रांची: महानगर सेवा भारती के तत्वावधान में सेवा भारती भाग-4 रक्षासूत्र कार्यक्रम का भव्य आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। रक्षाबंधन के पावन अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय सेवा भारती के वरिष्ठ अधिकारी गुरुशरण प्रसाद मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की रूपरेखा और मुख्य अतिथि
रांची के भाग-4 क्षेत्र में आयोजित इस रक्षासूत्र कार्यक्रम का उद्देश्य संगठन की मजबूती और सेवा कार्यों को गति देना था। मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित गुरुशरण प्रसाद ने उपस्थित कार्यकर्ताओं और बहनों को संबोधित करते हुए सेवा भारती के मूल उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि रक्षासूत्र केवल एक धागा नहीं, बल्कि समाज के प्रति दायित्व और सुरक्षा का प्रतीक है।
पदाधिकारियों ने साझा किए विचार
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे महानगर अध्यक्ष चंद्रकांत रायपत ने संगठन की वर्तमान गतिविधियों और भविष्य की योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि सेवा भारती निरंतर समाज के वंचित वर्ग के उत्थान के लिए कार्यरत है। भाग-4 के सचिव विनय कुमार ने क्षेत्र में चल रहे सेवा कार्यों का ब्यौरा प्रस्तुत करते हुए आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा रखी।
बहनों ने बांधा रक्षासूत्र, दोहराया सेवा संकल्प
कार्यक्रम का सबसे भावुक क्षण तब आया जब विभिन्न केंद्रों की शिक्षिकाओं, निरीक्षण कार्य से जुड़ीं निरीक्षिकाओं तथा सेवा भारती के सिलाई केंद्र से आईं बड़ी संख्या में बहनों ने उपस्थित सभी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को रक्षासूत्र बांधा। इस दौरान बहनों ने सबकी मंगल कामना करते हुए समाज सेवा का संकल्प दोहराया। मनोज कुमार समेत अनेक वरिष्ठ कार्यकर्ता इस अवसर पर उपस्थित रहे।
सेवा भारती का सामाजिक योगदान
सेवा भारती लंबे समय से शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वावलंबन के क्षेत्र में कार्य कर रही है। सिलाई केंद्रों के माध्यम से महिलाओं को हुनरमंद बनाकर आर्थिक रूप से सशक्त किया जा रहा है। रक्षाबंधन के अवसर पर ऐसे आयोजन संगठन की सामाजिक समरसता की भावना को प्रदर्शित करते हैं। रक्षाबंधन का यह पर्व भाई-बहन के स्नेह के साथ-साथ सामाजिक दायित्व का भी बोध कराता है।
आगामी योजनाएं और विस्तार
कार्यक्रम के अंत में विनय कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए बताया कि आने वाले दिनों में भाग-4 में नए सेवा केंद्र प्रारंभ किए जाएंगे। गुरुशरण प्रसाद ने सभी कार्यकर्ताओं को निरंतर सेवा कार्य में लगे रहने का आह्वान किया। कार्यक्रम का समापन सामूहिक प्रार्थना और प्रसाद वितरण के साथ हुआ।




