महाबैठक का आयोजन किया गया
झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष बंधु तिर्की ने कांग्रेस भवन में संवाददाता सम्मेलन में संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्र सरकार अनुसूचित जनजाति अनुसूचित जाति की दुहाई देती है लेकिन हकीकत यह है कि भारतीय जनता पार्टी इन दोनों समुदायों को अपना वोट बैंक समझती है। अनुसूचित जाति और जनजाति समुदायों को संविधान के तहत जो अधिकार प्राप्त हैं उससे उन्हें मरहूम किया जा रहा है ट्राइबल सब प्लान के बजट में भारी कटौती हो रही है, अनुसूचित जनजातियों के छात्र-छात्राओं को प्री मैट्रिक एवं पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति में भारत सरकार का हिस्सा कभी भी राज्य को समय पर नहीं मिलता है।
उन्होंने कहा कि देश में 34 योजनाएं अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जाति के विकास और उत्थान के लिए चल रही है लेकिन केंद्र सरकार की नीतियों के कारण इन समुदायों के छात्र अपने अधिकारों से वंचित हो रहे हैं और उनका सामाजिक आर्थिक और शैक्षणिक विकास जिस तेजी से होना चाहिए वह नहीं हो पा रहा है। कांग्रेस की तुलना में इन समुदायों के विकास योजनाओं के लिए 50% बजट भाजपा सरकार द्वारा कम कर दिया गया है। अनुसूचित जाति जनजाति के विकास के लिए जो राशि खर्च की जानी चाहिए थी उसे दूसरी मदों की ओर डायवर्ट किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि भाजपा शासित राज्यों में वन अधिकार नियम का खुला उल्लंघन हो रहा है सीजीमाली कुटुरूमाली नियामगिरी में बॉक्साइट खनन परियोजनाओं को पेसा और वन अधिकार अधिनियम का खुला उल्लंघन करते हुए आगे बढ़ाया जा रहा है जबकि यह इलाके संविधान की पांचवीं अनुसूची के तहत आते हैं। नियामगिरि का मामला तो न्यायालय के फैसले के विपरीत है उच्चतम न्यायालय ने इसके संदर्भ में 2013 में ही अपना फैसला सुना दिया था। जिसमें खनन गतिविधियों के लिए सहमति नहीं देने के ग्राम सभा के अधिकार को बरकरार रखा गया था।
अनुसूचित जाति एवं जनजाति आयोग का गठन इस देश के आदिवासी और दलित समुदाय के सामाजिक आर्थिक शैक्षणिक विकास का मूल्यांकन कर उनके लिए ठोस योजनाओं को बनाकर उनके क्रियान्वयन किस दिशा में पहल करने के लिए किया गया था परंतु आज भारत सरकार द्वारा इसे डिफंग कर दिया गया है, यह आयोग सिर्फ टूर प्रोग्राम के बहाने विभिन्न राज्यों का दौरा करने तक ही सीमित रह गए हैं।
संवाददाता सम्मेलन में प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष डॉ राजेश गुप्ता छोटू एवं सोनाल शांति उपस्थित थे।



