नई दिल्ली: राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (एनसीएसटी) के अध्यक्ष श्री अंतर सिंह आर्या से गेल इंडिया के महाप्रबंधक श्री रामराय टुडू एवं इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स फॉर एससी, एसटी एंड विमेन एंटरप्रेन्योर्स (आईसीसीएसडब्ल्यूई) के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री सुबीर पाल ने शिष्टाचार मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान आदिवासी विकास से जुड़े आर्थिक, सामाजिक एवं शैक्षिक विषयों पर लगभग 30 मिनट तक गहन विचार-विमर्श चला।
रोजगार एवं उद्यमिता पर विशेष जोर
बैठक में आदिवासी युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित करने तथा उन्हें स्वरोजगार और उद्यमिता से जोड़ने पर विशेष बल दिया गया। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं महिला उद्यमियों को सरकारी योजनाओं, वित्तीय सहायता और बाजार से जोड़ने के व्यावहारिक उपायों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। श्री सुबीर पाल ने बताया कि उनके मंच के माध्यम से उद्यमियों को व्यापारिक अवसर और बाजार संपर्क उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार कार्य किया जा रहा है।
शिक्षा एवं कौशल विकास की आवश्यकता
आदिवासी विकास के लिए शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार को अनिवार्य बताते हुए प्रतिभागियों ने आदिवासी बहुल क्षेत्रों में युवाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़ने पर जोर दिया। कौशल विकास एवं व्यावसायिक प्रशिक्षण को बढ़ावा देने की बात कही गई, ताकि स्थानीय युवाओं को उनकी क्षेत्रीय आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षण मिल सके। इससे उन्हें रोजगार एवं व्यवसाय के बेहतर अवसर प्राप्त होंगे।
स्वास्थ्य एवं बुनियादी सुविधाओं पर चर्चा
दुर्गम आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने तथा बुनियादी सुविधाओं के विकास को लेकर भी गंभीर विमर्श हुआ। विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और उनकी नियमित निगरानी की आवश्यकता पर विशेष बल दिया गया। श्री रामराय टुडू ने गेल इंडिया की ओर से कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) के तहत आदिवासी क्षेत्रों में विकासात्मक गतिविधियों में सहयोग की संभावनाओं का जिक्र किया।
प्रतिभागियों की भूमिका एवं संयुक्त पहल
अध्यक्ष श्री अंतर सिंह आर्या अनुसूचित जनजाति समुदायों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा तथा उनके सामाजिक-आर्थिक विकास से जुड़े विषयों पर आयोग का नेतृत्व कर रहे हैं। गेल इंडिया के महाप्रबंधक श्री रामराय टुडू सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम का प्रतिनिधित्व करते हैं, जबकि श्री सुबीर पाल एससी, एसटी एवं महिला उद्यमियों को मंच उपलब्ध कराने की दिशा में सक्रिय हैं।
बैठक में सरकारी संस्थाओं, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों तथा उद्योग जगत के मंचों के बीच सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर सहमति बनी। क्षेत्र विशेष की आवश्यकताओं के अनुरूप योजनाएं तैयार करने, परियोजनाओं की निगरानी एवं मूल्यांकन तथा आदिवासी युवाओं को आधुनिक तकनीक और व्यावसायिक कौशल से जोड़ने पर भी विचार-विमर्श किया गया।
प्रमुख प्रस्तावित कार्य क्षेत्र
- आदिवासी युवाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर
- अनुसूचित जाति, जनजाति एवं महिला उद्यमिता को प्रोत्साहन
- कौशल विकास एवं व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम
- शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार हेतु प्रयास
- स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतर उपलब्धता सुनिश्चित करना
- आदिवासी क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे का विकास
- सरकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन
- उद्योग एवं सरकारी संस्थाओं के बीच साझेदारी
- परियोजनाओं की नियमित निगरानी एवं मूल्यांकन
यह मुलाकात आदिवासी समुदायों के सर्वांगीण विकास के लिए सरकार, सार्वजनिक क्षेत्र और उद्योग जगत के बीच सहयोग की संभावनाओं को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। यदि प्रस्तावित पहलों को प्रभावी रूप से लागू किया जाता है, तो इससे आदिवासी युवाओं, उद्यमियों और समुदायों के लिए रोजगार, व्यवसाय, शिक्षा एवं विकास के नए अवसर तैयार हो सकते हैं। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर इस संबंध में आगे की जानकारी उपलब्ध होगी।



