नई दिल्ली: सत्य निकेतन हादसे में कार्रवाई करते हुए दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोमवार को दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के दक्षिण जोन के उपायुक्त समेत पांच अधिकारियों को निलंबित कर दिया। इस हादसे में अब तक छह लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि बारह लोगों को मलबे से सुरक्षित निकाला गया है।
सत्य निकेतन हादसे में निलंबित अधिकारियों की सूची
मुख्यमंत्री कार्यालय से जारी आदेश के अनुसार निलंबित किए गए अधिकारियों में दक्षिण जोन के उपायुक्त राकेश कुमार, अधीक्षण अभियंता रणवीर सिंह, कार्यकारी अभियंता (भवन) ललित कुमार गोयल, सहायक अभियंता (भवन) सुनील चौहान और जूनियर इंजीनियर (भवन निर्माण) आशीष कुमार शामिल हैं। ये सभी अधिकारी इमारत की सुरक्षा और निर्माण मानकों की निगरानी के लिए जिम्मेदार थे।
मुख्यमंत्री ने किया घटनास्थल का दौरा
सोमवार सुबह मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दोबारा हादसा स्थल का दौरा करके राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा की। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने बताया कि लगभग अस्सी फीसद मलबा हटा दिया गया है, केवल बेसमेंट का मलबा शेष बचा है। बेसमेंट में पानी भरा हुआ था और पानी जमा होने के साथ-साथ पुरानी इमारत में चल रहे मरम्मत के काम की वजह से इमारत गिर गई।
बचाव अभियान की वर्तमान स्थिति
अब तक कुल बारह लोगों को मलबे से निकाला जा चुका है, जिनमें छह लोगों की मौत हो गई है और बाकी छह लोगों की हालत स्थिर बताई जा रही है। बचाव दल लगातार बेसमेंट में फंसे मलबे को हटाने में जुटे हुए हैं। एनडीआरएफ, दमकल विभाग और दिल्ली पुलिस की टीमें संयुक्त रूप से ऑपरेशन चला रही हैं।
पांचवीं मंजिल वाले भवनों को सील करने के निर्देश
मुख्यमंत्री ने दिल्ली में पांचवीं मंजिल वाले सभी भवनों को तत्काल सील करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही आसपास के पीजी एवं भवनों की भी सघन जांच कराने और नियमों का उल्लंघन मिलने पर सीलिंग करने का आदेश जारी किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दिल्लीवासियों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा और लापरवाही पर किसी को बख्शा नहीं जाएगा।
स्थानीय निवासियों में रोष और मांग
हादसे के बाद स्थानीय निवासियों और पीड़ित परिवारों में रोष व्याप्त है। लोगों का आरोप है कि इमारत में लंबे समय से अवैध निर्माण चल रहा था, जिसकी शिकायत कई बार निगम अधिकारियों से की गई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। पीड़ित परिवारों ने दोषी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई और उचित मुआवजे की मांग की है।
भवन सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल
इस हादसे ने एक बार फिर दिल्ली में भवन सुरक्षा मानकों और निगम की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि पुरानी इमारतों में बिना स्ट्रक्चरल ऑडिट के मरम्मत कार्य कराना खतरनाक साबित हो सकता है। दिल्ली नगर निगम की कार्यप्रणाली पर पहले भी सवाल उठते रहे हैं।
आगे की कार्रवाई और जांच
मुख्यमंत्री ने पूरे मामले की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद और अधिकारियों पर भी गाज गिर सकती है। इसके अलावा दिल्ली सरकार ने सभी जोन के उपायुक्तों को अपने-अपने क्षेत्र में भवनों का सुरक्षा ऑडिट कराने का निर्देश दिया है। सरकार का कहना है कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे।



