रांची: सेवा भारती का सुपोषण जागरण सप्ताह झारखंड के विभिन्न जिलों में व्यापक स्तर पर आयोजित किया जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पोषण के प्रति जागरूकता फैलाना तथा लोगों को संतुलित आहार अपनाने के लिए प्रेरित करना है। राजधानी रांची के रातू रोड स्थित इन्द्रपुरी, रोड नंबर-12 में आयोजित महिला समूह की बैठक में इस विषय पर विस्तृत चर्चा हुई।
सुपोषण जागरण सप्ताह में जंक फूड से दूर रहने की सलाह
बैठक को संबोधित करते हुए सेवा भारती की सुपोषण विषय प्रमुख डॉ निधि सहाय ने वर्तमान खान-पान की आदतों पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि बाजार के पके खाद्य पदार्थों से हमेशा दूरी बनाए रखनी चाहिए। आज बच्चे और बड़े समान रूप से चाउमीन, नूडल्स, चिप्स, पिज्जा, बर्गर और तले-भुने सामान बड़े चाव से खा रहे हैं। वास्तव में यह स्वास्थ्य के लिए धीमा जहर साबित हो रहा है। ये खाद्य पदार्थ शरीर को कुपोषित बनाने का काम करते हैं।
डॉ निधि सहाय ने जोर देकर कहा कि घर में बने भोजन ही वास्तव में सेहतमंद होते हैं। हमारे लिए समय-समय पर मोटे अनाज जैसे मरुआ, ज्वार, बाजरा, मक्के आदि का सेवन करना स्वास्थ्यवर्धक है। ये पारंपरिक अनाज पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं और शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं। उन्होंने महिलाओं से आग्रह किया कि वे अपने परिवार की भोजन थाली में इन पौष्टिक अनाजों को अनिवार्य रूप से शामिल करें।
देवघर में सुपोषित भारत अभियान का शुभारंभ
इससे पूर्व विगत सप्ताह राष्ट्रीय सेवा भारती के मंत्री डॉ रामकुमार ने देवघर के गिद्धनी ग्राम में सुपोषित भारत अभियान का विधिवत शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने संतुलित आहार अपनाने पर विशेष बल देते हुए उपस्थित ग्रामीणों को भोजन के पोषण विज्ञान से अवगत कराया। डॉ रामकुमार ने बताया कि कौन-सा भोजन करने से शरीर को क्या प्राप्त होता है, स्वस्थ शरीर के लिए क्या आवश्यक है और उसका स्रोत क्या है।
उन्होंने आस-पास सहज उपलब्ध आंवला, अमरूद, पपीता, सहजन और मौसमी साग-सब्जियों का नियमित इस्तेमाल करने पर बल दिया। डॉ रामकुमार ने कहा कि ये स्थानीय फल और सब्जियां विटामिन, खनिज लवण और एंटीऑक्सीडेंट का प्राकृतिक भंडार हैं। महंगे पूरक आहारों के बजाय इन देसी संसाधनों से ही पोषण की पूर्ति की जा सकती है।
पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान का संगम
सेवा भारती का यह अभियान पारंपरिक भारतीय खाद्य ज्ञान और आधुनिक पोषण विज्ञान का सुंदर संगम प्रस्तुत करता है। संगठन के कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर महिलाओं, किशोरियों और अभिभावकों को पोषण वाटिका विकसित करने, अंकुरित अनाज का सेवन करने तथा भोजन में विविधता लाने का प्रशिक्षण दे रहे हैं। इस दौरान आयरन, कैल्शियम, प्रोटीन और विटामिन की कमी से होने वाले रोगों के बारे में भी जागरूक किया जा रहा है।
अभियान से जुड़े कार्यकर्ताओं ने बताया कि आने वाले दिनों में झारखंड के सुदूर आदिवासी बहुल जिलों में भी विशेष शिविर लगाए जाएंगे। वहां स्थानीय बोली-भाषा में पोषण शिक्षा दी जाएगी ताकि संदेश अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी ढंग से पहुंच सके। सेवा भारती का मानना है कि कुपोषण मुक्त भारत का सपना तभी साकार होगा जब हर घर की रसोई पोषण का केंद्र बनेगी।
समुदाय की भागीदारी से आएगा बदलाव
रांची की बैठक में उपस्थित महिलाओं ने संकल्प लिया कि वे अपने मोहल्ले की अन्य महिलाओं तक यह संदेश पहुंचाएंगी। इन्द्रपुरी की एक गृहिणी सुनीता देवी ने कहा, “आज हमें पता चला कि हमारे आस-पास ही इतने पौष्टिक खाद्य पदार्थ उपलब्ध हैं। हम अब बाजार की चीजों पर कम निर्भर रहेंगे।” इस प्रकार का सामुदायिक जागरण ही अभियान की वास्तविक सफलता है।
सेवा भारती के पदाधिकारियों के अनुसार, सुपोषण जागरण सप्ताह के दौरान राज्य भर में पोषण रैली, नुक्कड़ नाटक, प्रदर्शनी और स्वास्थ्य जांच शिविरों का आयोजन किया जाएगा। यह अभियान केंद्र सरकार के पोषण अभियान और राष्ट्रीय पोषण मिशन के लक्ष्यों को जमीनी स्तर पर पूरा करने में सहायक सिद्ध होगा।
अधिक जानकारी के लिए भारत में कुपोषण पर विकिपीडिया का लेख पढ़ा जा सकता है।




