग लेते हैं।
विद्वान आचार्यों द्वारा संपन्न कराया जाता है अनुष्ठान
इस धार्मिक अनुष्ठान को विधि-विधान से संपन्न कराने का दायित्व व्रती सतीश कुमार पंडित तथा आचार्य गोविंद कुमार मिश्र निभा रहे हैं। उनके मंत्रोच्चार और मार्गदर्शन में पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाता है। आचार्य द्वय की देखरेख में हवन कुंड में आहुतियां दी जाती हैं, जिससे वातावरण शुद्ध और पवित्र बना रहता है।
आयोजन समिति एवं संरक्षक मंडल की सक्रिय भूमिका
इस भव्य आयोजन को सुचारू रूप से चलाने के लिए एक सशक्त समिति कार्यरत है। मंडप संरक्षक मंडल में अवधेश कुमार सिंह, राजेश कुमार रॉय, मनोज कुमार सिंह, रणवीर यादव, आलोक शर्मा शामिल हैं। समिति के अध्यक्ष जितेंद्र कुमार राम (थानाध्यक्ष गरहरा) एवं कोषाध्यक्ष राजेश कुमार रॉय के नेतृत्व में शशिकांत, रानू पांडे, शानू पांडे, नरेश पासवान, सन्नी रॉय, मनीष कुमार, अभिषेक कुमार, संजय राय, संतोष कुमार, पंकज कुमार राकेश, विनोद कुमार दीक्षित, सोनू झा आदि सदस्य दिन-रात सेवा में लगे रहते हैं।
महिला भक्त मंडली का अमूल्य योगदान
पूजा की व्यवस्था से लेकर भोग वितरण तक में महिला भक्त मंडली की भूमिका सराहनीय रहती है। वंदना मिश्रा, खुशबू सिन्हा, अमृता देवी, कुंदन देवी समेत अनेक महिलाएं पूजा अर्चना में सहयोग कर मातृशक्ति की उपस्थिति दर्ज कराती हैं। इनके समर्पण से आयोजन की गरिमा और बढ़ जाती है।
गरहरा रेलवे कॉलोनी की यह परंपरा सामाजिक सौहार्द और सांस्कृतिक एकता की मिसाल है। रेलवे के इतिहास के पन्नों में दर्ज यह पूजा आज भी अपनी मूल आत्मा के साथ जीवंत है। अधिक जानकारी के लिए आप दुर्गा पूजा का इतिहास विकिपीडिया पर पढ़ सकते हैं।



