कोलकाता: नंदीग्राम में भाजपा का बड़ा दांव चलते हुए पार्टी ने पूर्वी मेदिनीपुर जिले की इस चर्चित विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए हासिरानी रथ को अपना उम्मीदवार घोषित किया है। चंद्रनाथ रथ की मई माह में हुई हत्या के बाद उनकी मां को टिकट देकर भाजपा ने सहानुभूति लहर को भुनाने का प्रयास किया है। इस घोषणा के साथ ही नंदीग्राम का सियासी पारा चढ़ गया है।
नंदीग्राम में भाजपा का बड़ा दांव: हासिरानी रथ की उम्मीदवारी का राजनीतिक अर्थ
भाजपा ने नंदीग्राम के अलावा मुर्शिदाबाद जिले की रेजीनगर सीट से शाखारव सरकार को मैदान में उतारा है। हासिरानी रथ भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी के पूर्व निजी सहायक रहे चंद्रनाथ रथ की मां हैं। चंद्रनाथ लंबे समय तक शुभेंदु अधिकारी के करीबी माने जाते थे और पार्टी संगठन में सक्रिय भूमिका निभाते थे। 41 वर्षीय चंद्रनाथ पूर्वी मेदिनीपुर के चांदपुर के रहने वाले थे। राजनीति में आने से पहले उन्होंने करीब दो दशक तक भारतीय वायुसेना में सेवा की थी और रहड़ा रामकृष्ण मिशन से शिक्षा प्राप्त की थी। उनके परिवार के अनुसार वे रामकृष्ण मिशन के विचारों से प्रभावित थे।
चंद्रनाथ रथ की हत्या और उसके बाद की सियासत
मई में चंद्रनाथ रथ की हत्या ने इलाके में सनसनी फैला दी थी। भाजपा ने इस घटना को राजनीतिक हिंसा करार देते हुए तृणमूल कांग्रेस पर आरोप लगाए थे। अब उनकी मां को उम्मीदवार बनाकर पार्टी ने न सिर्फ परिवार के प्रति संवेदना जताई है, बल्कि कार्यकर्ताओं में संदेश देने की कोशिश की है कि पार्टी अपने साथियों के बलिदान को व्यर्थ नहीं जाने देती। शुभेंदु अधिकारी ने इस फैसले को “शहीद के परिवार को सम्मान” बताया है।
तृणमूल कांग्रेस के बागी गुट ने बढ़ाई चुनौती
उधर, ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस के बागी गुट ने नंदीग्राम से मोहम्मद एतेशामुल हक और रेजीनगर से सफीउद्दीन शेख को प्रत्याशी बनाकर मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है। बताया जा रहा है कि 2026 के विधानसभा चुनाव में टीएमसी की हार के बाद पार्टी के भीतर मतभेद खुलकर सामने आए थे। बागी गुट के लिए यह पहला बड़ा चुनावी इम्तिहान माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि टीएमसी के वोट बैंक में सेंध लगने से भाजपा को फायदा हो सकता है।
रेजीनगर सीट पर भी भाजपा ने उतारा प्रत्याशी
नंदीग्राम के साथ-साथ रेजीनगर सीट पर भी उपचुनाव होने हैं। भाजपा ने यहां से शाखारव सरकार को टिकट दिया है। वहीं टीएमसी बागी गुट ने सफीउद्दीन शेख को मैदान में उतारा है। इस सीट पर अल्पसंख्यक मतदाताओं की अच्छी संख्या है, जिसके चलते मुकाबला दिलचस्प होने के आसार हैं। दोनों सीटों पर मतदान की तारीखों की घोषणा जल्द होने की संभावना है।
नंदीग्राम का राजनीतिक इतिहास बेहद अहम रहा है। 2007 में भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन के बाद यह सीट बंगाल की सियासत का केंद्र बनी थी। शुभेंदु अधिकारी ने 2021 के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी को इसी सीट से हराया था। अब उपचुनाव में भाजपा की रणनीति पर सबकी निगाहें टिकी हैं। पार्टी को उम्मीद है कि सहानुभूति और संगठनात्मक ताकत के बल पर वह यह सीट बरकरार रखने में कामयाब होगी।
चुनाव आयोग जल्द ही उपचुनाव का विस्तृत कार्यक्रम जारी कर सकता है। तब तक सभी दल अपनी-अपनी रणनीति को धार देने में जुट गए हैं। नंदीग्राम और रेजीनगर के नतीजे 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले बंगाल की राजनीतिक दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।



